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Ambala News: मुश्किल राह पर चलकर टॉपर बनी माही
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नारायणगढ़ के तलहेड़ी
नारायणगढ़। हरियाणा बोर्ड की दसवीं कक्षा की परीक्षा में प्रदेश में पहला स्थान पाने वाली माही ने यह मुकाम काफी संघर्ष के बाद पाया। माही को पढ़ाई के लिए गांव से दूर स्कूल में दाखिला लेना पड़ा। इसके लिए उसे गड्ढायुक्त सड़कों को पार करना पड़ता था। ये मुश्किल बारिश के दिनों में और बढ़ जाती थी।
इन सभी परेशानियों के बावजूद माही के मन में बस एक ही बात आती थी कि हालात तो बदल जाएंगे, रह जाएगा तो सिर्फ सफलता और सफर का आनंद। यही सोचकर अब नारायणगढ़ के डीएवी स्कूल में माही ने पढ़ाई शुरू की। वह बताती हैं कि वह डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहती हैं। ऐसा इसलिए नहीं कि किसी को देखकर प्रेरणा मिली हो, बल्कि किसी की जान बचाना, वह सबसे बड़ा काम मानती हैं।
गांव तक सड़क पर कई जगह गड्ढे
माही का गांव तलहेड़ी जट्टां नारायणगढ़ हलके में आता है। यहां से कुछ ही दूरी पर सीएम नायब सैनी का गांव मिर्जापुर माजरा भी है। इसके बावजूद गांव की एकल सड़क पर कई स्थानों पर गड्ढे हैं। इनसे रोजाना माही की स्कूल की बस गुजरती थी। अब वह डीएवी स्कूल में हैं तो यहां जाने के लिए भी उन्हें बस का ही सहारा लेना पड़ता है। माही के गांव में सरकारी स्कूल तो है मगर अच्छी शिक्षा प्राप्त करने को बच्चों को पांच से छह किलोमीटर दूर निजी स्कूलों में पढ़ने के जाना पड़ता है। बच्चों को लेने के लिए बस आती है। अवकाश के बाद माही को घर तक पहुंचने में दो से तीन घंटे तक का समय लगता है।
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सामान खरीदने भी जाना पड़ता है दूर
माही के दादा बताते हैं कि उनका गांव काफी अच्छा और शांत है। मगर यहां से कोई सामान लेना होगा तो पांच किलोमीटर दूर बाजार जाना पड़ता है। इस कारण से कई बार एक दिन में मजबूरन दो से तीन बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। अन्यथा कोई शहर से आ रहा हो तो उसे याद दिलाना पड़ता है कि सामान लेकर आना। इन सभी चुनौतियों के बावजूद परिवार ने माही की तैयारी के लिए कोई कोसर नहीं छोड़ी। माही बताती हैं कि वह स्कूल से आने के बाद दोपहर का भोजन और कुछ देर आराम करती थी। इसके बाद शाम पांच बजे से रात्रि एक बजे तक पढ़ाई में जुट जातीं। बीच में रात्रि भोजन के लिए ही समय निकालती थी। यही मेहनत आगे भी जारी रखेंगे। उन्हें एक निजी कोचिंग संस्थान से नीट की तैयारी में मदद करने का ऑफर भी मिला है। माही के पिता गुरजीत सिंह अमेरिका में हैं। उन्होंने जब बेटी से बात की और परीक्षा परिणाम सुना तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
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इन सभी परेशानियों के बावजूद माही के मन में बस एक ही बात आती थी कि हालात तो बदल जाएंगे, रह जाएगा तो सिर्फ सफलता और सफर का आनंद। यही सोचकर अब नारायणगढ़ के डीएवी स्कूल में माही ने पढ़ाई शुरू की। वह बताती हैं कि वह डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहती हैं। ऐसा इसलिए नहीं कि किसी को देखकर प्रेरणा मिली हो, बल्कि किसी की जान बचाना, वह सबसे बड़ा काम मानती हैं।
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गांव तक सड़क पर कई जगह गड्ढे
माही का गांव तलहेड़ी जट्टां नारायणगढ़ हलके में आता है। यहां से कुछ ही दूरी पर सीएम नायब सैनी का गांव मिर्जापुर माजरा भी है। इसके बावजूद गांव की एकल सड़क पर कई स्थानों पर गड्ढे हैं। इनसे रोजाना माही की स्कूल की बस गुजरती थी। अब वह डीएवी स्कूल में हैं तो यहां जाने के लिए भी उन्हें बस का ही सहारा लेना पड़ता है। माही के गांव में सरकारी स्कूल तो है मगर अच्छी शिक्षा प्राप्त करने को बच्चों को पांच से छह किलोमीटर दूर निजी स्कूलों में पढ़ने के जाना पड़ता है। बच्चों को लेने के लिए बस आती है। अवकाश के बाद माही को घर तक पहुंचने में दो से तीन घंटे तक का समय लगता है।
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सामान खरीदने भी जाना पड़ता है दूर
माही के दादा बताते हैं कि उनका गांव काफी अच्छा और शांत है। मगर यहां से कोई सामान लेना होगा तो पांच किलोमीटर दूर बाजार जाना पड़ता है। इस कारण से कई बार एक दिन में मजबूरन दो से तीन बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। अन्यथा कोई शहर से आ रहा हो तो उसे याद दिलाना पड़ता है कि सामान लेकर आना। इन सभी चुनौतियों के बावजूद परिवार ने माही की तैयारी के लिए कोई कोसर नहीं छोड़ी। माही बताती हैं कि वह स्कूल से आने के बाद दोपहर का भोजन और कुछ देर आराम करती थी। इसके बाद शाम पांच बजे से रात्रि एक बजे तक पढ़ाई में जुट जातीं। बीच में रात्रि भोजन के लिए ही समय निकालती थी। यही मेहनत आगे भी जारी रखेंगे। उन्हें एक निजी कोचिंग संस्थान से नीट की तैयारी में मदद करने का ऑफर भी मिला है। माही के पिता गुरजीत सिंह अमेरिका में हैं। उन्होंने जब बेटी से बात की और परीक्षा परिणाम सुना तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

नारायणगढ़ के तलहेड़ी