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Ambala News: 8 साल बाद आरपीएफ के हत्थे चढ़ा उद्घोषित आरोपी तरुण गिल
Tue, 22 Sep 2026 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Tue, 22 Sep 2026 12:51 AM IST
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अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन की आरपीएफ पोस्ट पर मौजूद भगौड़ा आरोपी तरुण गिल। आरपीएफ
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। कैंट रेलवे स्टेशन की आरपीएफ पोस्ट टीम ने करीब आठ वर्ष से फरार चल रहे उद्घोषित अपराधी तरुण गिल को गिरफ्तार किया है। आरोपी 2017 में रेलवे अधिनियम की धारा 174 के तहत दर्ज एक पुराने मामले में वांछित था। उसने कैंट और सिटी के बीच सिग्नल केबल काटकर ट्रेनों का संचालन बाधित किया था।
गिरफ्तारी से लगातार बचने के कारण वरिष्ठ मंडल रेलवे मजिस्ट्रेट, अंबाला की अदालत ने 7 अगस्त 2018 को उसे उद्घोषित अपराधी घोषित किया था। आरपीएफ ने अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्थानीय मुखबिर तंत्र की मदद से उसे काबू किया। 20 सितंबर को प्रभारी रविंद्र सिंह के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम में सहायक उप निरीक्षक राजेश कुमार, सिपाही विजय सिंह, नवीन और सचिन शामिल थे। टीम ने डेटाबेस खंगालकर आरोपी और उसके परिवार से जुड़ी जानकारियां जुटाईं। जांच के दौरान आरोपी के भाई गणेश गिल का सुराग मिला।
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गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
आरपीएफ ने सरसेहड़ी में अपना मुखबिर तंत्र सक्रिय किया। सटीक सूचना और घेराबंदी के आधार पर आरपीएफ टीम ने 20 सितंबर की शाम सरसेहड़ी गांव में दबिश देकर आरोपी को पकड़ा। तरुण गिल को 21 सितंबर को ड्यूटी मजिस्ट्रेट डॉ. इमरान हसन की अदालत में पेश किया गया। न्यायाधीश ने उसे 5 अक्तूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
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अंबाला। कैंट रेलवे स्टेशन की आरपीएफ पोस्ट टीम ने करीब आठ वर्ष से फरार चल रहे उद्घोषित अपराधी तरुण गिल को गिरफ्तार किया है। आरोपी 2017 में रेलवे अधिनियम की धारा 174 के तहत दर्ज एक पुराने मामले में वांछित था। उसने कैंट और सिटी के बीच सिग्नल केबल काटकर ट्रेनों का संचालन बाधित किया था।
गिरफ्तारी से लगातार बचने के कारण वरिष्ठ मंडल रेलवे मजिस्ट्रेट, अंबाला की अदालत ने 7 अगस्त 2018 को उसे उद्घोषित अपराधी घोषित किया था। आरपीएफ ने अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्थानीय मुखबिर तंत्र की मदद से उसे काबू किया। 20 सितंबर को प्रभारी रविंद्र सिंह के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम में सहायक उप निरीक्षक राजेश कुमार, सिपाही विजय सिंह, नवीन और सचिन शामिल थे। टीम ने डेटाबेस खंगालकर आरोपी और उसके परिवार से जुड़ी जानकारियां जुटाईं। जांच के दौरान आरोपी के भाई गणेश गिल का सुराग मिला।
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गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
आरपीएफ ने सरसेहड़ी में अपना मुखबिर तंत्र सक्रिय किया। सटीक सूचना और घेराबंदी के आधार पर आरपीएफ टीम ने 20 सितंबर की शाम सरसेहड़ी गांव में दबिश देकर आरोपी को पकड़ा। तरुण गिल को 21 सितंबर को ड्यूटी मजिस्ट्रेट डॉ. इमरान हसन की अदालत में पेश किया गया। न्यायाधीश ने उसे 5 अक्तूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
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