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Ambala News: गिरे तूड़ी के दाम, व्यापारी और किसान निराश
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अंबाला सिटी। तूड़ी के गिरते दाम व्यापारियों और किसानों को निराशा दे रहे हैं। अंबाला वन के अंतर्गत आने वाले गांवों में यह देखने को मिल रहा है कि वर्तमान समय में गेहूं के अवशेषों की तूड़ी बनाने वाले के लिए खेतों में रिपर चलते नजर आ आने चाहिए थे। लेकिन तूड़ी के गिरते दाम के कारण इस बार खेतों में अवशेष खड़े नजर आ रहे हैं।
किसानों की मानें तो तूड़ी को वह कूपों में स्टोर कर लेते थे। ज्यादा होने पर चालू सीजन में ही उसे चारा मंडी में बेच देते थे। लेकिन इस बार तूड़ी का दाम कम होने के कारण किसान कूपों को भी तैयार नहीं कर रहे। कुछ किसानों के पास तो पिछले साल के कूप ही खड़े हैं।
किसान केहर सिंह, लाभ सिंह और अभिषेक ने बताया कि उन्होंने 30 से 50 हजार की लागत से लेबर से कूप बंधवाए थे। लेकिन रेट कम होने के कारण वह रिपर की लागत भी पूरी नहीं कर सके। मनजीत सिंह ने बताया कि एक ट्राली तूडी बनाने के लिए रिपर वाला 2200 रुपये लेता है। इसके जिसमें करीब 6 क्विंटल भूसा आ पाता है। इसके अलावा मंडी में तूड़ी गिराने के लिए लेबर व डीजल का खर्च अतिरिक्त है। ऐसे में किसान जाए तो कहा जाए। मंडी में तूड़ी का 300 से 350 तक का रेट चल रहा है ऐसे में रिपर और लेबर का खर्चा भी पूरा नहीं होता।
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किसानों की मानें तो तूड़ी को वह कूपों में स्टोर कर लेते थे। ज्यादा होने पर चालू सीजन में ही उसे चारा मंडी में बेच देते थे। लेकिन इस बार तूड़ी का दाम कम होने के कारण किसान कूपों को भी तैयार नहीं कर रहे। कुछ किसानों के पास तो पिछले साल के कूप ही खड़े हैं।
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किसान केहर सिंह, लाभ सिंह और अभिषेक ने बताया कि उन्होंने 30 से 50 हजार की लागत से लेबर से कूप बंधवाए थे। लेकिन रेट कम होने के कारण वह रिपर की लागत भी पूरी नहीं कर सके। मनजीत सिंह ने बताया कि एक ट्राली तूडी बनाने के लिए रिपर वाला 2200 रुपये लेता है। इसके जिसमें करीब 6 क्विंटल भूसा आ पाता है। इसके अलावा मंडी में तूड़ी गिराने के लिए लेबर व डीजल का खर्च अतिरिक्त है। ऐसे में किसान जाए तो कहा जाए। मंडी में तूड़ी का 300 से 350 तक का रेट चल रहा है ऐसे में रिपर और लेबर का खर्चा भी पूरा नहीं होता।
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