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Ambala News: तालाब की जमीन पर कब्जा, जवाब देने के लिए मिला तीन सप्ताह का समय
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-मामले पर एनजीटी दिल्ली में हुई सुनवाई, अब 22 अप्रैल का दिन तय
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। सेक्टर-7 में तालाब की 32 एकड़ 69 मरले जमीन पर प्राइवेट लोगों की ओर से कब्जा कर मिट्टी भरने के मामले में एक बार फिर सरकार ने जवाब देने का समय मांग लिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह की मोहलत दी है। मामले की अगली सुनवाई अब 22 अप्रैल को होगी।
दिल्ली स्थित एनजीटी की पीठ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई थी। मामले में एचएसवीपी की तरफ से जवाब दाखिल कर दिया गया था तो अन्य पक्षकारों ने जवाब देने के लिए फिर से समय की मांग कर दी। सभी पक्षों के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद कोर्ट ने तीन सप्ताह की मोहलत दे दी है।
पिछली सुनवाई में भी मांगा था समय
मामले की पिछली सुनवाई 21 अक्तूबर को हुई थी, जिसमें केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की तरफ से जवाब दाखिल कर दिया गया था। वहीं अन्य विभागों की तरफ से एनजीटी को जवाब देने के लिए उनके अधिवक्ताओं ने चार सप्ताह का समय मांगा जिसे एनजीटी ने स्वीकार कर लिया था और 21 जनवरी तक का समय दिया गया था।
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9 विभागों को देना था जवाब
सेक्टर-7 में तालाब से जुड़े मामले में 15 जुलाई को याचिकाकर्ता अंबाला सिटी निवासी अखिलेश की ओर से एनजीटी में याचिका दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने शिकायत दी थी कि सुबूत होने के बावजूद जोहड़ की जमीन को मिट्टी से भरा जा रहा है। इस पर विभागीय अधिकारियों को शिकायत की गई मगर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले की एनजीटी में 21 जुलाई को न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. ए सेंथिल वेल की पीठ ने मामले में सुनवाई की, जिसमें पीठ ने मुख्य सचिव के मार्फत हरियाणा सरकार समेत 9 विभागों को नोटिस जारी किया था। नोटिस के माध्यम से एनजीटी ने हलफनामा मांगा था, जिससे कि विभाग से पक्ष लिया जा सके, इसमें मुख्य सचिव के अलावा पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, तालाब प्रबंधन प्राधिकरण, उपायुक्त, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, डीटीपी व नगर निगम शामिल थे।
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। सेक्टर-7 में तालाब की 32 एकड़ 69 मरले जमीन पर प्राइवेट लोगों की ओर से कब्जा कर मिट्टी भरने के मामले में एक बार फिर सरकार ने जवाब देने का समय मांग लिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह की मोहलत दी है। मामले की अगली सुनवाई अब 22 अप्रैल को होगी।
दिल्ली स्थित एनजीटी की पीठ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई थी। मामले में एचएसवीपी की तरफ से जवाब दाखिल कर दिया गया था तो अन्य पक्षकारों ने जवाब देने के लिए फिर से समय की मांग कर दी। सभी पक्षों के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद कोर्ट ने तीन सप्ताह की मोहलत दे दी है।
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पिछली सुनवाई में भी मांगा था समय
मामले की पिछली सुनवाई 21 अक्तूबर को हुई थी, जिसमें केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की तरफ से जवाब दाखिल कर दिया गया था। वहीं अन्य विभागों की तरफ से एनजीटी को जवाब देने के लिए उनके अधिवक्ताओं ने चार सप्ताह का समय मांगा जिसे एनजीटी ने स्वीकार कर लिया था और 21 जनवरी तक का समय दिया गया था।
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9 विभागों को देना था जवाब
सेक्टर-7 में तालाब से जुड़े मामले में 15 जुलाई को याचिकाकर्ता अंबाला सिटी निवासी अखिलेश की ओर से एनजीटी में याचिका दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने शिकायत दी थी कि सुबूत होने के बावजूद जोहड़ की जमीन को मिट्टी से भरा जा रहा है। इस पर विभागीय अधिकारियों को शिकायत की गई मगर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले की एनजीटी में 21 जुलाई को न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. ए सेंथिल वेल की पीठ ने मामले में सुनवाई की, जिसमें पीठ ने मुख्य सचिव के मार्फत हरियाणा सरकार समेत 9 विभागों को नोटिस जारी किया था। नोटिस के माध्यम से एनजीटी ने हलफनामा मांगा था, जिससे कि विभाग से पक्ष लिया जा सके, इसमें मुख्य सचिव के अलावा पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, तालाब प्रबंधन प्राधिकरण, उपायुक्त, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, डीटीपी व नगर निगम शामिल थे।