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निजी बस संचालक प्रवासियों से वसूल रहे मनमाना किराया
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। लग्जरी सुविधा के नाम पर गंतव्य तक जाने के लिए निजी बस संचालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं। यूपी जाने वाले प्रवासियों से 3 हजार और बिहार के लिए 4 हजार रुपये लिए जा रहे हैं। शिकायत मिलने पर आटीए सचिव ने टीम गठित की है। टीम ने दो बसों के चालान कर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
दरअसल कोरोना वायरस का फैलाव रोकने के लिए रेलवे ने ट्रेन संचालन सीमित मात्रा में किया हुआ है। इसका फायदा निजी बस संचालक उठा रहे हैं। वह बिना परमिट के दूसरे प्रदेशों तक सवारी ढो रहे हैं। श्रमिकों से लग्जरी बसों में सफर के नाम पर मनमाना किराए की वसूली की जा रही है। जब से बिहार व यूपी की सरकारों ने अनलॉक का दायरा बढ़ाया है, तब से रोडवेज की बसें इन क्षेत्रों में नहीं जा पा रही है। निजी बस संचालक सभी नियमों को दरकिनार करते बसों का संचालन कर रहे हैं। ऐसे बस संचालक परमिट का उल्लंघन तो कर ही रहे हैं, ओवरलोड सवारियां भरकर प्रवासी मजदूरों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं।
रिहायशी इलाकों को बनाया ठिकाना
निजी बस संचालकों ने आरटीए के डर से अपनी कार्यशैली में बदलाव कर लिया है। अब उन्होंने रिहायशी इलाकों को अपना ठिकाना बना लिया है। अंबाला-दिल्ली नेशनल हाइवे पर हुडा रिहायशी सेक्टर 34 में प्राइवेट बसें खड़ी हो रही हैं। पहले यह बसें छावनी माल रोड की अलग-अलग सड़कों पर खड़ी होती थी और इशारा मिलते ही छावनी बस अड्डे से सवारियां भरकर रफूचक्कर हो जाती थी।
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ऑटो संचालकों की मिलीभगत
निजी बस संचालकों ने प्रवासी श्रमिकों को अपने जाल में फंसाने के लिए कुछ ऑटो संचालकों से मिलीभगत की हुई है। ऐसे ऑटो चालक रेलवे स्टेशन और बस अड्डे के बाहर सक्रिय रहते हैं और प्रवासी श्रमिकों से संपर्क करते हैं। ऑटो चालक ट्रेन व बसें बंद होने का हवाला देते हुए प्राइवेट बसों में सस्ती दर पर सफर कराने का झांसा देते हैं। इसके बाद ऑटो में प्रवासी श्रमिकों को बैठाकर रिहायशी इलाके में खड़ी निजी बसों में बैठाने के लिए ले जाते हैें।
रिहायशी इलाके का माहौल खराब हो रहा है। पड़ाव थाने में भी कई बार सूचना दी गई। पुलिस के मौके पर आने से पहले ही निजी बसें सवारियां भरकर गायब हो जाती हैं। आरटीए को इस पर शिकंजा कसना चाहिए। - कुलबीर सिंह।
पंजाब से बिहार जाने के लिए साथियों सहित छावनी स्टेशन पर आया था। टिकट कंफर्म नहीं थी, इसलिए ट्रेन में नहीं चढ़ पाया। स्टेशन परिसर में खड़े एक ऑटो चालक ने बताया कि प्राइवेट बस से उन्हें घर तक पहुंचा दिया जाएगा। वह स्टेशन से ही उन्हें एक रिहायशी इलाके में ले गया। यहां कुछ निजी बसें खड़ी थी। किराया अधिक था, इसलिए वापस स्टेशन पर आ गया। - मंगत राम।
शिकायत मिली थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर 2 बसों के 50-50 हजार रुपये के चालान काटे हैं। टीम को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों की अवहेलना करने वाली निजी बसों पर लगातार कार्रवाई जारी है। - गौरी मिड्डा, सचिव आरटीए।
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अंबाला। लग्जरी सुविधा के नाम पर गंतव्य तक जाने के लिए निजी बस संचालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं। यूपी जाने वाले प्रवासियों से 3 हजार और बिहार के लिए 4 हजार रुपये लिए जा रहे हैं। शिकायत मिलने पर आटीए सचिव ने टीम गठित की है। टीम ने दो बसों के चालान कर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
दरअसल कोरोना वायरस का फैलाव रोकने के लिए रेलवे ने ट्रेन संचालन सीमित मात्रा में किया हुआ है। इसका फायदा निजी बस संचालक उठा रहे हैं। वह बिना परमिट के दूसरे प्रदेशों तक सवारी ढो रहे हैं। श्रमिकों से लग्जरी बसों में सफर के नाम पर मनमाना किराए की वसूली की जा रही है। जब से बिहार व यूपी की सरकारों ने अनलॉक का दायरा बढ़ाया है, तब से रोडवेज की बसें इन क्षेत्रों में नहीं जा पा रही है। निजी बस संचालक सभी नियमों को दरकिनार करते बसों का संचालन कर रहे हैं। ऐसे बस संचालक परमिट का उल्लंघन तो कर ही रहे हैं, ओवरलोड सवारियां भरकर प्रवासी मजदूरों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं।
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रिहायशी इलाकों को बनाया ठिकाना
निजी बस संचालकों ने आरटीए के डर से अपनी कार्यशैली में बदलाव कर लिया है। अब उन्होंने रिहायशी इलाकों को अपना ठिकाना बना लिया है। अंबाला-दिल्ली नेशनल हाइवे पर हुडा रिहायशी सेक्टर 34 में प्राइवेट बसें खड़ी हो रही हैं। पहले यह बसें छावनी माल रोड की अलग-अलग सड़कों पर खड़ी होती थी और इशारा मिलते ही छावनी बस अड्डे से सवारियां भरकर रफूचक्कर हो जाती थी।
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ऑटो संचालकों की मिलीभगत
निजी बस संचालकों ने प्रवासी श्रमिकों को अपने जाल में फंसाने के लिए कुछ ऑटो संचालकों से मिलीभगत की हुई है। ऐसे ऑटो चालक रेलवे स्टेशन और बस अड्डे के बाहर सक्रिय रहते हैं और प्रवासी श्रमिकों से संपर्क करते हैं। ऑटो चालक ट्रेन व बसें बंद होने का हवाला देते हुए प्राइवेट बसों में सस्ती दर पर सफर कराने का झांसा देते हैं। इसके बाद ऑटो में प्रवासी श्रमिकों को बैठाकर रिहायशी इलाके में खड़ी निजी बसों में बैठाने के लिए ले जाते हैें।
रिहायशी इलाके का माहौल खराब हो रहा है। पड़ाव थाने में भी कई बार सूचना दी गई। पुलिस के मौके पर आने से पहले ही निजी बसें सवारियां भरकर गायब हो जाती हैं। आरटीए को इस पर शिकंजा कसना चाहिए। - कुलबीर सिंह।
पंजाब से बिहार जाने के लिए साथियों सहित छावनी स्टेशन पर आया था। टिकट कंफर्म नहीं थी, इसलिए ट्रेन में नहीं चढ़ पाया। स्टेशन परिसर में खड़े एक ऑटो चालक ने बताया कि प्राइवेट बस से उन्हें घर तक पहुंचा दिया जाएगा। वह स्टेशन से ही उन्हें एक रिहायशी इलाके में ले गया। यहां कुछ निजी बसें खड़ी थी। किराया अधिक था, इसलिए वापस स्टेशन पर आ गया। - मंगत राम।
शिकायत मिली थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर 2 बसों के 50-50 हजार रुपये के चालान काटे हैं। टीम को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों की अवहेलना करने वाली निजी बसों पर लगातार कार्रवाई जारी है। - गौरी मिड्डा, सचिव आरटीए।