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Ambala News: रूस में सांबापुर गांव के नारायणदत्त की मौत, शव लाने में मदद की गुहार
Sun, 23 Nov 2025 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sun, 23 Nov 2025 01:41 AM IST
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नारायणदत्त की फाइल फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी अंबाला/ मुलाना। क्षेत्र के साबांपुर गांव में शोक छा गया, जब 26 वर्षीय नारायणदत्त की रूस में मौत की सूचना उनके परिवार तक पहुंची।
तीन महीने पहले ही वह पढ़ाई के लिए रूस गया था, लेकिन वहां तेज बुखार उसे उसकी हालत बिगड़ गई थी। करीब पांच दिनों तक आईसीयू में भर्ती रहने के बाद वीरवार शाम को उसकी मौत हो गई। खबर मिलते ही पूरे गांव में मातम पसर गया। नारायणदत्त के पिता रविन्द्र शर्मा का रो-रोकर बुरा हाल है।
गम से टूट चुके रविन्द्र शर्मा ने बताया कि नारायण उनका इकलौता बेटा था और परिवार की पूरी उम्मीदें उसी पर टिकी थीं। उन्होंने भारी मन से कहा, तेज बुखार ने मेरा बेटा छीन लिया, सब उजड़ गया। अब उसके शव को भारत लाने के लिए लाखों रुपये का खर्च बताया जा रहा है। हम गरीब लोग हैं, इतना रुपया कहां से लाएं, उन्होंने सरकार से हाथ जोड़कर अपील की कि बेटे का शव जल्द भारत लाने में मदद की जाए ताकि परिवार अंतिम संस्कार अपने देश में कर सके।
अगस्त में गए थे रूस : नारायणदत्त की बहन शिवानी ने बताया कि उनका भाई अगस्त 2025 में पढ़ाई के लिए रूस गया था। उसकी तबीयत बिगड़ने की जानकारी उन्हें वहां के स्थानीय साथियों से मिलती रही। बताया गया कि अचानक वह बेहोश हो गया और तेज बुखार के कारण आईसीयू में भर्ती किया गया, लेकिन किसी को भी उसे देखने की इजाजत नहीं थी। परिवार केवल फोन पर ही उसकी स्थिति जानने को मजबूर था और सही जानकारी लगातार नहीं मिल पा रही थी। वीरवार को अचानक मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
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तीन महीने पहले ही वह पढ़ाई के लिए रूस गया था, लेकिन वहां तेज बुखार उसे उसकी हालत बिगड़ गई थी। करीब पांच दिनों तक आईसीयू में भर्ती रहने के बाद वीरवार शाम को उसकी मौत हो गई। खबर मिलते ही पूरे गांव में मातम पसर गया। नारायणदत्त के पिता रविन्द्र शर्मा का रो-रोकर बुरा हाल है।
गम से टूट चुके रविन्द्र शर्मा ने बताया कि नारायण उनका इकलौता बेटा था और परिवार की पूरी उम्मीदें उसी पर टिकी थीं। उन्होंने भारी मन से कहा, तेज बुखार ने मेरा बेटा छीन लिया, सब उजड़ गया। अब उसके शव को भारत लाने के लिए लाखों रुपये का खर्च बताया जा रहा है। हम गरीब लोग हैं, इतना रुपया कहां से लाएं, उन्होंने सरकार से हाथ जोड़कर अपील की कि बेटे का शव जल्द भारत लाने में मदद की जाए ताकि परिवार अंतिम संस्कार अपने देश में कर सके।
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अगस्त में गए थे रूस : नारायणदत्त की बहन शिवानी ने बताया कि उनका भाई अगस्त 2025 में पढ़ाई के लिए रूस गया था। उसकी तबीयत बिगड़ने की जानकारी उन्हें वहां के स्थानीय साथियों से मिलती रही। बताया गया कि अचानक वह बेहोश हो गया और तेज बुखार के कारण आईसीयू में भर्ती किया गया, लेकिन किसी को भी उसे देखने की इजाजत नहीं थी। परिवार केवल फोन पर ही उसकी स्थिति जानने को मजबूर था और सही जानकारी लगातार नहीं मिल पा रही थी। वीरवार को अचानक मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
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नारायणदत्त की फाइल फोटो