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कबाड़ी बाजार बिकने जा रहा था सेना का तेल
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला।
Updated Fri, 24 Jun 2016 01:02 AM IST
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लोकल मिलिट्री अथॉरिटी ने एमईएस (मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेस) के एक सहायक को सेना का डीजल चोरी करते हुए रंगे हाथों काबू किया है। इस मामले में एमईएस के एक जेई की भूमिका भी सामने आ गई। विभाग के एक जेई के कहने पर ही ये सहायक चोरी के इस तेल को ठिकाने लगा रहा था। आरोपी को आर्मी पुलिस के हवाले कर किया। चोरी का तेल भी सीएमपी पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है।
कई दिनों से पीछे लगी थी सेना की टीम
लोकल मिलिट्री अथॉरिटी को काफी दिनों से ये सूचनाएं मिल रही थीं कि सेना का तेल विभिन्न तरीकों से चोरी हो रहा है। कभी दूर हाईवे पर इस तेल को चोरी किया जा रहा है तो कभी सैन्य क्षेत्र के आउटर इलाकों में सिविलियन लोगों की मदद से इसे चुराया जा रहा है। बाद में सेना के इस तेल को कैंटोनमेंट एरिया से बाहर ले जाकर सिविल इलाके में बेच दिया जाता है। इन्हीं शिकायतों के चलते लोकल मिलिट्री अथॉरिटी के निर्देशों पर सेना का खुफिया विभाग काफी दिनों से तेल चोरी के इस नेटवर्क को खंगालने और इस गिरोह के सदस्यों पर शिकंजा कसने के लिए कार्यरत थी।
एमईएस के कारिंदों पर था कई दिनों से शक
दरअसल, आर्मी इलाकों के तमाम सैन्य दफ्तरों व यूनिटों में जनरेटरों आदि के लिए तेल की सप्लाई की जिम्मेदारी एमईएस की ही होती है। इसीलिए खुफिया विभाग को इसी विभाग के निचले कारिंदों पर तेल चोरी का संदेह था। इस पर टीम ने इसी विभाग के नेटवर्क को खंगाला और कुछ संदेहास्पद जानकारियां भी जुर्टाइं। टीम को मालूम चला कि एमईएस के कुछ कर्मचारी इस तेल चोरी के काम में संलिप्त हो सकते हैं। शक होने पर टीम ने अपना काम शुरू किया और रंगे हाथों एमईएस विभाग के एक सहायक को रंगे हाथों काबू किया।
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तेल ठिकाने लगाने को 400 रुपये में मंगवाया ऑटो
खुफिया विभाग की टीम एमईएस के कारिंदों पर नजर गड़ाए हुई थी और इधर एमईएस का एक सहायक चोरी किया गया करीबन दो बैरल (318 लीटर) तेल को ठिकाने लगाने की तैयारी कर रहा था। इसके लिए उसने चार सौ रुपये किराये पर एक ऑटो आनंद मार्केट के पास मंगवाया हुआ था और इस पर चोरी का तेल लादकर कबाड़ी बाजार की ओर जाना था। जैसे ही सहायक ने कमरे में छिपाकर रखा तेल बाहर निकाला, तभी टीम ने रंगे हाथों पकड़ लिया और सहायक व चोरी के तेल को मिलिट्री पुलिस के हवाले कर दिया। उसके पास तेल ले जाने का न तो कोई परमिट था और न ही कोई गेट पास। टीम ने ऑटो चालक से भी पूछताछ की, जिसमें उसने कबूल लिया कि उसे 400 रुपये में हायर किया गया है और उसे तेल कबाड़ी बाजार की ओर ले जाने को कहा गया था।
पूछताछ के दौरान सहायक ने भी खुलासा कर दिया कि उसे तेल ठिकाने लगाने को एक जेई ने कहा था। बाद में ये बात भी सामने आ गई कि संबंधित जेई ने सेना के डिपो से करीबन तीन हजार लीटर तेल की सप्लाई ली थी, जिसे आगे सेना के विभिन्न दफ्तरों व यूनिटों में सप्लाई किया जाना था। लेकिन उसमें से दो बैरल तेल अलग वहीं एमईएस दफ्तर के पास सब स्टेशन के कमरे में छिपाकर रख दिया गया था। उधर, इस मामले में सीएमपी ने सभी आरोपियों के बयान दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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कई दिनों से पीछे लगी थी सेना की टीम
लोकल मिलिट्री अथॉरिटी को काफी दिनों से ये सूचनाएं मिल रही थीं कि सेना का तेल विभिन्न तरीकों से चोरी हो रहा है। कभी दूर हाईवे पर इस तेल को चोरी किया जा रहा है तो कभी सैन्य क्षेत्र के आउटर इलाकों में सिविलियन लोगों की मदद से इसे चुराया जा रहा है। बाद में सेना के इस तेल को कैंटोनमेंट एरिया से बाहर ले जाकर सिविल इलाके में बेच दिया जाता है। इन्हीं शिकायतों के चलते लोकल मिलिट्री अथॉरिटी के निर्देशों पर सेना का खुफिया विभाग काफी दिनों से तेल चोरी के इस नेटवर्क को खंगालने और इस गिरोह के सदस्यों पर शिकंजा कसने के लिए कार्यरत थी।
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एमईएस के कारिंदों पर था कई दिनों से शक
दरअसल, आर्मी इलाकों के तमाम सैन्य दफ्तरों व यूनिटों में जनरेटरों आदि के लिए तेल की सप्लाई की जिम्मेदारी एमईएस की ही होती है। इसीलिए खुफिया विभाग को इसी विभाग के निचले कारिंदों पर तेल चोरी का संदेह था। इस पर टीम ने इसी विभाग के नेटवर्क को खंगाला और कुछ संदेहास्पद जानकारियां भी जुर्टाइं। टीम को मालूम चला कि एमईएस के कुछ कर्मचारी इस तेल चोरी के काम में संलिप्त हो सकते हैं। शक होने पर टीम ने अपना काम शुरू किया और रंगे हाथों एमईएस विभाग के एक सहायक को रंगे हाथों काबू किया।
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तेल ठिकाने लगाने को 400 रुपये में मंगवाया ऑटो
खुफिया विभाग की टीम एमईएस के कारिंदों पर नजर गड़ाए हुई थी और इधर एमईएस का एक सहायक चोरी किया गया करीबन दो बैरल (318 लीटर) तेल को ठिकाने लगाने की तैयारी कर रहा था। इसके लिए उसने चार सौ रुपये किराये पर एक ऑटो आनंद मार्केट के पास मंगवाया हुआ था और इस पर चोरी का तेल लादकर कबाड़ी बाजार की ओर जाना था। जैसे ही सहायक ने कमरे में छिपाकर रखा तेल बाहर निकाला, तभी टीम ने रंगे हाथों पकड़ लिया और सहायक व चोरी के तेल को मिलिट्री पुलिस के हवाले कर दिया। उसके पास तेल ले जाने का न तो कोई परमिट था और न ही कोई गेट पास। टीम ने ऑटो चालक से भी पूछताछ की, जिसमें उसने कबूल लिया कि उसे 400 रुपये में हायर किया गया है और उसे तेल कबाड़ी बाजार की ओर ले जाने को कहा गया था।
पूछताछ के दौरान सहायक ने भी खुलासा कर दिया कि उसे तेल ठिकाने लगाने को एक जेई ने कहा था। बाद में ये बात भी सामने आ गई कि संबंधित जेई ने सेना के डिपो से करीबन तीन हजार लीटर तेल की सप्लाई ली थी, जिसे आगे सेना के विभिन्न दफ्तरों व यूनिटों में सप्लाई किया जाना था। लेकिन उसमें से दो बैरल तेल अलग वहीं एमईएस दफ्तर के पास सब स्टेशन के कमरे में छिपाकर रख दिया गया था। उधर, इस मामले में सीएमपी ने सभी आरोपियों के बयान दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।