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Ambala News: मजदूरों की कमी से अटका सड़कों का काम, परेशानी
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अंबाला। श्रमिकों के अपने घर जाने से छावनी की सड़कों का काम अटक गया है। इससे लोगों और व्यापारियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। सड़कों की खस्ता हालात को देखते हुए प्रशासन को भी कोसा जा रहा है।
ऐसे में अगर बारिश हो गई तो सड़कें तालाब का रूप ले लेंगी, जोकि फिर एक बड़ी दिक्कत बन जाएगी। ये जानकारी निगार सिनेमा के सामने अनाजमंडी की तरफ जा रही सड़क किनारे रहने वाले लोगों और दुकानदारों ने दी। इसी प्रकार हिल रोड पर लगी सब्जी मंडी पर भी ऐसे हालात हैं। गोपाल, मनमीत, कृष्ण, रमेश और सुरजीत ने बताया कि सड़क को तोड़ने के लिए जितनी जल्दी की गई थी, अगर उतनी जल्दी सड़क भी बन जाती तो काफी राहत मिलती। सड़क कब बनेगी, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।
जब कमेटी जाकर पता करते हैं तो सिर्फ एक ही जानकारी मिलती है कि जल्द बन जाएगी, आचार संहिता के कारण काम रुक गया है। हैरानी की बात है कि जो काम पहले से ही चल रहा है, उसका आचार संहिता से क्या संबंध है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि नप के विभागीय अधिकारी व कर्मचारी मामले को लेकर गंभीर नहीं है और इसका खामियाजा स्थानीय लोगों व दुकानदारों को भुगतना पड़ रहा है।
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ढीली कार्यशैली का खामियाजा
जानकारी मिली थी कि सात करोड़ की लागत से सदर क्षेत्र की सड़कों का उद्धार हो जाएगा। लेकिन उद्धार तो नहीं हुआ, उल्टा बंटाधार जरूर हो गया है। यह सब विभागीय अधिकारियों की ढीली कार्यशैली का नतीजा है।
रत्न, कारोबारी।
जिम्मेदारी होनी चाहिए तय
जहां भी कोई सरकारी काम होता है तो वहां पर सूचना बोर्ड लगाया जाता है कि कौनसा ठेकेदार काम कर रहा है। इसकी लागत कितनी है। ठेकेदार का मोबाइल नंबर और काम कब पूरा होगा। यह सब जानकारी सूचना बोर्ड पर होती है।
मस्तराम, स्थानीय निवासी।
बारिश में बढ़ जाएगी परेशानी
सड़क को एक से डेढ़ फुट तक गहरा खो दिया गया है। अगर गनीमत से बारिश हो गई तो फिर हालात काफी खराब हो जाएंगे। यही सड़कें तालाब का रूप धारण कर लेंगी। इस दौरान कोई हादसा हो गया तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
रामशंकर, व्यापारी।
वर्जन
होली पर अधिकतर श्रमिक बिहार चले गए हैं। इस कारण सड़कों का काम अटक गया है। श्रमिकों मिलते ही अधूरी सड़कों का निर्माण कार्य पूरा करा दिया जाएगा।
मंदीप सिंह, कार्यकारी अभियंता, नप, सदर।
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ऐसे में अगर बारिश हो गई तो सड़कें तालाब का रूप ले लेंगी, जोकि फिर एक बड़ी दिक्कत बन जाएगी। ये जानकारी निगार सिनेमा के सामने अनाजमंडी की तरफ जा रही सड़क किनारे रहने वाले लोगों और दुकानदारों ने दी। इसी प्रकार हिल रोड पर लगी सब्जी मंडी पर भी ऐसे हालात हैं। गोपाल, मनमीत, कृष्ण, रमेश और सुरजीत ने बताया कि सड़क को तोड़ने के लिए जितनी जल्दी की गई थी, अगर उतनी जल्दी सड़क भी बन जाती तो काफी राहत मिलती। सड़क कब बनेगी, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।
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जब कमेटी जाकर पता करते हैं तो सिर्फ एक ही जानकारी मिलती है कि जल्द बन जाएगी, आचार संहिता के कारण काम रुक गया है। हैरानी की बात है कि जो काम पहले से ही चल रहा है, उसका आचार संहिता से क्या संबंध है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि नप के विभागीय अधिकारी व कर्मचारी मामले को लेकर गंभीर नहीं है और इसका खामियाजा स्थानीय लोगों व दुकानदारों को भुगतना पड़ रहा है।
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ढीली कार्यशैली का खामियाजा
जानकारी मिली थी कि सात करोड़ की लागत से सदर क्षेत्र की सड़कों का उद्धार हो जाएगा। लेकिन उद्धार तो नहीं हुआ, उल्टा बंटाधार जरूर हो गया है। यह सब विभागीय अधिकारियों की ढीली कार्यशैली का नतीजा है।
रत्न, कारोबारी।
जिम्मेदारी होनी चाहिए तय
जहां भी कोई सरकारी काम होता है तो वहां पर सूचना बोर्ड लगाया जाता है कि कौनसा ठेकेदार काम कर रहा है। इसकी लागत कितनी है। ठेकेदार का मोबाइल नंबर और काम कब पूरा होगा। यह सब जानकारी सूचना बोर्ड पर होती है।
मस्तराम, स्थानीय निवासी।
बारिश में बढ़ जाएगी परेशानी
सड़क को एक से डेढ़ फुट तक गहरा खो दिया गया है। अगर गनीमत से बारिश हो गई तो फिर हालात काफी खराब हो जाएंगे। यही सड़कें तालाब का रूप धारण कर लेंगी। इस दौरान कोई हादसा हो गया तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
रामशंकर, व्यापारी।
वर्जन
होली पर अधिकतर श्रमिक बिहार चले गए हैं। इस कारण सड़कों का काम अटक गया है। श्रमिकों मिलते ही अधूरी सड़कों का निर्माण कार्य पूरा करा दिया जाएगा।
मंदीप सिंह, कार्यकारी अभियंता, नप, सदर।