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Ambala News: टांगरी पुल के पास अतिक्रमण के मामले में बिना समाधान शिकायत बंद करने पर रोष
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अंबाला छावनी में टांगरी नदी के बहाव को रोकने के लिए किनारे पर किया गया निर्माण व डाला गया मलबा।
अंबाला। टांगरी पुल के पास सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर चल रहा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासन द्वारा शिकायत को बिना किसी ठोस कार्रवाई के बंद किए जाने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। शिकायतकर्ता कमल कांत सहित अन्य ने मुख्यमंत्री के निर्देशों का हवाला देते हुए इस क्लोजर रिपोर्ट को नियम विरुद्ध और जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया है।
सीएम के आदेश की अनदेखी का आरोप
शिकायतकर्ता का कहना है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि सीएम विंडो या जन शिकायत पोर्टल पर आने वाली शिकायतों का निपटारा केवल कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर समाधान होने के बाद ही किया जाना चाहिए लेकिन टांगरी पुल मामले में प्रशासन ने जमीनी हकीकत देखे बिना ही फाइल बंद कर दी, जो कि अन्यायपूर्ण है।
बिना पैमाइश कैसे हुआ फैसला
ग्रामीणों ने प्रशासन की उस रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं, जिसमें कहा गया है कि संबंधित ढांचा निजी संपत्ति पर बना है। ग्रामीणों का तर्क है कि मौके पर शिकायतकर्ता की मौजूदगी में कोई आधिकारिक पैमाइश नहीं की गई। विभाग ने यह साबित करने के लिए कोई पुख्ता दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किए कि विवादित जमीन वास्तव में निजी मालिकाना हक की है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट की नियुक्ति होने के बावजूद भी मौके पर कोई प्रवर्तन कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
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प्रशासन ने झाड़ा पल्ला
दूसरी ओर, विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि जब टीम मौके पर पहुंची तो पाया गया कि निर्माण निजी भूमि पर है, इसलिए इसे हटाया नहीं जा सकता। विभाग ने अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में डाल दी है। इससे मामला और उलझ गया है।
दोबारा खुलेगी फाइल
पीड़ित पक्ष से रामचंद्र सैनी, दीपक शर्मा, कुलदीप सैनी व दशरथ आदि ने अब इस शिकायत को दोबारा खोलने की मांग की है। उनका कहना है कि सक्षम अधिकारियों की देखरेख में निष्पक्ष पैमाइश करवाई जाए और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक मौके पर अवैध कब्जा नहीं हटता, तब तक शिकायत के क्लोजर को शून्य माना जाए।
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सीएम के आदेश की अनदेखी का आरोप
शिकायतकर्ता का कहना है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि सीएम विंडो या जन शिकायत पोर्टल पर आने वाली शिकायतों का निपटारा केवल कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर समाधान होने के बाद ही किया जाना चाहिए लेकिन टांगरी पुल मामले में प्रशासन ने जमीनी हकीकत देखे बिना ही फाइल बंद कर दी, जो कि अन्यायपूर्ण है।
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बिना पैमाइश कैसे हुआ फैसला
ग्रामीणों ने प्रशासन की उस रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं, जिसमें कहा गया है कि संबंधित ढांचा निजी संपत्ति पर बना है। ग्रामीणों का तर्क है कि मौके पर शिकायतकर्ता की मौजूदगी में कोई आधिकारिक पैमाइश नहीं की गई। विभाग ने यह साबित करने के लिए कोई पुख्ता दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किए कि विवादित जमीन वास्तव में निजी मालिकाना हक की है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट की नियुक्ति होने के बावजूद भी मौके पर कोई प्रवर्तन कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
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प्रशासन ने झाड़ा पल्ला
दूसरी ओर, विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि जब टीम मौके पर पहुंची तो पाया गया कि निर्माण निजी भूमि पर है, इसलिए इसे हटाया नहीं जा सकता। विभाग ने अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में डाल दी है। इससे मामला और उलझ गया है।
दोबारा खुलेगी फाइल
पीड़ित पक्ष से रामचंद्र सैनी, दीपक शर्मा, कुलदीप सैनी व दशरथ आदि ने अब इस शिकायत को दोबारा खोलने की मांग की है। उनका कहना है कि सक्षम अधिकारियों की देखरेख में निष्पक्ष पैमाइश करवाई जाए और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक मौके पर अवैध कब्जा नहीं हटता, तब तक शिकायत के क्लोजर को शून्य माना जाए।