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Ambala News: सुपर फूड बनाने में जुटा मोहम्मद, कई बीमारियों से मिलेगा छुटकारा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jul 2024 02:14 AM IST
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Mohammed is busy making super food, will get rid of many diseases
नाबार्ड के तरंग मेले में अपने सहयोगियों के साथ पहुंचे माइक्रोबायोलॉजिस्ट। संवाद
सुखबीर सिंह
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अंबाला सिटी। जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों से आज के समय में सभी प्रभावित हैं। युवा और बुजुर्ग भी इन बीमारियों की चपेट में हैं। इन्हीं बीमारियों से बचाव के लिए हिमाचल का एक युवा माइक्रो बायोलॉजिस्ट मोहम्मद रियाज स्थानीय जड़ी बूटियों पर परीक्षण कर रहा है। वह इससे सुपर फूड बनाएगा।
इससे लोगों को जीवन शैली से होने वाली बीमारियां से छुटकारा मिलेगा। इसके लिए उन्होंने हिमाचल के एक स्थानीय जनसमूह के खानपान का अध्ययन किया तो पाया कि जो लोग स्थानीय भोजन और जड़ी बूटियों को अपने भोजन में शामिल कर रहे हैं, उन्हें बीपी, शुगर, दिल की बीमारियां और मोटापा नहीं होता। अंबाला में नाबार्ड की ओर से चल रहे तरंग मेले में हिमाचल के चंबा से अंबाला आए माइक्रो बायोलॉजिस्ट मोहम्मद रियाज ने बताया कि अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हमारे शरीर में अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के जीवाणुओं की आवश्यकता होती है। जो एक सही खानपान से ही मिल पाते है, लेकिन आज के समय में समय पर संतुलित और स्वस्थ भोजन करना कठिन हो गया है।
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करीब 55 हजार लोगों का किया अध्ययन
मोहम्मद रियाज ने बताया कि उन्होंने हिमाचल की पंगवाला जनजाति के 55 हजार से अधिक लोगों का अध्ययन किया। इसमें उन्होंने पाया कि इन जनजाति के लोग स्थानीय जड़ी-बूटियां और कुदरती तौर पर मिलने वाली सब्जियों पर ही निर्भर रहते है। उन्हें अध्ययन में देखने को मिला कि इतनी बड़ी आबादी में से किसी को भी जीवन शैली से जुड़ी कोई बीमारी ही नहीं है। इसलिए वे स्थानीय जड़ी बूटियों के अर्क की सहायता से एक सुपर फूड बनाने में जुटे है। इससे अन्य लोगों को भी लाभ मिल सके।
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साउंड थैरेपी भी लाभकारी
शरीर की कुछ कोशिकाओं में कभी कभी हलचल नहीं हो पाती है। इससे भी कई प्रकार की बीमारियां हो सकती है। साउंड थैरेपी के जरिये शरीर की थमी हुई कोशिकाएं भी हलचल में आ जाती है।

2016 से शोध में जुड़े
मोहम्मद रियाज ने बताया कि उन्होंने 2016 में पंजाब यूनिवर्सिटी से माइक्रो बायोलॉजिस्ट की पढ़ाई पूरी कि थी। कुछ वर्ष उन्होंने चंबा के मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के तौर पर नौकरी भी कि है। इसके बाद उन्होंने इस प्रयोग को ही अपना जीवन बना लिया और विभिन्न जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल से अलग अलग प्रकार की दवा बनाकर लोगों को बीमारियों से छुटकारा दिलवाने में जुटे हैं।
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