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Ambala News: स्कूल बस चालकों को मिलेगा प्रशिक्षण, बनेगा शेड्यूल
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सतनाम सिंह
अंबाला सिटी। सेफ स्कूल कैंपस और सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत नियमों की पालना करने के लिए सभी निजी स्कूल संचालकों को निर्देश दिए। निजी स्कूलों को इसके लिए विभाग को शपथ पत्र भरकर देना होगा। इसके लिए शिक्षा विभाग प्रोफार्मा निजी स्कूलों को देगा।
शनिवार को जिला शिक्षा सदन में जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश कुमार ने सभी निजी स्कूल संचालकों, प्रधानाचार्यों समेत उनके प्रतिनिधियों की बैठक ली। एक घंटे से ज्यादा देर तक चली बैठक में निजी स्कूल संचालकों ने भी अपने प्रश्न भी रखे। वहीं, उपमंडल स्तरीय कमेटी 15 से 25 अप्रैल के बीच स्कूल बसों की फिटनेस जांचने के लिए चेकिंग करेगी।
डीईओ सुरेश कुमार ने सभी स्कूलों को सजेशन एवं शिकायत बॉक्स भी लगाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने दिव्यांग बच्चों और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर भी अहम कदम उठाने के लिए कहा। बैठक में फायर सेफ्टी को लेकर भी चर्चा हुई। वहीं, कई निजी स्कूल संचालकों ने अवगत करवाया कि बराड़ा, साहा रोड पर डंपर की तेज गति से स्कूल बसों को हादसे का खतरा रहता है।
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संचालकों ने यह भी बताया कि स्कूलों में बच्चों को छोड़ने वाली प्राइवेट वैन में भी 8 बच्चों की जगह 20 बच्चों को बिठाया जाता है, उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। बैठक में निजी स्कूल एसोसिएशन पदाधिकारियों ने भी अपने सवाल रखे। बैठक शुरू होने से पहले महेंद्रगढ़ के कनीना में स्कूल बस हादसे में मृतक बच्चों के लिए दो मिनट का मौन भी रखा। वहीं, स्कूल संचालकों ने स्कूल कैंपस से बसों को इंपाउंड करने का विरोध जताया। उन्होंने डीईओ को इन बसों को तुरंत छोड़ने के लिए आग्रह किया।
पहले 2020 में दिया था प्रशिक्षण
बैठक में स्कूल बस चालकों के प्रशिक्षण के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इससे पहले 2020 में स्कूल बस चालकों को प्रशिक्षण दिया गया था, मगर उसके बाद से किसी ने सुध नहीं ली। अब दोबारा प्रशिक्षण करवाने पर चर्चा की गई। स्कूल संचालकों ने भी यह प्रशिक्षण करवाने की मांग उठाई कि इसके लिए समय सीमा तय की जाए। इस पर डीईओ सुरेश कुमार ने कहा कि आरटीए से बातचीत कर प्रशिक्षण को लेकर शेड्युल बनाएगा जाएगा।
स्कूलों की 1200 बसों की होगी जांच
जिले में करीब 289 स्कूलों की 1200 बसों की चेकिंग 15 से 25 अप्रैल के बीच में की जाएगी। डीईओ ने सभी स्कूलों को प्रबंध समिति और प्रधानाचार्या के गैप को कम करने के लिए भी कहा। साथ ही सेफ स्कूल कैंपस व सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी को लेकर एक नोडल बनाने का सुझाव दिया ताकि जिम्मेदारी से बच्चों की सुरक्षा को लेकर कार्य किया जा सके। बैठक में चर्चा हुई कि कई स्कूल बसों के पास आरटीए से फिटनेस प्रमाण-पत्र नहीं है।
कोट्स
निजी स्कूलों को सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत नियम पूरा करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन स्कूल संचालकों पर ही गाज गिराना गलत है। स्कूलों में खड़ी बसों को इंपाउंड करना गलत है। अगर कोई स्कूल बस सड़क पर चल रही है और वह नियम पूरे नहीं कर रही तो उन नियमों को पूरा करने के लिए स्कूल तैयार हैं। स्कूल संचालक बच्चों की सुरक्षा को लेकर सचेत है।
सौरभ कपूर, प्रदेश प्रवक्ता, हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेंस।
कोट्स
सभी स्कूल संचालक प्रशासन के साथ मिलकर बच्चों की सुरक्षा के इंतजाम करेंगे। स्कूलों में गुड टच बैड टच के बारे जागरूक करने के लिए कार्यशाला भी लगाई जाएगी। सरकार से मांग है कि 134-ए, चिराग स्कीम के तहत निजी स्कूलों का पैसा दिया जाए। सरकार अपना राजधर्म निभाएं, हम अपना नैतिक धर्म निभाएंगे। सरकार को स्कूलों के लिए फंड की व्यवस्था करनी चाहिए। स्कूलों की बसों को इंपाउंड करना गलत है, उन्हें तुरंत प्रभाव से छोड़ा जाए।
डॉ. कुलभूषण शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस।
वर्जन
निजी स्कूल संचालकों की बैठक ली गई, इसमें सेफ स्कूल कैंपस व सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के लिए चर्चा की गई। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि पॉलिसी के तहत नियमों को पूरा कर उनकी पालना की जाए। स्कूलों को एक प्रोफार्मा भी भेजा जाएगा। इस प्रोफार्मा को भरकर स्कूल एफिडेविट देंगे और स्कूलों में जो भी कमियां हैं, उनको भी पूरा करने के निर्देश दिए। जिले में करीब 1200 स्कूल बसों की चेकिंग 15 से 25 अप्रैल के बीच की जाएगी।
सुरेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी, अंबाला।
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अंबाला सिटी। सेफ स्कूल कैंपस और सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत नियमों की पालना करने के लिए सभी निजी स्कूल संचालकों को निर्देश दिए। निजी स्कूलों को इसके लिए विभाग को शपथ पत्र भरकर देना होगा। इसके लिए शिक्षा विभाग प्रोफार्मा निजी स्कूलों को देगा।
शनिवार को जिला शिक्षा सदन में जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश कुमार ने सभी निजी स्कूल संचालकों, प्रधानाचार्यों समेत उनके प्रतिनिधियों की बैठक ली। एक घंटे से ज्यादा देर तक चली बैठक में निजी स्कूल संचालकों ने भी अपने प्रश्न भी रखे। वहीं, उपमंडल स्तरीय कमेटी 15 से 25 अप्रैल के बीच स्कूल बसों की फिटनेस जांचने के लिए चेकिंग करेगी।
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डीईओ सुरेश कुमार ने सभी स्कूलों को सजेशन एवं शिकायत बॉक्स भी लगाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने दिव्यांग बच्चों और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर भी अहम कदम उठाने के लिए कहा। बैठक में फायर सेफ्टी को लेकर भी चर्चा हुई। वहीं, कई निजी स्कूल संचालकों ने अवगत करवाया कि बराड़ा, साहा रोड पर डंपर की तेज गति से स्कूल बसों को हादसे का खतरा रहता है।
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संचालकों ने यह भी बताया कि स्कूलों में बच्चों को छोड़ने वाली प्राइवेट वैन में भी 8 बच्चों की जगह 20 बच्चों को बिठाया जाता है, उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। बैठक में निजी स्कूल एसोसिएशन पदाधिकारियों ने भी अपने सवाल रखे। बैठक शुरू होने से पहले महेंद्रगढ़ के कनीना में स्कूल बस हादसे में मृतक बच्चों के लिए दो मिनट का मौन भी रखा। वहीं, स्कूल संचालकों ने स्कूल कैंपस से बसों को इंपाउंड करने का विरोध जताया। उन्होंने डीईओ को इन बसों को तुरंत छोड़ने के लिए आग्रह किया।
पहले 2020 में दिया था प्रशिक्षण
बैठक में स्कूल बस चालकों के प्रशिक्षण के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इससे पहले 2020 में स्कूल बस चालकों को प्रशिक्षण दिया गया था, मगर उसके बाद से किसी ने सुध नहीं ली। अब दोबारा प्रशिक्षण करवाने पर चर्चा की गई। स्कूल संचालकों ने भी यह प्रशिक्षण करवाने की मांग उठाई कि इसके लिए समय सीमा तय की जाए। इस पर डीईओ सुरेश कुमार ने कहा कि आरटीए से बातचीत कर प्रशिक्षण को लेकर शेड्युल बनाएगा जाएगा।
स्कूलों की 1200 बसों की होगी जांच
जिले में करीब 289 स्कूलों की 1200 बसों की चेकिंग 15 से 25 अप्रैल के बीच में की जाएगी। डीईओ ने सभी स्कूलों को प्रबंध समिति और प्रधानाचार्या के गैप को कम करने के लिए भी कहा। साथ ही सेफ स्कूल कैंपस व सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी को लेकर एक नोडल बनाने का सुझाव दिया ताकि जिम्मेदारी से बच्चों की सुरक्षा को लेकर कार्य किया जा सके। बैठक में चर्चा हुई कि कई स्कूल बसों के पास आरटीए से फिटनेस प्रमाण-पत्र नहीं है।
कोट्स
निजी स्कूलों को सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत नियम पूरा करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन स्कूल संचालकों पर ही गाज गिराना गलत है। स्कूलों में खड़ी बसों को इंपाउंड करना गलत है। अगर कोई स्कूल बस सड़क पर चल रही है और वह नियम पूरे नहीं कर रही तो उन नियमों को पूरा करने के लिए स्कूल तैयार हैं। स्कूल संचालक बच्चों की सुरक्षा को लेकर सचेत है।
सौरभ कपूर, प्रदेश प्रवक्ता, हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेंस।
कोट्स
सभी स्कूल संचालक प्रशासन के साथ मिलकर बच्चों की सुरक्षा के इंतजाम करेंगे। स्कूलों में गुड टच बैड टच के बारे जागरूक करने के लिए कार्यशाला भी लगाई जाएगी। सरकार से मांग है कि 134-ए, चिराग स्कीम के तहत निजी स्कूलों का पैसा दिया जाए। सरकार अपना राजधर्म निभाएं, हम अपना नैतिक धर्म निभाएंगे। सरकार को स्कूलों के लिए फंड की व्यवस्था करनी चाहिए। स्कूलों की बसों को इंपाउंड करना गलत है, उन्हें तुरंत प्रभाव से छोड़ा जाए।
डॉ. कुलभूषण शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस।
वर्जन
निजी स्कूल संचालकों की बैठक ली गई, इसमें सेफ स्कूल कैंपस व सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के लिए चर्चा की गई। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि पॉलिसी के तहत नियमों को पूरा कर उनकी पालना की जाए। स्कूलों को एक प्रोफार्मा भी भेजा जाएगा। इस प्रोफार्मा को भरकर स्कूल एफिडेविट देंगे और स्कूलों में जो भी कमियां हैं, उनको भी पूरा करने के निर्देश दिए। जिले में करीब 1200 स्कूल बसों की चेकिंग 15 से 25 अप्रैल के बीच की जाएगी।
सुरेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी, अंबाला।