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एनएचएम कर्मचारियों ने भरी हुंकार
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अंबाला सिटी। मांगों के समर्थन में एनएचएम कर्मचारियों ने सोमवार से तीन दिवसीय हड़ताल आरंभ कर दी है। हड़ताल के पहले दिन सीएमओ कार्यालय पर एकत्रित हुए कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान संघ पदाधिकारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द ही उनकी मांगों को नहीं मान लेती है तो मजबूरन कर्मचारियों को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाना पड़ेगा।
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ हरियाणा संबंधित भारतीय मजदूर संघ प्रदेश प्रचार मंत्री दिनेश कुमार कौशिक ने बताया कि वह मुख्य रूप से सर्विस नियम 2018 वित्त विभाग की ओर से रद्द करने की सिफारिश का विरोध कर रहे हैं। एनएचएम कर्मचारियों का सर्विस नियम 2018 से लंबित पड़ा है। वहीं सातवें वेतन की मांग और वंचित कर्मचारियों के वेतनमान में संशोधन की मुख्य मांगें भी हैं। जिसे सरकार पूरा नहीं कर रही है।
वहीं एनएचएम के कर्मचारियों को निश्चित पारिश्रमिक के समकक्ष वेतनमान के प्रवेश पत्र के वेतन को एकमुश्त करके देने की प्रक्रिया को रद्द करने, सातवें वेतन आयोग को शीघ्र लागू करने, वेतनमान को संशोधित करने आदि मांगों को लेकर वह धरना दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसमें लेबर रूम स्टाफ नर्स, एसएनसीयू स्टाफ, एमपीएचडब्ल्यू फीमेल, एंबुलेंस स्टाफ, आरबीएसके, सीएचओ, डीपीएमयू यूनिट, एनसीडी स्टाफ व सभी पीएचसी सीएचसी सब सेंटर का स्टाफ प्रदर्शन में शामिल रहा। इस मौके पर जिला प्रधान तरनदीप बक्शी, प्रदेश उपाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, प्रदेश प्रचार मंत्री दिनेश कुमार कौशिक, प्रदेश अध्यक्ष विपिन शर्मा, प्रदेश महामंत्री जितेंद्र, गौरव सहगल, पंकज अत्रे, संगठन मंत्री विजय कंबोज, जगत बिसला, कृष्ण कटारिया, सुरेंद्र देशवाल, विजय बाली आदि मौजूद रहे।
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कर्मचारी बोले, हमने निभाया अपना कर्तव्य
कर्मचारियों ने कहा कि वर्ष 1999 से लेकर अब तक लगातार एनएचएम स्टाफ की ओर से स्वास्थ्य सुविधाएं आम जनमानस तक पहुंचाई जा रही है। इस पर मातृ मृत्यु दर जो कि वर्ष 2005 में 155 हुआ करती थी, वह इस समय घटकर मात्र 55 रह गई। शिशु मृत्यु दर जो कि वर्ष 2005 में 40 प्रतिशत होती थी, जो घटकर 8 हो गई है। एनसी रजिस्ट्रेशन 60 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो गया है। यह सब एनएचएम कर्मचारियों की दिन-रात की गई मेहनत का नतीजा है। कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 से लेकर अब तक बिना अवकाश लिए सेवाएं दी जा रहे हैं। एनएचएम कर्मचारियों ने डबल वेतनमान को भी अपनी स्वेच्छा से देश हित में नहीं लेने का फैसला लिया था। कोविड-19 से बचाव के लिए पूरे देश में करीब 200 करोड़ डोज लगाई जा चुकी है। एनएचएम कर्मचारियों की मेहनत के कारण ही लक्ष्य प्राप्ति संभव हो पाई है।
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स्वास्थ्य कर्मचारी संघ हरियाणा संबंधित भारतीय मजदूर संघ प्रदेश प्रचार मंत्री दिनेश कुमार कौशिक ने बताया कि वह मुख्य रूप से सर्विस नियम 2018 वित्त विभाग की ओर से रद्द करने की सिफारिश का विरोध कर रहे हैं। एनएचएम कर्मचारियों का सर्विस नियम 2018 से लंबित पड़ा है। वहीं सातवें वेतन की मांग और वंचित कर्मचारियों के वेतनमान में संशोधन की मुख्य मांगें भी हैं। जिसे सरकार पूरा नहीं कर रही है।
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वहीं एनएचएम के कर्मचारियों को निश्चित पारिश्रमिक के समकक्ष वेतनमान के प्रवेश पत्र के वेतन को एकमुश्त करके देने की प्रक्रिया को रद्द करने, सातवें वेतन आयोग को शीघ्र लागू करने, वेतनमान को संशोधित करने आदि मांगों को लेकर वह धरना दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसमें लेबर रूम स्टाफ नर्स, एसएनसीयू स्टाफ, एमपीएचडब्ल्यू फीमेल, एंबुलेंस स्टाफ, आरबीएसके, सीएचओ, डीपीएमयू यूनिट, एनसीडी स्टाफ व सभी पीएचसी सीएचसी सब सेंटर का स्टाफ प्रदर्शन में शामिल रहा। इस मौके पर जिला प्रधान तरनदीप बक्शी, प्रदेश उपाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, प्रदेश प्रचार मंत्री दिनेश कुमार कौशिक, प्रदेश अध्यक्ष विपिन शर्मा, प्रदेश महामंत्री जितेंद्र, गौरव सहगल, पंकज अत्रे, संगठन मंत्री विजय कंबोज, जगत बिसला, कृष्ण कटारिया, सुरेंद्र देशवाल, विजय बाली आदि मौजूद रहे।
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कर्मचारी बोले, हमने निभाया अपना कर्तव्य
कर्मचारियों ने कहा कि वर्ष 1999 से लेकर अब तक लगातार एनएचएम स्टाफ की ओर से स्वास्थ्य सुविधाएं आम जनमानस तक पहुंचाई जा रही है। इस पर मातृ मृत्यु दर जो कि वर्ष 2005 में 155 हुआ करती थी, वह इस समय घटकर मात्र 55 रह गई। शिशु मृत्यु दर जो कि वर्ष 2005 में 40 प्रतिशत होती थी, जो घटकर 8 हो गई है। एनसी रजिस्ट्रेशन 60 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो गया है। यह सब एनएचएम कर्मचारियों की दिन-रात की गई मेहनत का नतीजा है। कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 से लेकर अब तक बिना अवकाश लिए सेवाएं दी जा रहे हैं। एनएचएम कर्मचारियों ने डबल वेतनमान को भी अपनी स्वेच्छा से देश हित में नहीं लेने का फैसला लिया था। कोविड-19 से बचाव के लिए पूरे देश में करीब 200 करोड़ डोज लगाई जा चुकी है। एनएचएम कर्मचारियों की मेहनत के कारण ही लक्ष्य प्राप्ति संभव हो पाई है।