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दिल्ली कूच की तैयारी : जेसीबी और पोकलेन मशीन बनेगी ढाल
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अंबाला-राजपुरा मार्ग स्थित शंभू बैरियर के बीच चल रहे किसान आंदोलन के दौरान सड़क के बीच बैठे किस
अंबाला सिटी। 21 फरवरी को दिल्ली कूच के लिए किसानों ने शंभू सीमा पर तैयारी कर ली हैं। मंगलवार को पंजाब की ओर से युवा किसान जेसीबी और पोकलेन मशीन लेकर पहुंच गए हैं। ट्रैक्टर मार्च के बीच में इन मशीनों को लाया गया, जिससे कोई रास्ते में रोक न सके।
किसान नेताओं ने सरकार को बुधवार 11 बजे तक का समय दिया है, अगर तब तक बात नहीं बनी तो किसान कूच करेंगे। युवाओं में दिल्ली कूच के लिए उत्साह नजर आ रहा है। एक तरफ जहां किसान शंभू सीमा पर बैरिकेडिंग तोड़ने की तैयारी कर रहे हैं वहीं, अन्य किसान शांतिपूर्ण तरीके से किसान नेताओं को सुनते नजर आए। इतना ही नहीं किसान ऐसी मशीनें लेकर पहुंचे हैं, जो बख्तरबंद हैं। इन पर गोलियों और आंसू गैस के गोलों का कोई असर नहीं होगा। इन्हें पंक्चर भी नहीं किया जा सकता, क्योंकि पोकलेन चेन से चलती है, जिसपर से टैंक चलते हैं।
हरियाणा की ओर से भी किसानों को एकत्रित होने की अपील की गई है। इसके लिए किसान नेताओं ने वीडियो भी जारी किया है। किसानों की तैयारियों के लिए पुलिस के पास इनपुट पहुंच गया है। किसानों की तैयारियों को फेल करने के लिए रात्रि को पुलिस अधिकारियों की बैठक बुलाई है।
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जत्थेबंदियों ने लगाई युवाओं की जिम्मेदारी
जत्थेबंदियों ने दिल्ली कूच की स्थिति बनने पर पहले ही तैयारी की है। 50 युवाओं को मोर्चा संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। जो बेरिकेडिंग तोड़ने की जिम्मेदारी संभालेंगे। सभी को अपनी-अपनी ड्यूटी दी गई है। इसमें कोई ट्रैक्टर चलाएगा तो कोई बैरिकेडिंग तोड़ने का काम करेगा। कोई रेत की बोरियों की ट्रालियों को आगे लेकर आएगा। इसी प्रकार आंसू गैस के गोलों का प्रभाव कम करने को युवाओं के हाथों में गीली बोरियां भी होंगे।
खुला है नदी का रास्ता
अभी तक जिस प्रकार की तैयारियां नजर आ रही हैं उससे संभावना बन रही है कि किसान घग्गर के पुल पर बने हरियाणा पुलिस के बैरिकेडिंग को पोकलेन से तोड़ने के बाद बोरियों को बैरिकेडिंग के ऊपर डालकर फिर आगे अंबाला की तरफ बढ़ सकते हैं। हालांकि किसान नेताओं का कहना है कि घग्गर नदी का रास्ता भी खुला है।
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किसान नेताओं ने सरकार को बुधवार 11 बजे तक का समय दिया है, अगर तब तक बात नहीं बनी तो किसान कूच करेंगे। युवाओं में दिल्ली कूच के लिए उत्साह नजर आ रहा है। एक तरफ जहां किसान शंभू सीमा पर बैरिकेडिंग तोड़ने की तैयारी कर रहे हैं वहीं, अन्य किसान शांतिपूर्ण तरीके से किसान नेताओं को सुनते नजर आए। इतना ही नहीं किसान ऐसी मशीनें लेकर पहुंचे हैं, जो बख्तरबंद हैं। इन पर गोलियों और आंसू गैस के गोलों का कोई असर नहीं होगा। इन्हें पंक्चर भी नहीं किया जा सकता, क्योंकि पोकलेन चेन से चलती है, जिसपर से टैंक चलते हैं।
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हरियाणा की ओर से भी किसानों को एकत्रित होने की अपील की गई है। इसके लिए किसान नेताओं ने वीडियो भी जारी किया है। किसानों की तैयारियों के लिए पुलिस के पास इनपुट पहुंच गया है। किसानों की तैयारियों को फेल करने के लिए रात्रि को पुलिस अधिकारियों की बैठक बुलाई है।
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जत्थेबंदियों ने लगाई युवाओं की जिम्मेदारी
जत्थेबंदियों ने दिल्ली कूच की स्थिति बनने पर पहले ही तैयारी की है। 50 युवाओं को मोर्चा संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। जो बेरिकेडिंग तोड़ने की जिम्मेदारी संभालेंगे। सभी को अपनी-अपनी ड्यूटी दी गई है। इसमें कोई ट्रैक्टर चलाएगा तो कोई बैरिकेडिंग तोड़ने का काम करेगा। कोई रेत की बोरियों की ट्रालियों को आगे लेकर आएगा। इसी प्रकार आंसू गैस के गोलों का प्रभाव कम करने को युवाओं के हाथों में गीली बोरियां भी होंगे।
खुला है नदी का रास्ता
अभी तक जिस प्रकार की तैयारियां नजर आ रही हैं उससे संभावना बन रही है कि किसान घग्गर के पुल पर बने हरियाणा पुलिस के बैरिकेडिंग को पोकलेन से तोड़ने के बाद बोरियों को बैरिकेडिंग के ऊपर डालकर फिर आगे अंबाला की तरफ बढ़ सकते हैं। हालांकि किसान नेताओं का कहना है कि घग्गर नदी का रास्ता भी खुला है।

अंबाला-राजपुरा मार्ग स्थित शंभू बैरियर के बीच चल रहे किसान आंदोलन के दौरान सड़क के बीच बैठे किस

अंबाला-राजपुरा मार्ग स्थित शंभू बैरियर के बीच चल रहे किसान आंदोलन के दौरान सड़क के बीच बैठे किस