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शिअद के खाते में जा सकती है सिटी की सीट
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला
Updated Mon, 28 Jul 2014 12:25 AM IST
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अंबाला कैंट। अंबाला के चारों विधानसभा हलकों में भाजपा और कांग्रेस की तरह इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की सीट पर भी चुनाव लड़ने वाले टिकट के उम्मीदवारों की फेहरिस्त काफी लंबी होती जा रही है।
इनेलो हाईकमान भी इस मंथन में जुटा है कि किस दावेदार को मैदान में उतारा जाए, जो इनेलो की जीत को सुनिश्चित कर सके। इसके लिए इनेलो हाईकमान ने पहले ये घोषणा कर दी है कि हरियाणा में इनेलो का समझौता भले ही भाजपा से न हो, लेकिन शिरोमणि अकाली दल बादल (शिअद) से जरूर रहेगा।
इसी समझौते के चलते अंबाला की चारों विधानसभाओं में से अंबाला सिटी हल्के की सीट शिअद के खाते में जा सकती है। सूत्रों के अनुसार इनेलो हाईकमान की ओर से इस बात पर विचार विमर्श हो चुका है और जल्द ही इनेलो अपना अंतिम फैसला सार्वजनिक कर सकती है। इसके अलावा मुलाना, अंबाला कैंट व नारायणगढ़ हल्कों में इनेलो अपने प्रत्याशी उतारेगी।
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दरअसल, सूबे में जो राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं, उसमें विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का इनेलो से गठबंधन की संभावना बेहद क्षीण ही दिख रही है। इसलिए इनेलो सूबे में शिअद को साथ लेकर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। अब अंबाला शहर सीट पूरी तरह से पंजाब के साथ सटी पड़ी है। जबकि पिछली बार भी यहां ये शिअद प्रत्याशी को मैदान में उतारा गया था और इनेलो ने पूरा सहयोग दिया था। शिअद प्रत्याशी को यहां बहुत बढ़िया वोट प्राप्त हुए थे। इसलिए इस बार भी इस सीट के शिअद के खाते में जाने की प्रबल संभावनाएं हैं।
मुलाना विधानसभा
मुलाना सीट से अभी पूर्व मंत्री रिसाल सिंह के बेटे इनेलो के विधायक राजबीर बराड़ा काबिज है। पिछली बार उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना को हराकर बड़ी जीत हासिल की थी। इस बार भी वह प्रमुखता से दावेदारी कर रहे हैं। उन्हें इस बार साढौरा के पूर्व विधायक व तीन बार सांसद का चुनाव लड़ चुके बलवंत सिंह कोटकछुआ, जिला परिषद की सदस्य दया रानी टक्कर दे रही है। दया रानी का दावा है कि एक और जिला परिषद सदस्य उनके परिवार से है, इसलिए उनका बहुत बढ़िया वोट बैंक है।
अंबाला कैंट विधानसभा
हलके में अभी भाजपा का विधायक है। कैंट विधानसभा में इनेलो को अपना वोट बैंक बनाने के लिए हमेशा जूझना पड़ा है और अभी तक ये संघर्ष जारी है। फिर भी इनेलो की टिकट से चुनाव लड़ने वाले यहां कई हैं। कैंट सीट से इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए जग्गी कलरहेड़ी, गुरपाल सिंह भूरमंडी, कृपाल अरोड़ा व ओंकार सिंह ने दावा ठोक रहे हैं और इस वक्त लोगों से रूबरू होने में जुटे हुए हैं।
-अंबाला सिटी विधानसभा-
हलके में अभी कांग्रेस विधायक (अब कांग्रेस छोड़ी) काबिज है। अंबाला सिटी की सीट भले ही शिअद को जा सकती है। लेकिन इस सीट से इनेलो की टिकट पर लड़ने वाले दावेदारों की सबसे ज्यादा फौज है। सभी टिकट के लिए हाईकमान की ओर दौड़े लगा रहे हैं और अपनी-अपनी गोटियां फिट करने में लगे हुए हैं। इन दावेदारों में एडवोकेट दिलबाग सिंह दानीपुर, युवा इनेलो हरपाल सिंह कम्बोज, युवा नेता संदीप राणा, शम्मी सौंडा, ब्लाक प्रधान शीशपाल जंदेडी, जिला परिषद सदस्य चरणजीत सिंह मोहड़ी व बलविंद्र पूनिया शामिल है।
-नारायणगढ़ विधानसभा-
नारायणगढ़ हलके में अभी कांग्रेस विधायक काबिज है। लेकिन यहां भी इनेलो का अच्छी पकड़ रही है। इसलिए इनेलो इस हलके में भी टिकट वितरण को लेकर गंभीर है। फिलहाल इस सीट से चुनाव लड़ने वालों में पहले चुनाव लड़ चुके राम सिंह कोड़वा समेत जगमाल सिंह रौलों, चौटाला के पर्सनल डाक्टर व अंबाला का सिविल सर्जन रहे सतबीर चौधरी, सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक के चेयरमैन माम चंद के बेटे अमरीक सिंह रज्जूमाजरा व पवन गुज्जर भी कतार में हैं। सभी नेता इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए खुद को प्रबल दावेदार मान रहे हैं।
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इनेलो हाईकमान भी इस मंथन में जुटा है कि किस दावेदार को मैदान में उतारा जाए, जो इनेलो की जीत को सुनिश्चित कर सके। इसके लिए इनेलो हाईकमान ने पहले ये घोषणा कर दी है कि हरियाणा में इनेलो का समझौता भले ही भाजपा से न हो, लेकिन शिरोमणि अकाली दल बादल (शिअद) से जरूर रहेगा।
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इसी समझौते के चलते अंबाला की चारों विधानसभाओं में से अंबाला सिटी हल्के की सीट शिअद के खाते में जा सकती है। सूत्रों के अनुसार इनेलो हाईकमान की ओर से इस बात पर विचार विमर्श हो चुका है और जल्द ही इनेलो अपना अंतिम फैसला सार्वजनिक कर सकती है। इसके अलावा मुलाना, अंबाला कैंट व नारायणगढ़ हल्कों में इनेलो अपने प्रत्याशी उतारेगी।
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दरअसल, सूबे में जो राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं, उसमें विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का इनेलो से गठबंधन की संभावना बेहद क्षीण ही दिख रही है। इसलिए इनेलो सूबे में शिअद को साथ लेकर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। अब अंबाला शहर सीट पूरी तरह से पंजाब के साथ सटी पड़ी है। जबकि पिछली बार भी यहां ये शिअद प्रत्याशी को मैदान में उतारा गया था और इनेलो ने पूरा सहयोग दिया था। शिअद प्रत्याशी को यहां बहुत बढ़िया वोट प्राप्त हुए थे। इसलिए इस बार भी इस सीट के शिअद के खाते में जाने की प्रबल संभावनाएं हैं।
मुलाना विधानसभा
मुलाना सीट से अभी पूर्व मंत्री रिसाल सिंह के बेटे इनेलो के विधायक राजबीर बराड़ा काबिज है। पिछली बार उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना को हराकर बड़ी जीत हासिल की थी। इस बार भी वह प्रमुखता से दावेदारी कर रहे हैं। उन्हें इस बार साढौरा के पूर्व विधायक व तीन बार सांसद का चुनाव लड़ चुके बलवंत सिंह कोटकछुआ, जिला परिषद की सदस्य दया रानी टक्कर दे रही है। दया रानी का दावा है कि एक और जिला परिषद सदस्य उनके परिवार से है, इसलिए उनका बहुत बढ़िया वोट बैंक है।
अंबाला कैंट विधानसभा
हलके में अभी भाजपा का विधायक है। कैंट विधानसभा में इनेलो को अपना वोट बैंक बनाने के लिए हमेशा जूझना पड़ा है और अभी तक ये संघर्ष जारी है। फिर भी इनेलो की टिकट से चुनाव लड़ने वाले यहां कई हैं। कैंट सीट से इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए जग्गी कलरहेड़ी, गुरपाल सिंह भूरमंडी, कृपाल अरोड़ा व ओंकार सिंह ने दावा ठोक रहे हैं और इस वक्त लोगों से रूबरू होने में जुटे हुए हैं।
-अंबाला सिटी विधानसभा-
हलके में अभी कांग्रेस विधायक (अब कांग्रेस छोड़ी) काबिज है। अंबाला सिटी की सीट भले ही शिअद को जा सकती है। लेकिन इस सीट से इनेलो की टिकट पर लड़ने वाले दावेदारों की सबसे ज्यादा फौज है। सभी टिकट के लिए हाईकमान की ओर दौड़े लगा रहे हैं और अपनी-अपनी गोटियां फिट करने में लगे हुए हैं। इन दावेदारों में एडवोकेट दिलबाग सिंह दानीपुर, युवा इनेलो हरपाल सिंह कम्बोज, युवा नेता संदीप राणा, शम्मी सौंडा, ब्लाक प्रधान शीशपाल जंदेडी, जिला परिषद सदस्य चरणजीत सिंह मोहड़ी व बलविंद्र पूनिया शामिल है।
-नारायणगढ़ विधानसभा-
नारायणगढ़ हलके में अभी कांग्रेस विधायक काबिज है। लेकिन यहां भी इनेलो का अच्छी पकड़ रही है। इसलिए इनेलो इस हलके में भी टिकट वितरण को लेकर गंभीर है। फिलहाल इस सीट से चुनाव लड़ने वालों में पहले चुनाव लड़ चुके राम सिंह कोड़वा समेत जगमाल सिंह रौलों, चौटाला के पर्सनल डाक्टर व अंबाला का सिविल सर्जन रहे सतबीर चौधरी, सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक के चेयरमैन माम चंद के बेटे अमरीक सिंह रज्जूमाजरा व पवन गुज्जर भी कतार में हैं। सभी नेता इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए खुद को प्रबल दावेदार मान रहे हैं।