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प्राइमरी में साइंस बेहाल, हाई स्कूल भी तरसे
अमर उजाला अंबाला
Updated Thu, 27 Feb 2014 11:59 PM IST
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अंबाला। साइंस के प्रति विद्यार्थियों में रुचि जगाने में शिक्षा विभाग पिछड़ता जा रहा है। सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में साइंस लैब दी हैं, लेकिन हाई स्कूल स्तर पर सिर्फ साइंस रूम ही हैं। लेकिन यदि प्राइमरी स्तर की बात करें तो साइंस को लेकर सिर्फ किताबी ज्ञान ही है, जबकि प्रैक्टिकल के नाम पर कुछ नहीं है। इसके विपरीत यदि निजी स्कूलों की बात करें, तो इनमें प्राइमरी स्तर पर ही साइंस के फंडे क्लीयर करने के लिए प्रैक्टिकल का सहारा लिया जा रहा है।
सरकारी स्कूलों में साइंस विषय को लेकर विद्यार्थियों में शिक्षा विभाग रुचि पैदा नहीं कर पाया है। यही कारण है कि इन स्कूलों के विद्यार्थी साइंस को लेकर उत्सुक दिखाई नहीं देते। इसका कारण यही है कि साइंस लैब में जहां सामान अधूरा है, वहीं हाई स्कूल में उपलब्ध साइंस रूम में सामान नहीं है। यहां सिर्फ चार्ट के सहारे ही प्रैक्टिकल करवाया जाता है, जबकि वह प्रैक्टिकल नहीं होते, जिनमें रासायनिक क्रिया के जरिये गैस बनानी हो। लेकिन सूत्रों का कहना है कि छोटे प्रैक्टिकल करवाने में भी मुश्किल होती है, जबकि विभाग दावा करता है कि सब कुछ उपलब्ध है।
दूसरी ओर प्राइमरी स्तर की बात करें, तो इन स्कूलों में तो साइंस के प्रति रुचि पैदा करने के लिए प्रैक्टिकल का सहारा ही नहीं लिया जाता है। काफी कुछ ऐसा है, जिनमें साइंस को हल्के प्रैक्टिकल, जिनसे कोई नुकसान न हो, से कराया जा सकता है, लेकिन इस में भी कुछ नहीं किया जाता। साइंस को लेकर सिर्फ कागजी ज्ञान ही विद्यार्थियों में बांटा जा रहा है, जिसके चलते प्राइमरी के विद्यार्थियों में साइंस के प्रति कोई खास रुचि पैदा नहीं होती। हालांकि साइंस प्रतियोगिताओं में राजकीय स्कूलों के विद्यार्थियों को पुरस्कार भी मिला है, जो एक अपवाद है। शिक्षा विभाग खुद मानता है कि पैट्रन ही ऐसा है कि शुरुआती स्तर से ही प्रैक्टिकल नहीं करवाये जाते, जबकि निजी स्कूल तो अपने स्तर पर ही निर्णय लेते हैं।
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ऐसा नहीं है कि सरकारी स्कूलों में साइंस के प्रति विद्यार्थियों में रुचि नहीं है। कोशिश की जाती है कि विद्यार्थी साइंस के प्रति रुचि दिखाएं। साइंस लैब और साइंस रूम दिए हैं, जिनमें प्रैक्टिकल होते हैं। हां, प्राइमरी स्तर पर प्रैक्टिकल का सहारा नहीं लिया जाता है। फिर भी शिक्षा विभाग का प्रयास है कि विद्यार्थियों में साइंस के प्रति रुचि पैदा हो।
सुमन मुंजाल, डिप्टी डीईओ अंबाला
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सरकारी स्कूलों में साइंस विषय को लेकर विद्यार्थियों में शिक्षा विभाग रुचि पैदा नहीं कर पाया है। यही कारण है कि इन स्कूलों के विद्यार्थी साइंस को लेकर उत्सुक दिखाई नहीं देते। इसका कारण यही है कि साइंस लैब में जहां सामान अधूरा है, वहीं हाई स्कूल में उपलब्ध साइंस रूम में सामान नहीं है। यहां सिर्फ चार्ट के सहारे ही प्रैक्टिकल करवाया जाता है, जबकि वह प्रैक्टिकल नहीं होते, जिनमें रासायनिक क्रिया के जरिये गैस बनानी हो। लेकिन सूत्रों का कहना है कि छोटे प्रैक्टिकल करवाने में भी मुश्किल होती है, जबकि विभाग दावा करता है कि सब कुछ उपलब्ध है।
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दूसरी ओर प्राइमरी स्तर की बात करें, तो इन स्कूलों में तो साइंस के प्रति रुचि पैदा करने के लिए प्रैक्टिकल का सहारा ही नहीं लिया जाता है। काफी कुछ ऐसा है, जिनमें साइंस को हल्के प्रैक्टिकल, जिनसे कोई नुकसान न हो, से कराया जा सकता है, लेकिन इस में भी कुछ नहीं किया जाता। साइंस को लेकर सिर्फ कागजी ज्ञान ही विद्यार्थियों में बांटा जा रहा है, जिसके चलते प्राइमरी के विद्यार्थियों में साइंस के प्रति कोई खास रुचि पैदा नहीं होती। हालांकि साइंस प्रतियोगिताओं में राजकीय स्कूलों के विद्यार्थियों को पुरस्कार भी मिला है, जो एक अपवाद है। शिक्षा विभाग खुद मानता है कि पैट्रन ही ऐसा है कि शुरुआती स्तर से ही प्रैक्टिकल नहीं करवाये जाते, जबकि निजी स्कूल तो अपने स्तर पर ही निर्णय लेते हैं।
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ऐसा नहीं है कि सरकारी स्कूलों में साइंस के प्रति विद्यार्थियों में रुचि नहीं है। कोशिश की जाती है कि विद्यार्थी साइंस के प्रति रुचि दिखाएं। साइंस लैब और साइंस रूम दिए हैं, जिनमें प्रैक्टिकल होते हैं। हां, प्राइमरी स्तर पर प्रैक्टिकल का सहारा नहीं लिया जाता है। फिर भी शिक्षा विभाग का प्रयास है कि विद्यार्थियों में साइंस के प्रति रुचि पैदा हो।
सुमन मुंजाल, डिप्टी डीईओ अंबाला