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लिंगानुपात : करीब 200 क्षेत्रों में अभी भी स्थिति खराब
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अंबाला सिटी। लिंगानुपात में सुधार के तमाम सरकारी प्रयास के बावजूद अंबाला में लिंगानुपात की स्थिति कुछ क्षेत्रों में चिंतनीय है। पिछले साल के आंकड़ों की मानें तो विभाग ने 200 से अधिक ऐसी जगह चयनित की है, जहां पर लिंगानुपात का आंकड़ा काफी खराब रहा है। इसमें सुधार के लिए प्रयास किए जाने की आवश्यकता है, हालांकि जिला महिला एवं बाल संरक्षण विभाग भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहा है।
लिंगानुपात को सुधारने के लिए जिला महिला एवं बाल संरक्षण विभाग बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत काम कर रहा है। लिंगानुपात की स्थिति की बात करें तो कई गांव व कॉलोनी ऐसी भी है जहां पर लिंगानुपात की स्थिति सोचनीय है। कहीं पर 10 लड़कों पर एक लड़की या सात लड़कों पर एक लड़की हुई है। ऐसे में विभाग इन गांवों व कॉलोनियों में कार्यक्रम आयोजित कर भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए प्रेरित कर रहा है, ताकि पिछले 934 के आंकड़े में और अधिक सुधार लाया जा सके।
हर वर्ष इस तरह हुआ सुधार
2020 और 2021 में अंबाला के लिंगानुपात में गिरावट में बाद 2022 में अंबाला में जन्म के समय लिंगानुपात में 26 अंकों का सुधार हुआ था। अंबाला में प्रति 1 हजार लड़कों पर 934 लड़कियां हुई थीं। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 2014 में प्रति 1 हजार लड़कों पर 865 लड़कियां, 2015 में 874, 2016 में 912 और 2017 में 925, 2018 में 916, 2019 में 959 (सबसे अधिक), 2020 में 931, 2021 में 908 और अब 2022 में 934 लिंगानुपात रहा है।
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कुछ गांवों में स्थिति बेहतर
ऐसा नहीं है कि सभी गांव व क्षेत्र में लिंगानुपात खराब है। कई गांव व क्षेत्र ऐसे भी जहां पर 1 लड़के पर 7 लड़कियां पैदा हुई जिसका रेशियो 7 हजार तक है। वहीं 4 हजार की रेशियो वाले भी कई गांव व क्षेत्र हैं। इसमें साहा ब्लॉक के शेरगढ़ का लिंगानुपात 3 हजार, हरयोली का 2800, हसनपुर का 3 हजार, नारायणगढ़ ब्लॉक के नागावा में 3750, औखल में 2250, अर्बन में रेलवे ग्वाल मंडी में 5 हजार, पक्की सराय में 2 हजार, हिम्मतपुरा में 3 हजार, शहजादपुर में गोबिंदपुर में 5 हजार, अंबाला छावनी में कलावर में 7 हजार, बिचपरी में 6 हजार, जलालपुर में 4 हजार का लिंगानुपात है।
इस क्षेत्रों का है खराब लिंगानुपात
शहजादपुर के शहजादपुर सात में लिंगानुपात शून्य रहा है, जहां चार लड़कों पर एक भी लड़की नहीं है। बीबीपुर में 100 प्रतिशत रहा है, यहां 10 लड़कों पर एक लड़की पैदा हुई। अर्बन में वाल्मीकि बस्ती में आठ लड़कों पर 1 लड़की पैदा हुई यहां का लिंगानुपात 125 रहा। नारायणगढ़ के सुरगल में 5 लड़कों पर 1 लड़की पैदा हुई। ऐसे ही अन्य कई गांव व क्षेत्र हैं, जहां पर लिंगानुपात इसी तरह का रहा है। इसी में सुधार के लिए अब विभाग तेजी के साथ काम रहा है।
केक कटवा मना रहे बेटियों का जम्नदिन
विभाग की ओर से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के तहत तेजी के साथ काम किया जा रहा है। इस दौरान विभाग की ओर से सामूहिक रूप से केक कटवा कर उनका जन्मदिन मनाया जा रहा है। वहीं महिलाओं को भी पाेषण टोकरी भेंट की जा रही है। इसके अलावा लोगों को भ्रूण हत्या न करने को लेकर जागरूक करने के साथ ही बेटियां किस मुकाम को हासिल कर रही हैं। इसके बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
आंकडों में सुधार के लिए किया जा रहा काम
अंबाला लिंगानुपात के मामले में काफी बेहतर स्थिति में है, परंतु इस आंकड़े में ओर अधिक सुधार हो। इसके लिए विभाग की ओर से तेजी के साथ काम किया जा रहा है जो कि आगे भी ऐसे ही जारी रहेगा।
- कविता, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग।
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लिंगानुपात को सुधारने के लिए जिला महिला एवं बाल संरक्षण विभाग बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत काम कर रहा है। लिंगानुपात की स्थिति की बात करें तो कई गांव व कॉलोनी ऐसी भी है जहां पर लिंगानुपात की स्थिति सोचनीय है। कहीं पर 10 लड़कों पर एक लड़की या सात लड़कों पर एक लड़की हुई है। ऐसे में विभाग इन गांवों व कॉलोनियों में कार्यक्रम आयोजित कर भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए प्रेरित कर रहा है, ताकि पिछले 934 के आंकड़े में और अधिक सुधार लाया जा सके।
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हर वर्ष इस तरह हुआ सुधार
2020 और 2021 में अंबाला के लिंगानुपात में गिरावट में बाद 2022 में अंबाला में जन्म के समय लिंगानुपात में 26 अंकों का सुधार हुआ था। अंबाला में प्रति 1 हजार लड़कों पर 934 लड़कियां हुई थीं। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 2014 में प्रति 1 हजार लड़कों पर 865 लड़कियां, 2015 में 874, 2016 में 912 और 2017 में 925, 2018 में 916, 2019 में 959 (सबसे अधिक), 2020 में 931, 2021 में 908 और अब 2022 में 934 लिंगानुपात रहा है।
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कुछ गांवों में स्थिति बेहतर
ऐसा नहीं है कि सभी गांव व क्षेत्र में लिंगानुपात खराब है। कई गांव व क्षेत्र ऐसे भी जहां पर 1 लड़के पर 7 लड़कियां पैदा हुई जिसका रेशियो 7 हजार तक है। वहीं 4 हजार की रेशियो वाले भी कई गांव व क्षेत्र हैं। इसमें साहा ब्लॉक के शेरगढ़ का लिंगानुपात 3 हजार, हरयोली का 2800, हसनपुर का 3 हजार, नारायणगढ़ ब्लॉक के नागावा में 3750, औखल में 2250, अर्बन में रेलवे ग्वाल मंडी में 5 हजार, पक्की सराय में 2 हजार, हिम्मतपुरा में 3 हजार, शहजादपुर में गोबिंदपुर में 5 हजार, अंबाला छावनी में कलावर में 7 हजार, बिचपरी में 6 हजार, जलालपुर में 4 हजार का लिंगानुपात है।
इस क्षेत्रों का है खराब लिंगानुपात
शहजादपुर के शहजादपुर सात में लिंगानुपात शून्य रहा है, जहां चार लड़कों पर एक भी लड़की नहीं है। बीबीपुर में 100 प्रतिशत रहा है, यहां 10 लड़कों पर एक लड़की पैदा हुई। अर्बन में वाल्मीकि बस्ती में आठ लड़कों पर 1 लड़की पैदा हुई यहां का लिंगानुपात 125 रहा। नारायणगढ़ के सुरगल में 5 लड़कों पर 1 लड़की पैदा हुई। ऐसे ही अन्य कई गांव व क्षेत्र हैं, जहां पर लिंगानुपात इसी तरह का रहा है। इसी में सुधार के लिए अब विभाग तेजी के साथ काम रहा है।
केक कटवा मना रहे बेटियों का जम्नदिन
विभाग की ओर से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के तहत तेजी के साथ काम किया जा रहा है। इस दौरान विभाग की ओर से सामूहिक रूप से केक कटवा कर उनका जन्मदिन मनाया जा रहा है। वहीं महिलाओं को भी पाेषण टोकरी भेंट की जा रही है। इसके अलावा लोगों को भ्रूण हत्या न करने को लेकर जागरूक करने के साथ ही बेटियां किस मुकाम को हासिल कर रही हैं। इसके बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
आंकडों में सुधार के लिए किया जा रहा काम
अंबाला लिंगानुपात के मामले में काफी बेहतर स्थिति में है, परंतु इस आंकड़े में ओर अधिक सुधार हो। इसके लिए विभाग की ओर से तेजी के साथ काम किया जा रहा है जो कि आगे भी ऐसे ही जारी रहेगा।
- कविता, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग।