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ब्लैक फंगस के मरीजों को राहत कल्चर टेस्ट शुरू अब नागरिक अस्पताल में ही होगी ब्लैक फंगस की पुष्टि
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अंबाला। जिले में ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अब संदिग्ध मरीजों को ब्लैक फंगस की पुष्टि के लिए मेडिकल कॉलेज या प्राइवेट लैब में जाकर कल्चर टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अंबाला शहर जिला नागरिक अस्पताल में ही मरीजों के कल्चर सैंपल लिए जाएंगे। प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में केवल अंबाला शहर में ही यह सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। हालांकि प्रदेशभर के सभी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों में ब्लैक फंगस के कल्चर टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन नागरिक अस्पतालों में नहीं थी।
अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में अब तक करीब 5 मरीजों के कल्चर सैंपल लिए जा चुके हैं। उधर अब तक जिले में ब्लैक फंगस के 22 केस सामने आ चुके हैं इनमें से दो की मौत और 3 ठीक होकर घर लौट चुके हैं। वीरवार को अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में एक संदिग्ध ब्लैक फंगस की मरीज कर्मजीत कौर को भर्ती करवाया गया। उधर मुज्जफरनगर की बलजीत कौर को करनाल कल्पना चावला में दाखिल नहीं करने और महिला ने जिस तरह से धक्के खाए उससे सबक लेते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग ने निर्णय लिया है कि जिले से बाहर के जो भी मरीज होंगे उन्हें अब पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया जाएगा।
कुरुक्षेत्र जिले के गुमटी गांव की है महिला
शाहाबाद के गुमटी गांव से आई 45 वर्षीय कर्मजीत कौर बीमार चल रही थी। शाहाबाद के एक निजी अस्पताल में महिला को करीब 20 दिन पहले भर्ती करवाया गया था। महिला का शुगर 500 पहुंच गया था। इलाज के दौरान 120 पहुंच गया था। इसीलिए अस्पताल से करीब 10 दिन पहले छुट्टी दे दी गई। घर पर पहुंचने के बाद फिर से हालत बिगड़ गई फिर उसी अस्पताल पहुंचे जहां से दवा देकर घर भेज दिया गया। दो दिन पहले महिला के दांत में दर्द के साथ वह काले पड़ गए और आंख में सूजन आ गई। यह देख परिजन अनहोनी की आशंका से महिला के परिजन उसे अंबाला शहर नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे। बेटे गोल्डी ने बताया कि यहां पर सीटी स्कैन के साथ-साथ ब्लैक फंगस कां सैंपल लिया गया है, हालांकि अभी रिपोर्ट नहीं आई लेकिन डॉक्टरों ने ब्लैक फंगस का शक जताया।
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क्या है कल्चर टेस्ट
कोरोना की तरह ब्लैक फंगस के केस में भी नाक-गले से सैंपल लिए जाते हैं। इन सैंपल में फंगस का कल्चर पता करते हैं। इससे पहले माइक्रोस्कॉपी से जांच की जाती है। यदि माइक्रोस्कॉपी में संदिग्ध केस मिले तो उसकी पुष्टि के लिए बलगम कल्चर टेस्ट किया जाता है।
नागरिक अस्पताल अंबाला शहर में कोरोना का कल्चर टेस्ट शुरू कर दिया है। नागरिक अस्पतालों में यह सुविधा सबसे पहले अंबाला में शुरू की गई है। हालांकि सभी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों में यह टेस्ट पहले ही हो रहे थे।
-डॉ. कुलदीप सिंह, सिविल सर्जन अंबाला।
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अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में अब तक करीब 5 मरीजों के कल्चर सैंपल लिए जा चुके हैं। उधर अब तक जिले में ब्लैक फंगस के 22 केस सामने आ चुके हैं इनमें से दो की मौत और 3 ठीक होकर घर लौट चुके हैं। वीरवार को अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में एक संदिग्ध ब्लैक फंगस की मरीज कर्मजीत कौर को भर्ती करवाया गया। उधर मुज्जफरनगर की बलजीत कौर को करनाल कल्पना चावला में दाखिल नहीं करने और महिला ने जिस तरह से धक्के खाए उससे सबक लेते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग ने निर्णय लिया है कि जिले से बाहर के जो भी मरीज होंगे उन्हें अब पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया जाएगा।
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कुरुक्षेत्र जिले के गुमटी गांव की है महिला
शाहाबाद के गुमटी गांव से आई 45 वर्षीय कर्मजीत कौर बीमार चल रही थी। शाहाबाद के एक निजी अस्पताल में महिला को करीब 20 दिन पहले भर्ती करवाया गया था। महिला का शुगर 500 पहुंच गया था। इलाज के दौरान 120 पहुंच गया था। इसीलिए अस्पताल से करीब 10 दिन पहले छुट्टी दे दी गई। घर पर पहुंचने के बाद फिर से हालत बिगड़ गई फिर उसी अस्पताल पहुंचे जहां से दवा देकर घर भेज दिया गया। दो दिन पहले महिला के दांत में दर्द के साथ वह काले पड़ गए और आंख में सूजन आ गई। यह देख परिजन अनहोनी की आशंका से महिला के परिजन उसे अंबाला शहर नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे। बेटे गोल्डी ने बताया कि यहां पर सीटी स्कैन के साथ-साथ ब्लैक फंगस कां सैंपल लिया गया है, हालांकि अभी रिपोर्ट नहीं आई लेकिन डॉक्टरों ने ब्लैक फंगस का शक जताया।
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क्या है कल्चर टेस्ट
कोरोना की तरह ब्लैक फंगस के केस में भी नाक-गले से सैंपल लिए जाते हैं। इन सैंपल में फंगस का कल्चर पता करते हैं। इससे पहले माइक्रोस्कॉपी से जांच की जाती है। यदि माइक्रोस्कॉपी में संदिग्ध केस मिले तो उसकी पुष्टि के लिए बलगम कल्चर टेस्ट किया जाता है।
नागरिक अस्पताल अंबाला शहर में कोरोना का कल्चर टेस्ट शुरू कर दिया है। नागरिक अस्पतालों में यह सुविधा सबसे पहले अंबाला में शुरू की गई है। हालांकि सभी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों में यह टेस्ट पहले ही हो रहे थे।
-डॉ. कुलदीप सिंह, सिविल सर्जन अंबाला।