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Ambala News: आजादी के समय मिली जमीन का अब मिला मालिकाना हक
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अंबाला सिटी। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश हितेश गर्ग की अदालत ने दशकों पुराने जमीन के विवाद में फैसला सुनाते हुए अपीलकर्ता हरनाम सिंह के पक्ष में निर्णय दिया है। अदालत ने सिविल जज जूनियर डिविजन के वर्ष 2016 के फैसले को पलट दिया है, जिसमें हरनाम सिंह के मालिकाना हक के दावे को कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ हरनाम सिंह ने अपील दायर कर दी थी, जिसके बाद सोमवार को कोर्ट ने याचिकाकर्ता के हक में फैसला सुनाया। इस मामले में केंद्र सरकार को भी पार्टी बनाया गया था।
बंटवारे के समय गिरवी रखी गई थी जमीन
यह मामला मुलाना के गांव धीन में स्थित करीब 13 कनाल 4 मरला जमीन से जुड़ा है। बंटवारे के समय (18 जुलाई 1947) यह जमीन महज 130 रुपये में गिरवी रखी गई थी। बाद में इस जमीन को बलवंत सिंह को आवंटित किया गया और सरप्लस घोषित होने के बाद यह चूहर राम को मिली। हरनाम सिंह ने 22 जनवरी 1987 को चूहर राम से यह जमीन 38,625 रुपये में खरीदी थी। जब राजस्व रिकॉर्ड को देखा गया तो यह जमीन वर्तमान में भी केंद्र सरकार के नाम बंधक के रूप में दर्ज थी, जिसे हरनाम सिंह ने चुनौती दी थी।
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यह था केंद्र सरकार का तर्क
सरकार का तर्क था कि यह निकासी संपत्ति है और इसका मालिकाना हक उनके पास है। हालांकि, अदालत ने दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर हरनाम सिंह को जमीन का शांतिपूर्ण कब्जाधारी और वैध मालिक माना। अदालत ने प्रतिवादियों (भारत संघ व अन्य) को निर्देश दिया है कि वे हरनाम सिंह के शांतिपूर्ण कब्जे में किसी भी तरह का दखल न दें। वहीं पंजाब भू-राजस्व अधिनियम की धारा 45 के तहत राजस्व रिकॉर्ड में सुधार के निर्देश दिए गए हैं। अदालत के इस फैसले से हरनाम सिंह को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले कई सालों से अपनी ही खरीदी हुई जमीन के मालिकाना हक के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।
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बंटवारे के समय गिरवी रखी गई थी जमीन
यह मामला मुलाना के गांव धीन में स्थित करीब 13 कनाल 4 मरला जमीन से जुड़ा है। बंटवारे के समय (18 जुलाई 1947) यह जमीन महज 130 रुपये में गिरवी रखी गई थी। बाद में इस जमीन को बलवंत सिंह को आवंटित किया गया और सरप्लस घोषित होने के बाद यह चूहर राम को मिली। हरनाम सिंह ने 22 जनवरी 1987 को चूहर राम से यह जमीन 38,625 रुपये में खरीदी थी। जब राजस्व रिकॉर्ड को देखा गया तो यह जमीन वर्तमान में भी केंद्र सरकार के नाम बंधक के रूप में दर्ज थी, जिसे हरनाम सिंह ने चुनौती दी थी।
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यह था केंद्र सरकार का तर्क
सरकार का तर्क था कि यह निकासी संपत्ति है और इसका मालिकाना हक उनके पास है। हालांकि, अदालत ने दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर हरनाम सिंह को जमीन का शांतिपूर्ण कब्जाधारी और वैध मालिक माना। अदालत ने प्रतिवादियों (भारत संघ व अन्य) को निर्देश दिया है कि वे हरनाम सिंह के शांतिपूर्ण कब्जे में किसी भी तरह का दखल न दें। वहीं पंजाब भू-राजस्व अधिनियम की धारा 45 के तहत राजस्व रिकॉर्ड में सुधार के निर्देश दिए गए हैं। अदालत के इस फैसले से हरनाम सिंह को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले कई सालों से अपनी ही खरीदी हुई जमीन के मालिकाना हक के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।
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