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Ambala News: नगर निगम पर पीसीबी करेगा कार्रवाई, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की तैयारी
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पटवी प्लांट की फोटो। फाइल फोटो
वैभव शर्मा
अंबाला। कचरा निस्तारण केंद्र पटवी प्लांट के लिए नगर निगम की फजीहत होने वाली है। इस प्लांट में अंबाला और पंचकूला जिला का कचरा निस्तारित किया जा रहा है।
इस प्लांट पर ठोस कचरा अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की अनदेखी और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए नगर निगम फंस गया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) नगर निगम प्रशासन और इस प्लांट को संचालित करने वाली कंपनी पूजा कंसुलेशन पर पर्यावरणीय नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति लगाने जा रहा है। पीसीबी के मुख्यालय से स्वीकृति के बाद ही धनराशि को आधिकारिक रूप से बताया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों की मानें तो यह राशि कचरा प्रबंधन में लापरवाही कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के लिए एक सबक होगी। इससे पहले ही काकड़ू के पास खुले स्थान पर कचरा डालने के लिए पीसीबी ने नगर निगम प्रशासन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
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रिमाइंडर के बाद भी नहीं दिया जवाब
दरअसल अक्टूबर 2024 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर पीसीबी की टीम नगर निगम के अधिकारियों के साथ शहजादपुर स्थित पटवी कचरा निस्तारण प्लांट पर निरीक्षण करने गई थी। यहां पर टीम को कई कमियां मिलीं। इसके बाद पीसीबी ने नगर निगम के आयुक्त, उप निगम आयुक्त और पटवी प्लांट को संचालित करने वाली कंपनी पूजा कंसुलेशन को 9 जनवरी 2025 को कारण बताओ नोटिस थमाया था। जिसका संबंधित लोगों को 15 दिनों के भीतर जवाब देना था। मगर चार महीने बीतने के बावजूद जवाब नहीं मिला। इसके बाद अप्रैल में पीसीबी ने पहला रिमाइंडर डाला। इसके बाद भी अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। ऐसे में अब विभाग क्षतिपूर्ति की गणना करने जुट गया है। एक सप्ताह में संबंधित पक्षकारों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगा दी जाएगी।
पीसीबी को मिलीं थीं ये 18 कमियां
निरीक्षण में बिना वैधानिक अनुमति (सीटीई, सीटीओ और पर्यावरणीय स्वीकृति) के संचालन मिला। ऑनलाइन पोर्टल पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत आवश्यक स्वीकृति प्राप्त नहीं की थी। वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया। अपशिष्ट को वैज्ञानिक तरीके से नहीं संभाला गया। रिकॉर्ड / वजन की व्यवस्था नहीं मिली। 45 हजार मीट्रिक टन से अधिक अपशिष्ट बिना प्रक्रिया के पड़ा मिला। कई रिकॉर्ड नहीं मिले। ग्रीन बेल्ट, पौधारोपण की समुचित व्यवस्था नहीं। लैंडफिल स्थल के लिए निर्धारित दूरी और स्थान नियमों का उल्लंघन मिला। जैविक, अजैविक अपशिष्ट का पृथक्करण, प्रक्रिया नहीं की गई। परिसर में बाड़बंदी व गेट की व्यवस्था नहीं। लैंडफिल में एचडीपीई लाइनर आदि की व्यवस्था नहीं। वायु गुणवत्ता की निगरानी नहीं की जा रही। गंध, मक्खी, चूहे आदि की रोकथाम की कोई सुविधा नहीं थी। इसी प्रकार की अन्य कमियां पाई गईं थी।
सैंपल में मिले थे हानिकारक रसायन
सैंपलों की जांच में जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) 100 की जगह 1200 मिलीग्रामी प्रति लीटर, रासायनिक ऑक्सीजन मांग (सीओडी) 4000, कुल घुले ठोस पदार्थ (टीडीएस) 2100 के स्थान पर 13232 मिली, क्लोराइड 600 के स्थान पर 1539, आयरन 3 के स्थान पर 26 व जिंक की मात्रा 5 के स्थान पर 32 से अधिक मिली।
वर्जन
पटवी प्लांट पर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी हो रही है। पूर्व में नोटिस दिया था। कोई जवाब नहीं मिला न ही नोटिस में दी हिदायतों को लागू किया। इस पर क्षतिपूर्ति लगाने के लिए केस मुख्यालय भेजा जा रहा है।
-अजय मलिक, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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अंबाला। कचरा निस्तारण केंद्र पटवी प्लांट के लिए नगर निगम की फजीहत होने वाली है। इस प्लांट में अंबाला और पंचकूला जिला का कचरा निस्तारित किया जा रहा है।
इस प्लांट पर ठोस कचरा अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की अनदेखी और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए नगर निगम फंस गया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) नगर निगम प्रशासन और इस प्लांट को संचालित करने वाली कंपनी पूजा कंसुलेशन पर पर्यावरणीय नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति लगाने जा रहा है। पीसीबी के मुख्यालय से स्वीकृति के बाद ही धनराशि को आधिकारिक रूप से बताया जाएगा।
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विभागीय अधिकारियों की मानें तो यह राशि कचरा प्रबंधन में लापरवाही कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के लिए एक सबक होगी। इससे पहले ही काकड़ू के पास खुले स्थान पर कचरा डालने के लिए पीसीबी ने नगर निगम प्रशासन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
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रिमाइंडर के बाद भी नहीं दिया जवाब
दरअसल अक्टूबर 2024 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर पीसीबी की टीम नगर निगम के अधिकारियों के साथ शहजादपुर स्थित पटवी कचरा निस्तारण प्लांट पर निरीक्षण करने गई थी। यहां पर टीम को कई कमियां मिलीं। इसके बाद पीसीबी ने नगर निगम के आयुक्त, उप निगम आयुक्त और पटवी प्लांट को संचालित करने वाली कंपनी पूजा कंसुलेशन को 9 जनवरी 2025 को कारण बताओ नोटिस थमाया था। जिसका संबंधित लोगों को 15 दिनों के भीतर जवाब देना था। मगर चार महीने बीतने के बावजूद जवाब नहीं मिला। इसके बाद अप्रैल में पीसीबी ने पहला रिमाइंडर डाला। इसके बाद भी अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। ऐसे में अब विभाग क्षतिपूर्ति की गणना करने जुट गया है। एक सप्ताह में संबंधित पक्षकारों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगा दी जाएगी।
पीसीबी को मिलीं थीं ये 18 कमियां
निरीक्षण में बिना वैधानिक अनुमति (सीटीई, सीटीओ और पर्यावरणीय स्वीकृति) के संचालन मिला। ऑनलाइन पोर्टल पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत आवश्यक स्वीकृति प्राप्त नहीं की थी। वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया। अपशिष्ट को वैज्ञानिक तरीके से नहीं संभाला गया। रिकॉर्ड / वजन की व्यवस्था नहीं मिली। 45 हजार मीट्रिक टन से अधिक अपशिष्ट बिना प्रक्रिया के पड़ा मिला। कई रिकॉर्ड नहीं मिले। ग्रीन बेल्ट, पौधारोपण की समुचित व्यवस्था नहीं। लैंडफिल स्थल के लिए निर्धारित दूरी और स्थान नियमों का उल्लंघन मिला। जैविक, अजैविक अपशिष्ट का पृथक्करण, प्रक्रिया नहीं की गई। परिसर में बाड़बंदी व गेट की व्यवस्था नहीं। लैंडफिल में एचडीपीई लाइनर आदि की व्यवस्था नहीं। वायु गुणवत्ता की निगरानी नहीं की जा रही। गंध, मक्खी, चूहे आदि की रोकथाम की कोई सुविधा नहीं थी। इसी प्रकार की अन्य कमियां पाई गईं थी।
सैंपल में मिले थे हानिकारक रसायन
सैंपलों की जांच में जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) 100 की जगह 1200 मिलीग्रामी प्रति लीटर, रासायनिक ऑक्सीजन मांग (सीओडी) 4000, कुल घुले ठोस पदार्थ (टीडीएस) 2100 के स्थान पर 13232 मिली, क्लोराइड 600 के स्थान पर 1539, आयरन 3 के स्थान पर 26 व जिंक की मात्रा 5 के स्थान पर 32 से अधिक मिली।
वर्जन
पटवी प्लांट पर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी हो रही है। पूर्व में नोटिस दिया था। कोई जवाब नहीं मिला न ही नोटिस में दी हिदायतों को लागू किया। इस पर क्षतिपूर्ति लगाने के लिए केस मुख्यालय भेजा जा रहा है।
-अजय मलिक, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड