{"_id":"680d2fa20bbb21e48701e7e4","slug":"seven-followers-of-namghar-acquitted-by-court-ambala-news-c-36-1-ame1006-141627-2025-04-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: नामघर से जुड़े सात अनुयायी कोर्ट से बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: नामघर से जुड़े सात अनुयायी कोर्ट से बरी
विज्ञापन
अंबाला सिटी। बराड़ा स्थित डेरा सच्चा सौदा के नामचर्चा घर से पेट्रोल और मिट्टी के तेल की बोतलें, डंडे, दरांती सहित अन्य वस्तुएं मिलने के मामले में एडिशनल सेशन जज अंशु शुक्ला की कोर्ट ने सात आरोपियों को बरी कर दिया।
इनमें बराड़ा निवासी संदीप कुमार, प्रवीन कुमार, उपलाना निवासी अशोक कुमार, अधोया निवासी राजेश कुमार, सुभरी निवासी संजीव कुमार, भोला और बराड़ा के महेंद्र पाल शामिल हैं। इस मामले में पुलिस कोर्ट में साबित नहीं कर पाई कि नाम चर्चा घर से बरामद वस्तुएं आरोपियों से संबंधित थी और दंगा भड़काने के लिए इस्तेमाल होनी थीं। वर्ष 2017 से चल रहे आठ वर्ष पुराने इस मामले में 26 गवाहों की गवाही को सुनकर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।
आरोपियों के बरी होने का ये है आधार
-पुलिस ने जो वस्तुएं बरामद की थीं उनकी पुष्टि पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट एसडीएम बराड़ा के हस्ताक्षर नहीं मिले।
-आरोपियों पर लगाई धारा आईपीसी 122 को कोर्ट ने खारिज कर दिया था। यह धारा देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के षड्यंत्र पर लगाई जाती है।
-जब पुलिस ने नामचर्चा घर की तलाश ली तो उक्त आरोपी मौके पर मौजूद नहीं थे।
- इतना ही नहीं पुलिस ने नामचर्चा घर के चौकीदार को भी जांच शामिल नहीं किया था।
यह है पूरा मामला
बराड़ा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने 28 अगस्त 2017 को मामला दर्ज कराया था। इसमें बताया था कि 25 अगस्त 2017 को डेरामुखी रामरहीम की पंचकूला सीबीआई कोर्ट में पेशी के चलते धारा 144 लगाई थी। इसके चलते 26 अगस्त को जगह-जगह पुलिस प्रशासन की ओर से तलाशी अभियान चलाया जा रहा था। जब इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने बताया कि जब वे बराड़ा के नामचर्चा घर पहुंचे तो वहां पर 13 बोतल कांच की, जिनमें पेट्रोल डीजल और मिट्टी का तेल भरा था। आठ बोतल प्लास्टिक, जिनमें पेट्रोल डीजल और मिट्टी का तेल बरामद हुआ। इसके अलावा लाठी डंडे और दरांति बरामद हुए थे। थाना प्रभारी सुनील कुमार ने शिकायत में बताया था कि इस दौरान उनके साथ एसडीएम बराड़ा और तहसीलदार भी मौजूद थे। पुलिस ने इन्हीं आधारों पर आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 122, 120बी और विस्फोटक अधिनियम 1908 के तहत धारा चार और पांच के तहत मामला दर्ज किया था। इसके आधार पर पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था। कुछ ही समय बाद आरोपियों को जमानत मिल गई थी। तब से यह मामला विचाराधीन था।
विज्ञापन
विज्ञापन
इनमें बराड़ा निवासी संदीप कुमार, प्रवीन कुमार, उपलाना निवासी अशोक कुमार, अधोया निवासी राजेश कुमार, सुभरी निवासी संजीव कुमार, भोला और बराड़ा के महेंद्र पाल शामिल हैं। इस मामले में पुलिस कोर्ट में साबित नहीं कर पाई कि नाम चर्चा घर से बरामद वस्तुएं आरोपियों से संबंधित थी और दंगा भड़काने के लिए इस्तेमाल होनी थीं। वर्ष 2017 से चल रहे आठ वर्ष पुराने इस मामले में 26 गवाहों की गवाही को सुनकर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।
विज्ञापन
आरोपियों के बरी होने का ये है आधार
-पुलिस ने जो वस्तुएं बरामद की थीं उनकी पुष्टि पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट एसडीएम बराड़ा के हस्ताक्षर नहीं मिले।
-आरोपियों पर लगाई धारा आईपीसी 122 को कोर्ट ने खारिज कर दिया था। यह धारा देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के षड्यंत्र पर लगाई जाती है।
-जब पुलिस ने नामचर्चा घर की तलाश ली तो उक्त आरोपी मौके पर मौजूद नहीं थे।
- इतना ही नहीं पुलिस ने नामचर्चा घर के चौकीदार को भी जांच शामिल नहीं किया था।
यह है पूरा मामला
बराड़ा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने 28 अगस्त 2017 को मामला दर्ज कराया था। इसमें बताया था कि 25 अगस्त 2017 को डेरामुखी रामरहीम की पंचकूला सीबीआई कोर्ट में पेशी के चलते धारा 144 लगाई थी। इसके चलते 26 अगस्त को जगह-जगह पुलिस प्रशासन की ओर से तलाशी अभियान चलाया जा रहा था। जब इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने बताया कि जब वे बराड़ा के नामचर्चा घर पहुंचे तो वहां पर 13 बोतल कांच की, जिनमें पेट्रोल डीजल और मिट्टी का तेल भरा था। आठ बोतल प्लास्टिक, जिनमें पेट्रोल डीजल और मिट्टी का तेल बरामद हुआ। इसके अलावा लाठी डंडे और दरांति बरामद हुए थे। थाना प्रभारी सुनील कुमार ने शिकायत में बताया था कि इस दौरान उनके साथ एसडीएम बराड़ा और तहसीलदार भी मौजूद थे। पुलिस ने इन्हीं आधारों पर आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 122, 120बी और विस्फोटक अधिनियम 1908 के तहत धारा चार और पांच के तहत मामला दर्ज किया था। इसके आधार पर पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था। कुछ ही समय बाद आरोपियों को जमानत मिल गई थी। तब से यह मामला विचाराधीन था।
विज्ञापन