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Ambala News: अल्ट्रासाउंड मशीन एक, 60 की जांच, बाकी को तारीख
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सुखबीर सिंह
अंबाला सिटी। शहर के नागरिक अस्पताल को यूं तो स्वास्थ्य विभाग ने सुविधाओं से लैस बना दिया है। मगर हकीकत यह है कि मरीजों को बीमारियों में अल्ट्रासाउंड जांच भी पूरी तरह से नहीं मिल पा रही है। आलम यह है कि ओपीडी में चिकित्सक अल्ट्रासाउंड जांच कराने की सलाह दे रहे हैं, मगर जब मरीज अल्ट्रासाउंड की पर्ची कटवाने जाते हैं तो उन्हें एक-एक महीने तक की तारीख दे दी जाती है।
इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा कारण कोई कर्मचारी नहीं, बल्कि अल्ट्रासाउंड मशीन और संबंधित चिकित्सक की कमी है। जबकि इसके दूसरी तरफ रोजाना अल्ट्रासाउंड कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर के नागरिक अस्पताल में रोजाना 1200 से 1500 मरीजों की ओपीडी रहती है। इसमें लगभग 100 मरीजों को डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांच कराने का परामर्श देते हैं। जबकि इसके दूसरी तरफ अस्पताल में मौजूद एकमात्र अल्ट्रासाउंड मशीन से एक दिन में 60 से 70 जांच ही हो पाती हैं। उसमें भी ओपीडी के करीब 30 मरीजों को ही जांच का लाभ मिल पा रहा है। जबकि अन्य को लंबी तारीख दे दी जाती है। ऐसे में लोग हताश होकर निजी अस्पतालों में जांच कराने चले जाते हैं।
एक घंटे में 12 अल्ट्रासाउंड ही संभव
अल्ट्रसाउंड विभाग के इंचार्ज डॉ. विजय वर्मा ने बताया कि एक मरीज का अल्ट्रासाउंड करने के लिए लगभग पांच मिनट लगते है। ओपीडी के समय को देखें तो छह घंटे के हिसाब से एक दिन में सिर्फ 72 अल्ट्रासाउंड हो सकते है। इसमें में भी एक घंटा इको टेस्ट के लिए दिया जाता है। इसलिए अल्ट्रासाउंड करने के लिए समय सिर्फ पांच घंटे रह जाता है। इतने समय में सिर्फ 60 अल्ट्रासाउंड हो सकते हैं। ऐसे में एक घंटे में सिर्फ 12 अल्ट्रासाउंड ही हो पाते हैं। उन्होंने बताया कि इसमें ओपीडी के 30 मरीज जिन्हें तारीख मिली होती है, जेल व पुलिस संबंधित तीन से चार अल्ट्रासाउंड, गर्भवतियों के 10 से 15 अल्ट्रासाउंड और लगभग 10 अल्ट्रासाउंड आपातकालीन मरीजों के किए जाते हैं। पिछले महीने के डाटा के आधार पर अप्रैल माह में कुल 835 अल्ट्रासाउंड किए गए हैं।
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पीएमओ डॉ. संगीता गोयल से सीधी बात
प्रश्न- अस्पताल में आने वाले मरीजों के हिसाब से अल्ट्रासाउंड जांच को काफी लंबी तारीख मिल रही है
जवाब- अधिक गंभीर मरीजों का तुरंत प्रभाव से अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं। ओपीडी में मरीजों की संख्या अधिक है। इसलिए आगे की तारीख देनी पड़ती है।
प्रश्न- क्या एक अल्ट्रासाउंड मशीन और होनी चाहिए।
जवाब- मशीन तो होनी चाहिए, मगर इसको लेकर विचार चल रहा है।
प्रश्न- गर्भवतियों को भी काफी दिक्कत आ सकती है।
जवाब- अगर किसी गर्भवती को अस्पताल में अधिक समय लगता है तो अस्पताल परिसर के ओर से शांति अस्पताल में निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा दी जा रही है। जिसके लिए विभाग की ओर से अस्पताल को प्रति अल्ट्रासाउंड 300 रुपए का भुगतान किया जाता है।
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अंबाला सिटी। शहर के नागरिक अस्पताल को यूं तो स्वास्थ्य विभाग ने सुविधाओं से लैस बना दिया है। मगर हकीकत यह है कि मरीजों को बीमारियों में अल्ट्रासाउंड जांच भी पूरी तरह से नहीं मिल पा रही है। आलम यह है कि ओपीडी में चिकित्सक अल्ट्रासाउंड जांच कराने की सलाह दे रहे हैं, मगर जब मरीज अल्ट्रासाउंड की पर्ची कटवाने जाते हैं तो उन्हें एक-एक महीने तक की तारीख दे दी जाती है।
इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा कारण कोई कर्मचारी नहीं, बल्कि अल्ट्रासाउंड मशीन और संबंधित चिकित्सक की कमी है। जबकि इसके दूसरी तरफ रोजाना अल्ट्रासाउंड कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर के नागरिक अस्पताल में रोजाना 1200 से 1500 मरीजों की ओपीडी रहती है। इसमें लगभग 100 मरीजों को डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांच कराने का परामर्श देते हैं। जबकि इसके दूसरी तरफ अस्पताल में मौजूद एकमात्र अल्ट्रासाउंड मशीन से एक दिन में 60 से 70 जांच ही हो पाती हैं। उसमें भी ओपीडी के करीब 30 मरीजों को ही जांच का लाभ मिल पा रहा है। जबकि अन्य को लंबी तारीख दे दी जाती है। ऐसे में लोग हताश होकर निजी अस्पतालों में जांच कराने चले जाते हैं।
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एक घंटे में 12 अल्ट्रासाउंड ही संभव
अल्ट्रसाउंड विभाग के इंचार्ज डॉ. विजय वर्मा ने बताया कि एक मरीज का अल्ट्रासाउंड करने के लिए लगभग पांच मिनट लगते है। ओपीडी के समय को देखें तो छह घंटे के हिसाब से एक दिन में सिर्फ 72 अल्ट्रासाउंड हो सकते है। इसमें में भी एक घंटा इको टेस्ट के लिए दिया जाता है। इसलिए अल्ट्रासाउंड करने के लिए समय सिर्फ पांच घंटे रह जाता है। इतने समय में सिर्फ 60 अल्ट्रासाउंड हो सकते हैं। ऐसे में एक घंटे में सिर्फ 12 अल्ट्रासाउंड ही हो पाते हैं। उन्होंने बताया कि इसमें ओपीडी के 30 मरीज जिन्हें तारीख मिली होती है, जेल व पुलिस संबंधित तीन से चार अल्ट्रासाउंड, गर्भवतियों के 10 से 15 अल्ट्रासाउंड और लगभग 10 अल्ट्रासाउंड आपातकालीन मरीजों के किए जाते हैं। पिछले महीने के डाटा के आधार पर अप्रैल माह में कुल 835 अल्ट्रासाउंड किए गए हैं।
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पीएमओ डॉ. संगीता गोयल से सीधी बात
प्रश्न- अस्पताल में आने वाले मरीजों के हिसाब से अल्ट्रासाउंड जांच को काफी लंबी तारीख मिल रही है
जवाब- अधिक गंभीर मरीजों का तुरंत प्रभाव से अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं। ओपीडी में मरीजों की संख्या अधिक है। इसलिए आगे की तारीख देनी पड़ती है।
प्रश्न- क्या एक अल्ट्रासाउंड मशीन और होनी चाहिए।
जवाब- मशीन तो होनी चाहिए, मगर इसको लेकर विचार चल रहा है।
प्रश्न- गर्भवतियों को भी काफी दिक्कत आ सकती है।
जवाब- अगर किसी गर्भवती को अस्पताल में अधिक समय लगता है तो अस्पताल परिसर के ओर से शांति अस्पताल में निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा दी जा रही है। जिसके लिए विभाग की ओर से अस्पताल को प्रति अल्ट्रासाउंड 300 रुपए का भुगतान किया जाता है।