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मिशन एडमिशन : अभिभावक महंगी किताबें खरीदने को मजबूर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Apr 2025 01:25 AM IST
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Mission Admission: Parents forced to buy expensive booksMission Admission: Parents forced to buy expensive books
शहर में एक स्टोर पर किताब खरीदते हुए अ​भिभावक। - फोटो : शहर में एक स्टोर पर किताब खरीदते हुए अ​भिभावक।
अंबाला सिटी। जिले के निजी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया शुरू हो गई है। मंगलवार यानी एक अप्रैल से स्कूलों में नया सत्र शुरू होगा। दाखिला प्रक्रिया शुरू होते ही अभिभावकों की भाग-दौड़ भी शुरू हो गई है।
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स्कूलों की ओर से दुकानदारों के पास अभिभावकों को किताब व कॉपी खरीदने के लिए भेजा जा रहा है। उन दुकानदारों की ओर से अभिभावकों को महंगे बिल थमाए जा रहे हैं। कनिष्ठ वर्ग से लेकर वरिष्ठ वर्ग की कक्षा तक अलग-अलग रेट रखे गए हैं। जहां कनिष्ठ वर्ग की कक्षा के किताबों के सेट चार हजार तक मिल रहे हैं, वहीं सातवीं कक्षा से ऊपर सात हजार से लेकर 8 हजार तक किताबों के सेट मिल रहे हैं।
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प्रकाशकों के हिसाब से रेट तय

एक दुकानदार ने बताया कि निजी स्कूलों में अलग-अलग प्रकाशकों की किताबें लगती है, इसलिए उन प्रकाशकों की किताब अनुसार रेट भी अलग हो जाते हैं। कई जगहों पर वरिष्ठ वर्ग में जहां दो हजार तक भी किताब का सेट मिल जाता है तो वहीं, कई प्रकाशकों की उसी कक्षा की किताब तीन से चार हजार तक पहुंच जाती है। एक निजी स्कूल के सातवीं कक्षा की किताब और कॉपी आठ हजार 30 रुपये तक मिल रही हैं। नर्सरी कक्षा की बात करें तो किसी स्कूल में नर्सरी की किताबें तीन हजार तक मिल रही हैं, जबकि किसी दूसरे निजी स्कूल में नर्सरी कक्षा की किताब चार हजार 200 रुपये तक भी मिल रही है। इसमें कॉपी, स्टेशनरी सहित अन्य सामान भी मिल रहा है। इसी तरह पहली व दूसरी कक्षा में यह रेट चार से साढ़े चार हजार तक पहुंच रहा है। तीसरी कक्षा की किताबें पांच हजार से ऊपर की मिल रही हैं, जबकि छठी कक्षा की सात हजार, सातवीं की सात हजार 700 और आठवीं की आठ हजार रुपये तक किताबें मिल रही हैं।
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वर्जन
अभी निदेशालय की ओर से इस संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं हुए हैं और न ही किसी अभिभावक की कोई शिकायत आई है। एक निजी स्कूल की किताब बेचने और दाखिला फीस मांगने की शिकायत आई थी। स्कूल में जाकर चेक किया गया तो स्कूल की ओर से किताब नहीं बेची जा रही थी, लेकिन फिर भी स्कूल को लिखा जाएगा ताकि विभागीय नियमानुसार दाखिला किया जा सके।
-सुरेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी, अंबाला।
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