अंबाला। कैदियों को अनुशासनप्रिय नागरिक बनाने के लिए केंद्रीय जेल अंबाला में बुधवार को जेलों को स्कूल में बदलना एक कदम जीवन की ओर कार्यक्रम की शुरूआत की गई। हरियाणा के जेल महानिदेशक मोहम्मद अकिल, आईपीएस के निर्देश अनुसार शुरू किए गए इस कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. विनीत भार्गव, सीईओ, पब्लिक हेल्थ एम्पावरमेंट एंड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (फेरो), नई दिल्ली ने की। उन्होंने कैदियों को कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए कहा कि दुख इंसान में चेतना पैदा करने का एक अवसर है। दुख को चेतना जगाने के लिए एक अवसर के रूप में बदला जाए, ताकि उनमें जीवन की नई संभावना और सकारात्मक दृष्टिकोण पैदा हो सके।
डॉ. भार्गव ने कहा कि यह कार्यक्रम कार्यक्रम के अंदर पैदा हुए तनाव, कुंठा, निराशा, नशा, आत्महत्या, मारपीट आदि घटनाओं को कम करने में उपयोगी साबित होगा। कैदियों को जेलों में व्यवस्थित व सुनियोजित दिनचर्या के लिए ऐसे कार्यक्रम जरूरी हैं। कैदी एक समयबद्ध दैनिक प्रक्रिया का पालन करते हुए अपनी दिनचर्या को पूरा करेंगे यही इस कार्यक्रम की विशेषता है। यह कार्यक्रम फरीदाबाद और गुरुग्राम जेल में पहले से चल रहा है। केंद्रीय जेल अंबाला के अधीक्षक लखबीर सिंह बराड़ ने बताया कि इस व्यवस्था से कैदी अनुशासन में रहकर समय का सदुपयोग कर पाएंगे। इस मौके पर डॉ. शुभम, डॉ. राजीव व श्रीमती नीलम आदि मौजूद रहे।