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Ambala News: सांस की नली में दूध अटकने से एक माह के मासूम की मौत, मुंह से निकला खून
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दूध पीने के बाद हुई बच्चे की मौत। संवाद
अंबाला। छावनी के दुखेड़ी इलाके में मां का दूध पीने के बाद एक माह के मासूत की सांस की नली में दूध अटकने से मौत हो गई। जब सुबह परिजनों की आंख खुली तो बच्चा बेसुध पड़ा था और उसके मुंह से खून निकल रहा था। परिजन बदहवास हालत में बच्चे को लेकर कैंट के नागरिक अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद से प्रवासी मजदूर परिवार में मातम का माहौल है।
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के एटा जिले के निवासी करण ने बताया कि उनका परिवार रोजी-रोटी की तलाश में अंबाला आया हुआ है। वर्तमान में उनका परिवार छावनी के दुखेड़ी स्थित एक फैक्टरी परिसर में अन्य मजदूर परिवारों के साथ रहता है और कैंट इलाके में ही मजदूरी का काम करता है। करण की भाभी सोनम ने 18 अगस्त को छावनी के नागरिक अस्पताल में एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया था। माता-पिता उसे प्यार से बाबू कहकर पुकारते थे।
परिजनों के अनुसार, 18 सितंबर की तड़के करीब 3 बजे मां सोनम ने लेटे-लेटे ही मासूम को दूध पिलाया था। दूध पिलाने के तुरंत बाद मां को नींद आ गई और वह सो गई। सुबह जब परिजनों की नींद खुली और उन्होंने बच्चे को संभालना चाहा, तो बच्चे के शरीर में कोई हलचल नहीं थी। उसके मुंह से खून निकल रहा था। यह नजारा देखते ही मां सोनम चीख पड़ी। परिजन मासूम को लेकर नागरिक अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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डॉक्टरों ने बताया सांस की नली में अटका था दूध
नागरिक अस्पताल की डॉक्टर नीनू गांधी ने बताया कि जब मासूम को अस्पताल लाया गया, तो वह अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत स्थिति में था। इसके बाद शिशु रोग विशेषज्ञने बच्चे की गहनता से जांच की। जांच में सामने आया कि बच्चे की मौत सांस की नली में दूध जाने से दम घुटने के कारण हुई है।
विशषज्ञों की सलाह
दूध पिलाने के बाद डकार दिलाना बेहद जरूरी
डॉ. नीनू गांधी ने बताया कि ऐसे मामले अक्सर अज्ञानता और लापरवाही के कारण सामने आते हैं। नवजात शिशुओं को दूध पिलाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कभी लेटाकर दूध न पिलाएं। मां को हमेशा बैठकर और बच्चे का सिर थोड़ा ऊपर उठाकर ही स्तनपान कराना चाहिए। दूध पिलाने के तुरंत बाद बच्चे को सीधे कंधे से लगाएं और उसकी पीठ को हल्के हाथों से सहलाएं, जब तक कि वह डकार न ले ले। डकार आने से पेट की हवा बाहर निकल जाती है और दूध सांस की नली में जाने का खतरा टल जाता है। बच्चे को तुरंत पीठ के बल लिटाने से परहेज करें।
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मूल रूप से उत्तर प्रदेश के एटा जिले के निवासी करण ने बताया कि उनका परिवार रोजी-रोटी की तलाश में अंबाला आया हुआ है। वर्तमान में उनका परिवार छावनी के दुखेड़ी स्थित एक फैक्टरी परिसर में अन्य मजदूर परिवारों के साथ रहता है और कैंट इलाके में ही मजदूरी का काम करता है। करण की भाभी सोनम ने 18 अगस्त को छावनी के नागरिक अस्पताल में एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया था। माता-पिता उसे प्यार से बाबू कहकर पुकारते थे।
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परिजनों के अनुसार, 18 सितंबर की तड़के करीब 3 बजे मां सोनम ने लेटे-लेटे ही मासूम को दूध पिलाया था। दूध पिलाने के तुरंत बाद मां को नींद आ गई और वह सो गई। सुबह जब परिजनों की नींद खुली और उन्होंने बच्चे को संभालना चाहा, तो बच्चे के शरीर में कोई हलचल नहीं थी। उसके मुंह से खून निकल रहा था। यह नजारा देखते ही मां सोनम चीख पड़ी। परिजन मासूम को लेकर नागरिक अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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डॉक्टरों ने बताया सांस की नली में अटका था दूध
नागरिक अस्पताल की डॉक्टर नीनू गांधी ने बताया कि जब मासूम को अस्पताल लाया गया, तो वह अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत स्थिति में था। इसके बाद शिशु रोग विशेषज्ञने बच्चे की गहनता से जांच की। जांच में सामने आया कि बच्चे की मौत सांस की नली में दूध जाने से दम घुटने के कारण हुई है।
विशषज्ञों की सलाह
दूध पिलाने के बाद डकार दिलाना बेहद जरूरी
डॉ. नीनू गांधी ने बताया कि ऐसे मामले अक्सर अज्ञानता और लापरवाही के कारण सामने आते हैं। नवजात शिशुओं को दूध पिलाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कभी लेटाकर दूध न पिलाएं। मां को हमेशा बैठकर और बच्चे का सिर थोड़ा ऊपर उठाकर ही स्तनपान कराना चाहिए। दूध पिलाने के तुरंत बाद बच्चे को सीधे कंधे से लगाएं और उसकी पीठ को हल्के हाथों से सहलाएं, जब तक कि वह डकार न ले ले। डकार आने से पेट की हवा बाहर निकल जाती है और दूध सांस की नली में जाने का खतरा टल जाता है। बच्चे को तुरंत पीठ के बल लिटाने से परहेज करें।