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Ambala News: रेलवे स्टेशन की सुरक्षा राम भरोसे, सुरक्षा जांच भी नहीं
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अंबाला। अतिसंवेदनशील कहे जाने वाले अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन की सुरक्षा राम भरोसे हैं। अगर गलती से यहां कोई हमला हो जाए तो फिर हमलावरों से निपटने के लिए यहां कोई प्रबंध नहीं हैं। न तो रेलवे परिसर में सुरक्षा कर्मचारी नजर आते हैं और न ही मुख्य गेट पर। आलम यह है कि जिसका जहां से मन किया, वहां से वो प्लेटफार्म पर दाखिल हो गया। वहीं अगर कोई सुरक्षा कर्मचारी नजर आ भी जाए तो उनके हाथों में हथियार नहीं बल्कि डायरी व मोबाइल फोन नजर आएगा। ऐसे में छावनी स्टेशन की सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
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खानापूर्ति के नाम पर जांच
स्टेशन पर औचक चेकिंग अभियान तो चलाए जाते हैं, लेकिन यह अभियान मात्र खानापूर्ति तक सीमित रहते हैं ताकि अधिकारियों को यह लगे कि उनके आदेशों की पालना हो रही है। जबकि सच्चाई ये है कि शरारती व संदिग्ध तत्व, कब,कहां और किस रास्ते से स्टेशन पर प्रवेश कर जाएं, इसकी भनक भी सुरक्षा एजेंसियों को नहीं लगती।
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छह माह से खराब स्केनर
अंबाला छावनी की सुरक्षा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले लगभग छह माह से स्टेशन के यूटीएस काउंटर के नजदीक लगा लगेज स्केनर खराब पड़ा हुआ है। इस कारण स्टेशन पर आने वाले यात्री बिना जांच के ही प्लेटफार्म एक पर प्रवेश कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि लगेज स्केनर पर तैनात सुरक्षा कर्मी या तो मोबाइल पर व्यस्त रहते हैं या फिर बातें करने में। उनका किसी यात्री के सामान की तरफ कोई भी ध्यान नहीं होता।
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मिल चुकी धमकियां
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर लगभग 12 साल पहले आरडीएक्स से भरी एक कार मिली थी जोकि पार्किंग में खड़ी थी। इस कार को समय रहते सुरक्षा एजेंसियों ने देख लिया था और हादसा होने से टल गया। इसके बाद दर्जन के करीब धमकी भरे पत्र भी मिल चुके हैं। इसमें स्टेशन को उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। बावजूद इसके स्टेशन की सुरक्षा को लेकर आजतक कोई ठोस नीति नहीं बन पाई।
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स्टेशन की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है। सादी वर्दी में कर्मचारी तैनात रहते हैं। जरूरत पड़ने पर ही हथियार आदि को कर्मचारियों के सुपुर्द किया जाता है। आरपीएफ के साथ मिलकर रेलवे स्टेशन पर लगातार जांच अभियान भी चलाए जाते हैं।
नरेंद्र प्रसाद, प्रभारी जीआरपी अंबाला।
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खानापूर्ति के नाम पर जांच
स्टेशन पर औचक चेकिंग अभियान तो चलाए जाते हैं, लेकिन यह अभियान मात्र खानापूर्ति तक सीमित रहते हैं ताकि अधिकारियों को यह लगे कि उनके आदेशों की पालना हो रही है। जबकि सच्चाई ये है कि शरारती व संदिग्ध तत्व, कब,कहां और किस रास्ते से स्टेशन पर प्रवेश कर जाएं, इसकी भनक भी सुरक्षा एजेंसियों को नहीं लगती।
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छह माह से खराब स्केनर
अंबाला छावनी की सुरक्षा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले लगभग छह माह से स्टेशन के यूटीएस काउंटर के नजदीक लगा लगेज स्केनर खराब पड़ा हुआ है। इस कारण स्टेशन पर आने वाले यात्री बिना जांच के ही प्लेटफार्म एक पर प्रवेश कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि लगेज स्केनर पर तैनात सुरक्षा कर्मी या तो मोबाइल पर व्यस्त रहते हैं या फिर बातें करने में। उनका किसी यात्री के सामान की तरफ कोई भी ध्यान नहीं होता।
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मिल चुकी धमकियां
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर लगभग 12 साल पहले आरडीएक्स से भरी एक कार मिली थी जोकि पार्किंग में खड़ी थी। इस कार को समय रहते सुरक्षा एजेंसियों ने देख लिया था और हादसा होने से टल गया। इसके बाद दर्जन के करीब धमकी भरे पत्र भी मिल चुके हैं। इसमें स्टेशन को उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। बावजूद इसके स्टेशन की सुरक्षा को लेकर आजतक कोई ठोस नीति नहीं बन पाई।
स्टेशन की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है। सादी वर्दी में कर्मचारी तैनात रहते हैं। जरूरत पड़ने पर ही हथियार आदि को कर्मचारियों के सुपुर्द किया जाता है। आरपीएफ के साथ मिलकर रेलवे स्टेशन पर लगातार जांच अभियान भी चलाए जाते हैं।
नरेंद्र प्रसाद, प्रभारी जीआरपी अंबाला।