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Ambala News: अब पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञों से लाइव जुड़ सकेंगे पैथोलाॅजिस्ट
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छावनी नागरिक अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में दिल्ली की टीम जानकारी देती हुई: संवाद
अंशु शर्मा
अंबाला। अटल कैंसर के मरीजों की स्लाइड को लेकर पैथोलॉजिस्ट लैब से सीधा पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञों के संग लाइव होकर चर्चा कर सकेंगे। ऐसे में कैंसर मरीजों का बिना किसी देरी के उपचार शुरू हो सकेगा। यह पीजीआई चंडीगढ़ के टेली पैथोलॉजी के पायलट प्रोजेक्ट के तहत संभव हो सका है। बता दें कि पीजीआई के पैथोलॉजी विभाग ने इस प्रोजेक्ट के साथ हरियाणा से केवल छावनी नागरिक अस्पताल की इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेट्री संग समझौता किया है।
जबकि पंजाब में से लुधियाना का डीएमसी अस्पताल इस प्रोजेक्ट में शामिल है। इसमें नैस्कॉम फाउंडेशन एनजीओ और ऑनवर्ड एसिस्ट सॉफ्टवेयर एंड ए आई सोल्यूशन का सहयोग मिला है। पैथोलॉजिस्ट डॉ. नीतू बाला ने बताया कि इसको लेकर उनकी पैथोलॉजी लैब में एक पूरा सैटअप लगाया गया है। जिसमें एक माइक्रोस्कोप व उसके संग हाई-रेजोल्यूशन कैमरा भी अटैच है और जल्द ही लैपटॉप भी लगेगा। ऐसे में वह सीधा ऑनलाइन अपने गंभीर मरीजों की स्लाइड को अपलोड कर सकेंगे। साथ ही लाइव जुड़कर पीजीआई विशेषज्ञों के साथ मरीज की स्लाइड को लेकर चर्चा कर सकेंगे।
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पहले ई-मेल से भेजी जाती थी रिपोर्ट, लगता था समय
पैथोलॉजिस्ट डॉ. नीतू बाला ने बताया कि पहले भी पीजीआई के संग उनकी रिपोर्ट शेयर होती थी लेकिन उसकी प्रक्रिया लंबी थी। कैंसर के गंभीर मरीज की स्लाइड व उसकी रिपोर्ट को माइक्रोस्कोप के जरिए ई-मेल से अटैच कर भेजते थे। बाद में डॉक्टर उसे खोलने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार कर भेजते थे। ऐसे में एक दिन का समय लगता था और मरीजों का उपचार टल जाता था।
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सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लगा, संदेह लगते ही करेगा इंडीकेट
पैथोलॉजी लैब में लगे पूरे सैटअप में इस मशीन में आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की सुविधा भी है। इस सिस्टम में जब मरीज की स्लाइड की जांच करेंगे तो संदेह होने पर खुद ही इंडीकेट होगा। ऐसे में संबंधित पैथोलॉजिस्ट उसकी गंभीरता से जांच सके। इसके अलावा इस सिस्टम में मरीजों की स्लाइड व उसकी रिपोर्ट की स्टोरेज से भी छुटकारा मिलेगा। अक्सर पहले मरीज का काफी डाटा हो जाता था और परेशानी होती थी।
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दिल्ली से आई नेस्कॉम फाउंडेशन एनजीओ ने दिया डेमो
टैली पैथोलॉजिस्ट के पायलट प्रोजेक्ट को लेकर दिल्ली से नेस्कॉम फाउंडेशन और ऑनवर्ड एसिस्ट की टेक्निकल टीम ने आकर डेमो दिया था। अटल कैंसर केयर केंद्र के निदेशक डॉ. यशपाल वर्मा, डॉ. नीतू, डॉ. पंकज, डॉ. गर्विता और प्रयोगशाला तकनीशियन शामिल रहे थे। यह डेमो कारगर साबित रहा था और वो टीम संतुष्ट होकर गई थी।
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इस सुविधा से अस्पताल में आने वाले सैकड़ों मरीजों को लाभ मिलेगा। इस पायलट प्रोजेक्ट से जुड़ी दोनों संस्थाओं का मकसद कैंसर संबंधी बायोप्सी आदि की स्लाइड्स को ऑनलाइन भेजकर विशेषज्ञ टीम द्वारा जल्दी रिपोर्ट तैयार करना है ताकि उपचार शुरू होने में देरी ना हो सके।
डॉ. यशपाल, निदेशक, अटल कैंसर केयर केंद्र
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अंबाला। अटल कैंसर के मरीजों की स्लाइड को लेकर पैथोलॉजिस्ट लैब से सीधा पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञों के संग लाइव होकर चर्चा कर सकेंगे। ऐसे में कैंसर मरीजों का बिना किसी देरी के उपचार शुरू हो सकेगा। यह पीजीआई चंडीगढ़ के टेली पैथोलॉजी के पायलट प्रोजेक्ट के तहत संभव हो सका है। बता दें कि पीजीआई के पैथोलॉजी विभाग ने इस प्रोजेक्ट के साथ हरियाणा से केवल छावनी नागरिक अस्पताल की इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेट्री संग समझौता किया है।
जबकि पंजाब में से लुधियाना का डीएमसी अस्पताल इस प्रोजेक्ट में शामिल है। इसमें नैस्कॉम फाउंडेशन एनजीओ और ऑनवर्ड एसिस्ट सॉफ्टवेयर एंड ए आई सोल्यूशन का सहयोग मिला है। पैथोलॉजिस्ट डॉ. नीतू बाला ने बताया कि इसको लेकर उनकी पैथोलॉजी लैब में एक पूरा सैटअप लगाया गया है। जिसमें एक माइक्रोस्कोप व उसके संग हाई-रेजोल्यूशन कैमरा भी अटैच है और जल्द ही लैपटॉप भी लगेगा। ऐसे में वह सीधा ऑनलाइन अपने गंभीर मरीजों की स्लाइड को अपलोड कर सकेंगे। साथ ही लाइव जुड़कर पीजीआई विशेषज्ञों के साथ मरीज की स्लाइड को लेकर चर्चा कर सकेंगे।
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पहले ई-मेल से भेजी जाती थी रिपोर्ट, लगता था समय
पैथोलॉजिस्ट डॉ. नीतू बाला ने बताया कि पहले भी पीजीआई के संग उनकी रिपोर्ट शेयर होती थी लेकिन उसकी प्रक्रिया लंबी थी। कैंसर के गंभीर मरीज की स्लाइड व उसकी रिपोर्ट को माइक्रोस्कोप के जरिए ई-मेल से अटैच कर भेजते थे। बाद में डॉक्टर उसे खोलने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार कर भेजते थे। ऐसे में एक दिन का समय लगता था और मरीजों का उपचार टल जाता था।
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सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लगा, संदेह लगते ही करेगा इंडीकेट
पैथोलॉजी लैब में लगे पूरे सैटअप में इस मशीन में आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की सुविधा भी है। इस सिस्टम में जब मरीज की स्लाइड की जांच करेंगे तो संदेह होने पर खुद ही इंडीकेट होगा। ऐसे में संबंधित पैथोलॉजिस्ट उसकी गंभीरता से जांच सके। इसके अलावा इस सिस्टम में मरीजों की स्लाइड व उसकी रिपोर्ट की स्टोरेज से भी छुटकारा मिलेगा। अक्सर पहले मरीज का काफी डाटा हो जाता था और परेशानी होती थी।
दिल्ली से आई नेस्कॉम फाउंडेशन एनजीओ ने दिया डेमो
टैली पैथोलॉजिस्ट के पायलट प्रोजेक्ट को लेकर दिल्ली से नेस्कॉम फाउंडेशन और ऑनवर्ड एसिस्ट की टेक्निकल टीम ने आकर डेमो दिया था। अटल कैंसर केयर केंद्र के निदेशक डॉ. यशपाल वर्मा, डॉ. नीतू, डॉ. पंकज, डॉ. गर्विता और प्रयोगशाला तकनीशियन शामिल रहे थे। यह डेमो कारगर साबित रहा था और वो टीम संतुष्ट होकर गई थी।
इस सुविधा से अस्पताल में आने वाले सैकड़ों मरीजों को लाभ मिलेगा। इस पायलट प्रोजेक्ट से जुड़ी दोनों संस्थाओं का मकसद कैंसर संबंधी बायोप्सी आदि की स्लाइड्स को ऑनलाइन भेजकर विशेषज्ञ टीम द्वारा जल्दी रिपोर्ट तैयार करना है ताकि उपचार शुरू होने में देरी ना हो सके।
डॉ. यशपाल, निदेशक, अटल कैंसर केयर केंद्र

छावनी नागरिक अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में दिल्ली की टीम जानकारी देती हुई: संवाद