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Ambala News: मंडियों में 33,173 मीट्रिक टन से ज्यादा पहुंचा धान, आज से उठान की संभावना

Fri, 26 Sep 2025 03:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला Updated Fri, 26 Sep 2025 03:50 AM IST
सार

अंबाला सिटी की मंडियों में धान की आवक जारी है, लेकिन कई किसानों को गेट पास कटाने में परेशानी आ रही है। पराली प्रबंधन यंत्रों की कमी और सरकारी कार्रवाई को लेकर किसानों में नाराजगी है।

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Over 33,173 metric tonnes of paddy has arrived in the mandis, lifting likely from today

विस्तार

संवाद न्यूज एजेंसी
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अंबाला सिटी। जिले की मंडियों में लगातार धान की आवक हो रही है। गुरुवार शाम सात बजे तक जिले की मंडियों में 6030 गेट पास कट चुके थे। शाम तक 33,173 मीट्रिक टन की आवक हुई और 19,089 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई। वहीं, कई किसानों की फसल का सत्यापन न होने से ऑनलाइन गेट पास कटने में दिक्कत आ रही है। इस वजह से किसान मंडी में चक्कर काटने पर मजबूर हैं।
इसी तरह अभी राइस मिलर्स के पंजीकरण नहीं होने से उठान कार्य भी शुरू नहीं हुआ है। राइस मिलर्स एसोसिएशन अंबाला शहर के प्रधान राजेश बंसल ने बताया कि पंजीकरण व एग्रीमेंट होने को लेकर प्रक्रिया चल रही है। शुक्रवार से धान का उठान शुरू हो सकता है। मार्केट कमेटी सचिव दलेल सिंह ने बताया कि मंडी में धान की आवक हो रही है। गेट पास कटने की समस्या का समाधान भी किया जा रहा है।
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किसान बोले, पांच दिन में पराली नहीं किया तो जलाने पर होंगे मजबूर
शहर नई अनाज मंडी में भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरजीत सिंह मोहड़ी के नेतृत्व में किसानों ने बैठक की। इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरजीत सिंह मोहड़ी व जिला प्रधान गुरमीत सिंह माजरी ने कहा कि पराली जलाने पर सरकार की ओर से किसानों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन पर जुर्माना लगाने के साथ ही पोर्टल पर रेड एंट्री की जा रही है। उन्होंने कहा कि गांव में किसानों के पास पराली प्रबंधन के लिए यंत्र नहीं है। बिना सुविधाओं के किसानों पर कार्रवाई करना गलत है। उन्होंने प्रशासन को कहा है कि किसान की फसल कटने के पांच दिन के अंदर सरकार पराली प्रबंधन के यंत्र किसानों को मुहैया करवाए, अगर ऐसा नहीं होता तो किसान पराली को आग लगाने पर मजबूर होंगे, क्योंकि उनके पास और कोई विकल्प नहीं है। किसानों को आलू व सरसों की फसल भी लगानी है। उन्होंने मांग की कि सरकार की ओर से किसानों को 5 हजार रुपये पराली प्रबंधन के लिए दिए जाएं।
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