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Ambala News: अब जेल से पेशी, गवाही भी ऑनलाइन
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अंबाला सिटी। पुलिस और जेल प्रशासन के लिए कैदियों को पेशी पर लेजाने की सिरदर्दी से जल्द छुटकारा मिलेगा। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लागू होने के बाद कानूनी सिस्टम में कई तब्दीली की जा रही है। इसी के तहत पेश और गवाही के लिए इलेक्ट्राॅनिक माध्यम को प्रयोग में लाना शुरू कर दिया है।
पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के निर्देशन के बाद अंबाला में भी अब जेल से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कैदियों की पेशी होने लगी है। इसके लिए सेंट्रल जेल में कुल 35 पोर्ट का वीसी रूम बनाया गया है। जिसमें 18 पोर्ट लगाए जा चुके हैं बाकी 17 पोर्ट लगाने का काम तेजी से किया जा रहा है। इन पोर्टों के माध्यम से एक साथ 35 कैदियों की पेशी हो सकेगी। ऐसे में इस प्रक्रिया को आगे भी विभाग विस्तार दे रहा है।
पुलिस कर्मियों और विशेषज्ञों की गवाही भी ऑनलाइन
रोचक बात यह है कि पेशी ही नहीं बल्कि समन और गवाही भी ऑनलाइन हो सकेगी। इसके लिए संबंधित विभाग अपने संसाधनों को मजबूत करने में लगे हुए हैं। सभी थानों में ऑनलाइन गवाही के लिए सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। दरअसल सबसे अधिक पुलिस विभाग के मुलाजिमाें को गवाही के लिए अलग-अलग जिलों में, राज्यों में जाना पड़ता है। इस कारण से उन्हें अपनी मूल तैनाती का सेंटर छोड़ना पड़ता है। इस समस्या का समाधान इस कदम से हो जाएगा। अब मुलाजिम अपने नजदीकी जाने से वीसी के जरिए कोर्ट में ऑनलाइन गवाही दे सकेंगे। इसी सुविधा को अगर विस्तार से देखें तो आने वाले समय में चिकित्सक और फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी ऑनलाइन अपनी गवाही दे सकेंगे। वह अपने मोबाइल के जरिए कोर्ट को अपने विचार दे सकेंगे।
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बीएनएस लागू होने के बाद ये हुआ परिवर्तन
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) सहित दो अन्य कानूनों को नए रूप में लागू किया गया है। हरियाणा को इस साल इस कानूनों के प्रावधानों को लागू करना है। बीएनएस के एक अध्याय में इलेक्ट्रानिक ट्रॉयल के प्रावधानों को बताया गया है। यही कारण है कि कुछ समय पहले पुलिस विभाग के आला अधिकारियों ने इस बाबत सभी जिलों के कप्तानों को निर्देशित किया था।
पुलिस और जेल विभाग को यह होगा लाभ
अब तक अगर कोर्ट में किसी कैदी को पेश करना हो तो पुलिस को छोटा अपराध है तो एक दो गाड़ियां और सुरक्षा गार्ड भेजने पड़ते हैं। बड़ा अपराध करने वाला आरोपी है तो संसाधनों की संख्या बढ़ जाती है। मगर इलेक्ट्रानिक ट्रायल प्रक्रिया लागू होने से पुलिस कुछ मामलों में कोर्ट से ही पेशी करा रही है। इससे न तो उन्हें गाड़ी भेजनी पड़ रही है और न ही अत्यधिक पुलिस फोर्स। इसी प्रकार जेल प्रशासन और पुलिस विभाग की अपराधी के भागने या उसके साथ कोई वारदात हाेने की चिंता भी दूर हो रही है। इसी प्रकार गवाही ऑनलाइन होने से पुलिस मुलाजिमों का समय बच रहा है। इसी प्रकार जेल के बाहर जाने से कैदी बाहर से कोई चीज ले आते थे तो यह भी रुकेगा।
ये कहते हैं कानून के विशेषज्ञ
वरिष्ठ अधिवक्ता मान सिंह काकरान बताते हैं कि बीएनएस के तहत इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से ट्रायल होने पर पुलिस और कोर्ट का समय बचेगा। समन ऑनलाइन समय से भेजे जा सकेंगे। सुरक्षा के लिए तमाम प्रबंध करने की जरूरत नहीं होगी। कैदियों को लाने ले जाने के बाद पेट्रोल व अन्य खर्चे कम होंगे। इसी प्रकार कैदियों को दिनभर पेशी के लिए अपनी बारी आने के इंतजार में काफी समय लग जाता है। कई बार तो कैदी भूखे ही रहते हैं। उनकी सुरक्षा पर भी संकट रहता है। ऐसे में इस व्यवस्था से यह लाभ होंगे। अगर नाकारात्मक पक्ष की बात करें तो अभी तक कैदी पेशी के दौरान अपने अधिवक्ता से मन की बात कह लेता था। कई बार कोर्ट में बहस के दौरान कोई जानकारी कैदी ऐसी दे देता कि वकील के लिए वह मजबूत हिस्सा बन जाती थी।
वर्जन
इलेक्ट्रानिक ट्रायल से पेशी करानी हमने शुरू कराई है। आगे पूरी तरह से पेशी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराने की योजना है। इसी प्रकार मुलाजिमों की गवाही भी वह अपने फोन या नजदीकी थाने से वीसी के जरिए कोर्ट में दे सकेंगे। इसके लिए संसाधन थानों में भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
-सुरेंद्र सिंह भोरिया, एसपी, अंबाला
वर्जन
सेंट्रल जेल में कुल 35 पोर्ट का वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम तैयार किया गया है। 18 पोर्ट बनाए जा चुके हैं 17 पोर्ट को बनाया जा रहा है। इसके माध्यम से वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोर्ट में पेशी की जा सकेगी। इस सुविधा से कैदियों के भागने या उनके साथ वारदात होने का जोखिम लगभग समाप्त हो जाएगा।
-सतविंदर सिंह, जेल अधीक्षक, सेंट्रल जेल अंबाला
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पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के निर्देशन के बाद अंबाला में भी अब जेल से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कैदियों की पेशी होने लगी है। इसके लिए सेंट्रल जेल में कुल 35 पोर्ट का वीसी रूम बनाया गया है। जिसमें 18 पोर्ट लगाए जा चुके हैं बाकी 17 पोर्ट लगाने का काम तेजी से किया जा रहा है। इन पोर्टों के माध्यम से एक साथ 35 कैदियों की पेशी हो सकेगी। ऐसे में इस प्रक्रिया को आगे भी विभाग विस्तार दे रहा है।
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पुलिस कर्मियों और विशेषज्ञों की गवाही भी ऑनलाइन
रोचक बात यह है कि पेशी ही नहीं बल्कि समन और गवाही भी ऑनलाइन हो सकेगी। इसके लिए संबंधित विभाग अपने संसाधनों को मजबूत करने में लगे हुए हैं। सभी थानों में ऑनलाइन गवाही के लिए सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। दरअसल सबसे अधिक पुलिस विभाग के मुलाजिमाें को गवाही के लिए अलग-अलग जिलों में, राज्यों में जाना पड़ता है। इस कारण से उन्हें अपनी मूल तैनाती का सेंटर छोड़ना पड़ता है। इस समस्या का समाधान इस कदम से हो जाएगा। अब मुलाजिम अपने नजदीकी जाने से वीसी के जरिए कोर्ट में ऑनलाइन गवाही दे सकेंगे। इसी सुविधा को अगर विस्तार से देखें तो आने वाले समय में चिकित्सक और फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी ऑनलाइन अपनी गवाही दे सकेंगे। वह अपने मोबाइल के जरिए कोर्ट को अपने विचार दे सकेंगे।
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बीएनएस लागू होने के बाद ये हुआ परिवर्तन
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) सहित दो अन्य कानूनों को नए रूप में लागू किया गया है। हरियाणा को इस साल इस कानूनों के प्रावधानों को लागू करना है। बीएनएस के एक अध्याय में इलेक्ट्रानिक ट्रॉयल के प्रावधानों को बताया गया है। यही कारण है कि कुछ समय पहले पुलिस विभाग के आला अधिकारियों ने इस बाबत सभी जिलों के कप्तानों को निर्देशित किया था।
पुलिस और जेल विभाग को यह होगा लाभ
अब तक अगर कोर्ट में किसी कैदी को पेश करना हो तो पुलिस को छोटा अपराध है तो एक दो गाड़ियां और सुरक्षा गार्ड भेजने पड़ते हैं। बड़ा अपराध करने वाला आरोपी है तो संसाधनों की संख्या बढ़ जाती है। मगर इलेक्ट्रानिक ट्रायल प्रक्रिया लागू होने से पुलिस कुछ मामलों में कोर्ट से ही पेशी करा रही है। इससे न तो उन्हें गाड़ी भेजनी पड़ रही है और न ही अत्यधिक पुलिस फोर्स। इसी प्रकार जेल प्रशासन और पुलिस विभाग की अपराधी के भागने या उसके साथ कोई वारदात हाेने की चिंता भी दूर हो रही है। इसी प्रकार गवाही ऑनलाइन होने से पुलिस मुलाजिमों का समय बच रहा है। इसी प्रकार जेल के बाहर जाने से कैदी बाहर से कोई चीज ले आते थे तो यह भी रुकेगा।
ये कहते हैं कानून के विशेषज्ञ
वरिष्ठ अधिवक्ता मान सिंह काकरान बताते हैं कि बीएनएस के तहत इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से ट्रायल होने पर पुलिस और कोर्ट का समय बचेगा। समन ऑनलाइन समय से भेजे जा सकेंगे। सुरक्षा के लिए तमाम प्रबंध करने की जरूरत नहीं होगी। कैदियों को लाने ले जाने के बाद पेट्रोल व अन्य खर्चे कम होंगे। इसी प्रकार कैदियों को दिनभर पेशी के लिए अपनी बारी आने के इंतजार में काफी समय लग जाता है। कई बार तो कैदी भूखे ही रहते हैं। उनकी सुरक्षा पर भी संकट रहता है। ऐसे में इस व्यवस्था से यह लाभ होंगे। अगर नाकारात्मक पक्ष की बात करें तो अभी तक कैदी पेशी के दौरान अपने अधिवक्ता से मन की बात कह लेता था। कई बार कोर्ट में बहस के दौरान कोई जानकारी कैदी ऐसी दे देता कि वकील के लिए वह मजबूत हिस्सा बन जाती थी।
वर्जन
इलेक्ट्रानिक ट्रायल से पेशी करानी हमने शुरू कराई है। आगे पूरी तरह से पेशी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराने की योजना है। इसी प्रकार मुलाजिमों की गवाही भी वह अपने फोन या नजदीकी थाने से वीसी के जरिए कोर्ट में दे सकेंगे। इसके लिए संसाधन थानों में भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
-सुरेंद्र सिंह भोरिया, एसपी, अंबाला
वर्जन
सेंट्रल जेल में कुल 35 पोर्ट का वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम तैयार किया गया है। 18 पोर्ट बनाए जा चुके हैं 17 पोर्ट को बनाया जा रहा है। इसके माध्यम से वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोर्ट में पेशी की जा सकेगी। इस सुविधा से कैदियों के भागने या उनके साथ वारदात होने का जोखिम लगभग समाप्त हो जाएगा।
-सतविंदर सिंह, जेल अधीक्षक, सेंट्रल जेल अंबाला