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Ambala News: मुजफ्फरनगर और दिल्ली के दीप करेंगे घरों को रोशन
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शहर में बर्तन को आकर्षक रंग में सजाता व्यक्ति।
अंबाला सिटी। दिवाली की तैयारियां जोरों पर हैं। बाजार भी पूरी तरह से सजने लगे हैं। बाहरी क्षेत्रों से सामान भी शहर में पहुंचने लगा है। साधारण दीये भी ग्रामीण क्षेत्रों से बनकर शहर में पहुंच रहे हैं। यही नहीं मुजफ्फरनगर और दिल्ली से भी मिट्टी के दीये आ रहे हैं और गुजराती दीये भी लोगों को खूब भा रहे हैं।
ये दीये भी लोगों की पहली पसंद बन रहे हैं। चाइनीज दीये भी लोग खरीद रहे हैं। यह दीये पानी से चलते हैं। यह आकर्षक दीये कई रेट में बाजार में उपलब्ध हैं। इन दीयों में एक बटन लगा है। यह रंग-बिरंगे दीये भी खूब बिक रहे हैं। यह सामान दिल्ली और मुंबई से पहुंच रहा है।
गुजराती दीये बन रहे लोगों की पसंद
ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग दीये बनाने का कार्य कर रहे हैं, जबकि शहर में लोग खरीद कर ही दीये बेचने में जुटे हुए हैं, क्याेंकि इनके पास दीये बनाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। मजबूरन इन्हें बने-बनाए दीये ही बेचने पड़ते हैं। साधारण दीये मुजफ्फरनगर और दिल्ली से आ रहे हैं तो वहीं सजावटी और फैंसी दीये गुजरात से आ रहे हैं। साधारण दीये 100 रुपये में 80 और 100 रुपये में 100 के दाम पर बिक रहे हैं तो वहीं गुजरात के दीये 100 रुपये से शुरू होकर 150 रुपये तक बिक रहे हैं। दीये का काम करने वाले लोग अब सिर्फ मटकों और दीयों को सजाने का ही काम कर रहे हैं। यह मटके 20 से लेकर 150 रुपये तक बिक रहे हैं। शहर के कुम्हार मोहल्ला में पहले 15 से 20 दुकान थी, जोकि अब सिर्फ पांच से छह दुकान रह गई है। रमेश कुमार ने बताया कि लक्ष्मी माता और गणेश भगवान की मूर्तियां कलकत्ता से आ रही हैं। यह मूर्तियां 120 रुपये से शुरू होकर 800 रुपये तक बिक रही है।
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आकर्षक रंगों में सजा रहे हैं कलाकार
मिट्टी के साधारण और गुजरात के फैंसी दीयों के साथ चाइनीज दीये भी मार्केट में खूब आ रहे हैं। यह दीये 200 रुपए तक बिक रहे हैं। वहीं, शहर में अहोई अष्टमी को लेकर भी तैयारी हो चुकी है। यह बर्तन भी शहर में पहुंच चुके हैं। अब इन बर्तनों को आकर्षक रंगों से सजाया जा रहा है। बाजार में बर्तनों की भी खूब डिमांड है। यह बर्तन ग्रामीण क्षेत्र से भी बनकर पहुंच रहे हैं।
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ये दीये भी लोगों की पहली पसंद बन रहे हैं। चाइनीज दीये भी लोग खरीद रहे हैं। यह दीये पानी से चलते हैं। यह आकर्षक दीये कई रेट में बाजार में उपलब्ध हैं। इन दीयों में एक बटन लगा है। यह रंग-बिरंगे दीये भी खूब बिक रहे हैं। यह सामान दिल्ली और मुंबई से पहुंच रहा है।
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गुजराती दीये बन रहे लोगों की पसंद
ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग दीये बनाने का कार्य कर रहे हैं, जबकि शहर में लोग खरीद कर ही दीये बेचने में जुटे हुए हैं, क्याेंकि इनके पास दीये बनाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। मजबूरन इन्हें बने-बनाए दीये ही बेचने पड़ते हैं। साधारण दीये मुजफ्फरनगर और दिल्ली से आ रहे हैं तो वहीं सजावटी और फैंसी दीये गुजरात से आ रहे हैं। साधारण दीये 100 रुपये में 80 और 100 रुपये में 100 के दाम पर बिक रहे हैं तो वहीं गुजरात के दीये 100 रुपये से शुरू होकर 150 रुपये तक बिक रहे हैं। दीये का काम करने वाले लोग अब सिर्फ मटकों और दीयों को सजाने का ही काम कर रहे हैं। यह मटके 20 से लेकर 150 रुपये तक बिक रहे हैं। शहर के कुम्हार मोहल्ला में पहले 15 से 20 दुकान थी, जोकि अब सिर्फ पांच से छह दुकान रह गई है। रमेश कुमार ने बताया कि लक्ष्मी माता और गणेश भगवान की मूर्तियां कलकत्ता से आ रही हैं। यह मूर्तियां 120 रुपये से शुरू होकर 800 रुपये तक बिक रही है।
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आकर्षक रंगों में सजा रहे हैं कलाकार
मिट्टी के साधारण और गुजरात के फैंसी दीयों के साथ चाइनीज दीये भी मार्केट में खूब आ रहे हैं। यह दीये 200 रुपए तक बिक रहे हैं। वहीं, शहर में अहोई अष्टमी को लेकर भी तैयारी हो चुकी है। यह बर्तन भी शहर में पहुंच चुके हैं। अब इन बर्तनों को आकर्षक रंगों से सजाया जा रहा है। बाजार में बर्तनों की भी खूब डिमांड है। यह बर्तन ग्रामीण क्षेत्र से भी बनकर पहुंच रहे हैं।

शहर में बर्तन को आकर्षक रंग में सजाता व्यक्ति।