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सड़कों पर सुखा रहे धान, आवाजाही बंद
अंबाला
Updated Mon, 30 Sep 2013 12:05 AM IST
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धान की सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू होने के आसार है। लेकिन मंडियों में धान की आवक तेज हो गई है।
हाल ही हुई बारिश के कारण भीगे धान को किसान सड़कों पर सुखा रहे हैं। इस कारण लोगों को आवाजाही में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इस सीजन में भी जिले की तमाम मंडियों में धान बेचना राम भरोसे ही रहेगा। बारिश हुई तो किसानों का धान भीगने से बचेगा नहीं। इसका एक ट्रेलर मंडियों में बीते दिनों ही दिख चुका है। मंडियों में पहले से ही पहुंच चुका धान विगत दिनों हुई बारिश में ही भीग गया है।
किसान इस धान को सड़कों पर बिछाकर सुखाने को मजबूर है।
इउल्लेखनीय है कि मंडियों में लाखों क्विंटल धान पहुंच चुका है, मगर खरीद शुरू नहीं हुई है। इस धान में अधिकतर साठी धान शामिल है।
जो धान तैयार है, बरसात के डर से किसान उसकी कटाई कर फटाफट मंडियों तक ले आए हैं, मगर उन्हे क्या पता था कि फसल कटने के बाद भी उन्हे मंडियों में प्रशासनिक लापरवाही की वजह उनकी फसल बारिश की भेंट चढै़ जाएगा।
सभी मंडियों में शेड नहीं
जिले की चौदह मंडियों व खरीद सेंटरों में से अधिकतर पर शेड सुविधा नहीं है। जहां शेड है, वहां पुराना अनाज ही उठान के इंतजार में पड़ा रहता है या फिर नया अनाज रख दिया जाता है। उन शेडाें के भरने के बाद मंडियों में अनाज खुले आसमान में रामभरोसे रहता है।
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मार्केट कमेटी के पास पर्याप्त तिरपालें भी नहीं है, जो तिरपाले हैं, फटी पड़ी है। इसलिए अचानक बरसात होने पर बोरियों को ढांपने के लिए तिरपालें ढूंढी जाती है और न मिले तो बरसात में राम भरोसे अनाज को छोड़ दिया जाता है।
खेतों में बिछ गया धान
विगत दिनों बारिश की वजह से धान की फसल खेतों में ही बिछ गई है। किसान करनैल सिंह, कुलदीप सिंह, सोहन सिंह, दर्शन सिंह व पालाराम के अनुसार बारिश और पीछे आए तूफान की वजह से धान खेतों में गिरी पड़ी है। उनके अनुसार बारिश की वजह से ये धान गिली है, कंबाइन चल नहीं सकती और लेबर मिल नहीं रही है। ऐसी धान को काटने की लेबर भी बहुत ज्यादा ली जाएगी।
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हाल ही हुई बारिश के कारण भीगे धान को किसान सड़कों पर सुखा रहे हैं। इस कारण लोगों को आवाजाही में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इस सीजन में भी जिले की तमाम मंडियों में धान बेचना राम भरोसे ही रहेगा। बारिश हुई तो किसानों का धान भीगने से बचेगा नहीं। इसका एक ट्रेलर मंडियों में बीते दिनों ही दिख चुका है। मंडियों में पहले से ही पहुंच चुका धान विगत दिनों हुई बारिश में ही भीग गया है।
किसान इस धान को सड़कों पर बिछाकर सुखाने को मजबूर है।
इउल्लेखनीय है कि मंडियों में लाखों क्विंटल धान पहुंच चुका है, मगर खरीद शुरू नहीं हुई है। इस धान में अधिकतर साठी धान शामिल है।
जो धान तैयार है, बरसात के डर से किसान उसकी कटाई कर फटाफट मंडियों तक ले आए हैं, मगर उन्हे क्या पता था कि फसल कटने के बाद भी उन्हे मंडियों में प्रशासनिक लापरवाही की वजह उनकी फसल बारिश की भेंट चढै़ जाएगा।
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सभी मंडियों में शेड नहीं
जिले की चौदह मंडियों व खरीद सेंटरों में से अधिकतर पर शेड सुविधा नहीं है। जहां शेड है, वहां पुराना अनाज ही उठान के इंतजार में पड़ा रहता है या फिर नया अनाज रख दिया जाता है। उन शेडाें के भरने के बाद मंडियों में अनाज खुले आसमान में रामभरोसे रहता है।
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मार्केट कमेटी के पास पर्याप्त तिरपालें भी नहीं है, जो तिरपाले हैं, फटी पड़ी है। इसलिए अचानक बरसात होने पर बोरियों को ढांपने के लिए तिरपालें ढूंढी जाती है और न मिले तो बरसात में राम भरोसे अनाज को छोड़ दिया जाता है।
खेतों में बिछ गया धान
विगत दिनों बारिश की वजह से धान की फसल खेतों में ही बिछ गई है। किसान करनैल सिंह, कुलदीप सिंह, सोहन सिंह, दर्शन सिंह व पालाराम के अनुसार बारिश और पीछे आए तूफान की वजह से धान खेतों में गिरी पड़ी है। उनके अनुसार बारिश की वजह से ये धान गिली है, कंबाइन चल नहीं सकती और लेबर मिल नहीं रही है। ऐसी धान को काटने की लेबर भी बहुत ज्यादा ली जाएगी।