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श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व आज : लखनौर साहिब में गुरु ने खेली थी हॉकी
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शहर के गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब में माता गुजरी कौर जी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का रखा पलं
सतनाम सिंह
अंबाला सिटी। अंबाला शहर से दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का गहरा नाता रहा है। अंबाला में गुरु साहिब से जुड़े कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं। लखनौर साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का ननिहाल है। यहां गुरु गोबिंद सिंह जी ने हॉकी (तब इस खेल को खुदो खुंडी कहते थे) खेली और कई चमत्कार भी दिखाए।
इनसे से जुड़ी ऐतिहासिक निशानियां आज भी अंबाला शहर के गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब व आसपास के गुरुद्वारों में मौजूद है। गुरुद्वारा श्री बादशाही बाग, गुरुद्वारा श्री सत्संग साहिब, गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब, गुरुद्वारा श्री गेंदसर साहिब भानोखेड़ी गांव से भी गुरु गोबिंद सिंह जी का इतिहास जुड़ा है। इसी तरह शहर के एसए जैन कॉलेज के पास गुरुद्वारा श्री गोबिंदपुरा साहिब वह स्थान है, जहां गुरु गोबिंद सिंह के आदेश पर चिड़ियों ने शहर के नबाव अमीरदीन के बाज को मार गिराया था। वहीं, गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब में बुधवार को श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज जी की जयंती पर समागम होगा। जिसमें बुधवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल पहुंचेंगे।
लखनौर साहिब अपने ननिहाल आए थे
शहर मानव चौक से करीब 12 किलोमीटर दूर ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का ननिहाल है। यहां श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता गुजरी से जुड़ी कई निशानियां सहेजकर रखी गई हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी लखनौर साहिब अपने ननिहाल में बचपन में हॉकी खेलते थे। जब वह छह वर्ष के थे, तब वह पटना साहिब से लखनौर साहिब में माता गुजरी के साथ अपने मामा किरपाल चंद व मेहर चंद के पास आए थे। गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब के मैनेजर हरभजन सिंह और हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति सदस्य तरविंद्रपाल सिंह टीपी ने बताया कि करीब 1672 में जब माता गुजरी लखनौर साहिब (अपने मायके घर) में आई थी, तब गांव के लोगों ने माता गुजरी को बताया था कि गांव का पानी खारा है। उस दौरान माता गुजरी ने अपने पिछले जन्म का कुंआ प्रकट किया था। उन्होंने गांव के लोगों को जहां खुदाई करने के लिए कहा था, वहीं से कुआं निकला था। यह ऐतिहासिक कुंआ आज भी चलता है। कुंए का मीठा जल गुरुद्वारा साहिब में पहुंचने वाली संगत अपने साथ भी लेकर जाती है। गुरुद्वारा साहिब में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी व माता गुजरी का पलंग भी रखा गया है। गुरु गोबिंद सिंह का पलंग ऐसा है, जोकि फोल्ड हो जाता है। गुरु गोबिंद सिंह जी अपनी यात्रा के दौरान पलंग को फोल्ड कर लेकर जाते थे। इसके अलावा गुरुद्वारा में गुरु गोबिंद सिंह जी के दो तीर, एक कटार, एक जमदाड़, एक ढाल, माता गुजरी के दो परात और हुकमनामा सहेजकर रखा हुआ है। यहां माता गुजरी जी के पलंग के पांवे भी रखे हुए हैं। गुरुद्वारा साहिब में एक ऐतिहासिक पेंटिंग भी लगी हुई है। इस पेंटिंग में गुरु गोबिंद सिंह अपने बचपन में हॉकी खेलते हुए नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही जब श्री गुरुगोबिंद सिंह जी अपने ननिहाल लखनौर साहिब में आए थे, उस दौरान अंबाला शहर के साथ लगते गुरुद्वारा श्री बादशाही बाग, गुरुद्वारा श्री गोबिंदपुरा साहिब, गुरुद्वारा श्री सत्संग साहिब और गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब में भी चरण पाए थे। वहीं, गुरुद्वारा श्री गेंदसर साहिब भानोखेड़ी गांव में भी बचपन में गुरु गोबिंद सिंह जी अपने साथी बच्चों के साथ हॉकी खेल खेला। यहां गुरु महाराज ने कोहड़ियों का कोहड़ दूर किया। ऐसी मान्यता है कि यहां बने पवित्र सरोवर में स्नान करने से सभी दुख दूर हो जाते हैं।
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अंबाला सिटी। अंबाला शहर से दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का गहरा नाता रहा है। अंबाला में गुरु साहिब से जुड़े कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं। लखनौर साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का ननिहाल है। यहां गुरु गोबिंद सिंह जी ने हॉकी (तब इस खेल को खुदो खुंडी कहते थे) खेली और कई चमत्कार भी दिखाए।
इनसे से जुड़ी ऐतिहासिक निशानियां आज भी अंबाला शहर के गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब व आसपास के गुरुद्वारों में मौजूद है। गुरुद्वारा श्री बादशाही बाग, गुरुद्वारा श्री सत्संग साहिब, गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब, गुरुद्वारा श्री गेंदसर साहिब भानोखेड़ी गांव से भी गुरु गोबिंद सिंह जी का इतिहास जुड़ा है। इसी तरह शहर के एसए जैन कॉलेज के पास गुरुद्वारा श्री गोबिंदपुरा साहिब वह स्थान है, जहां गुरु गोबिंद सिंह के आदेश पर चिड़ियों ने शहर के नबाव अमीरदीन के बाज को मार गिराया था। वहीं, गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब में बुधवार को श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज जी की जयंती पर समागम होगा। जिसमें बुधवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल पहुंचेंगे।
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लखनौर साहिब अपने ननिहाल आए थे
शहर मानव चौक से करीब 12 किलोमीटर दूर ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का ननिहाल है। यहां श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता गुजरी से जुड़ी कई निशानियां सहेजकर रखी गई हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी लखनौर साहिब अपने ननिहाल में बचपन में हॉकी खेलते थे। जब वह छह वर्ष के थे, तब वह पटना साहिब से लखनौर साहिब में माता गुजरी के साथ अपने मामा किरपाल चंद व मेहर चंद के पास आए थे। गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब के मैनेजर हरभजन सिंह और हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति सदस्य तरविंद्रपाल सिंह टीपी ने बताया कि करीब 1672 में जब माता गुजरी लखनौर साहिब (अपने मायके घर) में आई थी, तब गांव के लोगों ने माता गुजरी को बताया था कि गांव का पानी खारा है। उस दौरान माता गुजरी ने अपने पिछले जन्म का कुंआ प्रकट किया था। उन्होंने गांव के लोगों को जहां खुदाई करने के लिए कहा था, वहीं से कुआं निकला था। यह ऐतिहासिक कुंआ आज भी चलता है। कुंए का मीठा जल गुरुद्वारा साहिब में पहुंचने वाली संगत अपने साथ भी लेकर जाती है। गुरुद्वारा साहिब में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी व माता गुजरी का पलंग भी रखा गया है। गुरु गोबिंद सिंह का पलंग ऐसा है, जोकि फोल्ड हो जाता है। गुरु गोबिंद सिंह जी अपनी यात्रा के दौरान पलंग को फोल्ड कर लेकर जाते थे। इसके अलावा गुरुद्वारा में गुरु गोबिंद सिंह जी के दो तीर, एक कटार, एक जमदाड़, एक ढाल, माता गुजरी के दो परात और हुकमनामा सहेजकर रखा हुआ है। यहां माता गुजरी जी के पलंग के पांवे भी रखे हुए हैं। गुरुद्वारा साहिब में एक ऐतिहासिक पेंटिंग भी लगी हुई है। इस पेंटिंग में गुरु गोबिंद सिंह अपने बचपन में हॉकी खेलते हुए नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही जब श्री गुरुगोबिंद सिंह जी अपने ननिहाल लखनौर साहिब में आए थे, उस दौरान अंबाला शहर के साथ लगते गुरुद्वारा श्री बादशाही बाग, गुरुद्वारा श्री गोबिंदपुरा साहिब, गुरुद्वारा श्री सत्संग साहिब और गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब में भी चरण पाए थे। वहीं, गुरुद्वारा श्री गेंदसर साहिब भानोखेड़ी गांव में भी बचपन में गुरु गोबिंद सिंह जी अपने साथी बच्चों के साथ हॉकी खेल खेला। यहां गुरु महाराज ने कोहड़ियों का कोहड़ दूर किया। ऐसी मान्यता है कि यहां बने पवित्र सरोवर में स्नान करने से सभी दुख दूर हो जाते हैं।

शहर के गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब में माता गुजरी कौर जी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का रखा पलं

शहर के गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब में माता गुजरी कौर जी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का रखा पलं

शहर के गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब में माता गुजरी कौर जी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का रखा पलं
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