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Ambala News: मानदेय के लिए मिड डे मील वर्कर्स का प्रदर्शन
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जिला शिक्षा सदन में डीईईओ के कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करती मिड डे मील वर्कर्स।
अंबाला सिटी। जिला के सरकारी स्कूलों में दोपहर का भोजन बनाने वाली मिड डे मील वर्कर्स ने महीनों से मानदेय नहीं मिलने पर जिला शिक्षा सदन में प्रदर्शन कर नाराजगी जताई। मिड डे मील वर्कर्स यूनियन संबंधित सीआईटीयू की प्रधान ललिता और सचिव सोनिया ने कहा कि जिला में कुल 1440 वर्कर्स स्कूलों में खाना बनाती है।
इनमें प्राइमरी स्कूलों की 879 वर्कर्स को मार्च से मई तक तीन महीने और अपर प्राइमरी स्कूलों की 561 वर्कर्स को अप्रैल और मई दो महीनों का मानदेय अभी तक नहीं मिला है। जिससे वर्कर्स को उधार लेकर घर का गुजारा करना पड़ रहा है। इस बारे कार्यालय में कई बार संपर्क किया, परंतु अधिकारी टालमटोल कर रहे है।
कभी केंद्र सरकार से शेयर न आने की बात करते है तो कभी आडिट का बहाना बनाते है। इन हालात में मजबूर होकर वर्कर्स को प्रदर्शन करना पड़ा है। गुस्साई वर्कर्स डीईईओ के कमरे के सामने ही धरने पर बैठ गई।
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सीआईटीयू के जिला सचिव सतीश सेठी ने कहा कि मिड डे मील वर्कर्स को साल के 12 महीनों की बजाए केवल 10 महीने का मिलता है। ऊपर से इस कम वेतन को लेने के लिए भी बार-बार आंदोलन करना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि जल्द वर्कर्स के बकाया वेतन का भुगतान किया जाए। सरकार वर्कर्स की मुख्य मांग न्यूनतम वेतन 26 हजार व सरकारी कर्मचारी का दर्जा जल्द लागू किया जाए। इस पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा ने यूनियन पदाधिकारियों को बुलाकर बताया कि उनकी मुख्यालय में बात हुई है। दो जुलाई तक सभी वर्कर्स का वेतन उनके खाते में जमा करवा दिया जाएगा।
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इनमें प्राइमरी स्कूलों की 879 वर्कर्स को मार्च से मई तक तीन महीने और अपर प्राइमरी स्कूलों की 561 वर्कर्स को अप्रैल और मई दो महीनों का मानदेय अभी तक नहीं मिला है। जिससे वर्कर्स को उधार लेकर घर का गुजारा करना पड़ रहा है। इस बारे कार्यालय में कई बार संपर्क किया, परंतु अधिकारी टालमटोल कर रहे है।
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कभी केंद्र सरकार से शेयर न आने की बात करते है तो कभी आडिट का बहाना बनाते है। इन हालात में मजबूर होकर वर्कर्स को प्रदर्शन करना पड़ा है। गुस्साई वर्कर्स डीईईओ के कमरे के सामने ही धरने पर बैठ गई।
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सीआईटीयू के जिला सचिव सतीश सेठी ने कहा कि मिड डे मील वर्कर्स को साल के 12 महीनों की बजाए केवल 10 महीने का मिलता है। ऊपर से इस कम वेतन को लेने के लिए भी बार-बार आंदोलन करना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि जल्द वर्कर्स के बकाया वेतन का भुगतान किया जाए। सरकार वर्कर्स की मुख्य मांग न्यूनतम वेतन 26 हजार व सरकारी कर्मचारी का दर्जा जल्द लागू किया जाए। इस पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा ने यूनियन पदाधिकारियों को बुलाकर बताया कि उनकी मुख्यालय में बात हुई है। दो जुलाई तक सभी वर्कर्स का वेतन उनके खाते में जमा करवा दिया जाएगा।