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गिर रहा जलस्तर, सैन्य क्षेत्र में हैंडपंपों का सहारा
अमर उजाला/ब्यूरो/अंबाला
Updated Sun, 10 Jul 2016 12:52 AM IST
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हैंडपंप से पानी पीते बच्चे
- फोटो : amar ujala
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भले ही अंबाला का कैंटोनमेंट एरिया स्मार्ट सिटी की ओर अग्रसर होने की तैयारी कर रहा है। लेकिन इस सैन्य क्षेत्र की बड़ी आबादी आज भी स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रही है। सैन्य क्षेत्र में पानी की यही किल्लत न केवल लोगों की बड़ी परेशानी बन चुकी है, बल्कि कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला (सीबीए) के सभी आठ वार्डों के पार्षद सदस्यों, सीबीए अफसरों व सैन्य अफसरों की बड़ी चिंता का विषय भी बन चुकी है।
सैन्य व सीबीए अफसर पेयजल संकट को एक चुनौती की तरह देख रहे हैं। पूरा तंत्र इस वक्त इसी माथापच्ची में हैं कि स्मार्ट कैंटोनमेंट की शुरुआत से पहले पेयजल संकट की इस चुनौती से कैसे निपटा जाए, वो भी ऐसी स्थिति में जब सैन्य क्षेत्र का जलस्तर लगातार नीचे गिर रहा है।
आबादी को जितना पानी चाहिए, आधा भी नसीब नहीं
दरअसल, पूरा कैंटोनमेंट एरिया आठ वार्डों में बंटा हुआ है और यहां की आबाद भी साठ हजार के करीब है। यहां पेयजल सप्लाई की दो तरह की व्यवस्था है। पहली व्यवस्था के चलते मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसस (एमईएस) कुछ इलाके को पेयजल सप्लाई करती है, जबकि दूसरी व्यवस्था में सीबीए अपने संसाधनों के जरिये पेयजल सप्लाई करता है। लेकिन सीबीए का दावा है कि वे अपने क्षेत्र की आबादी को पर्याप्त पानी उपलब्ध करवा ही नहीं पा रहा है, क्योंकि उनकी आबादी आज भी नहरी पानी की पहुंच से दूर है।
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एमईएस ने नहरी पानी योजना के तहत बड़े-बड़े टैंक बना लिए है, जहां नहरी पानी को स्टोर व ट्रीटमेंट कर सैन्य क्षेत्र के कुछ हिस्से को ही सप्लाई किया जाता है। लेकिन कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला के अंर्तगत पडने वाली बड़ी आबादी इस नहरी पानी से वंचित है। सीबीएस अफसरों के अनुसार हालांकि उन्होंने एमईएस को इस योजना के तहत सालों पहले लाखों रुपये भी दे रखें है, ताकि नहरी पानी का लाभ सीबीए की आबादी को भी मिले, लेकिन आज तक सीबीए क्षेत्र के लिए नहरी पानी उपलब्ध करवाने की ये योजना फाइलों में ही दफन है।
यही वजह है कि सीबीए क्षेत्र की बड़ी आबादी आज भी पर्याप्त पेयजल को तरस रही है। जानकारी के अनुसार आबादी को रोजाना 25 लाख गैलन पानी की आवश्यकता है, लेकिन इस जरूरत का आधा पानी भी आबादी को नसीब नहीं हो पा रहा है। स्थिति यह है कि वार्डों के करीबन आठ ट्यूबवेलों में से भी अधिकतर जलस्तर नीचे जाने की वजह से ठप होने की कगार पर पहुंच चुके हैं।
हैरानी! आज भी हैंडपंपों के सहारे प्यास
सैन्य क्षेत्र में बड़ी हैरानी की बात यह है कि आज भी सीबीए के विभिन्न वार्डों में लोग हैंडपंपों के सहारे हैं। अफसर व जनप्रतिनिधि कहते हैं कि इन हैंडपंपों का पानी पीने के लिए नहीं दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन हकीकत यह है कि पेयजल किल्लत से जूझ रही अधिकतर आबादी मजबूरन इन हैंडपंपों का खारा पानी पीने को मजबूर है। क्योंकि कई बार ट्यूबवेल खराब, बिजली कट व अन्य दिक्कत की वजह से हैंडपंप का खारा पानी ही आबादी का सहारा बनता है।
इसी को देखते हुए सीबीए सदन की बैठक में सैन्य अफसरों, सीबीए अफसरों व बोर्ड के चयनित व मनोनीत पार्षद सदस्यों ने और हैंडपंप लगाने के लिए 340000 रुपये पास किए हैं। जबकि इस राशि से कुछेक हैंडपंपों की मरम्मत भी करनी है, ताकि इस विषम परिस्थितियों में पानी के लिए ये हैंडपंप लोगों का सहारा बने रहें।
अब भूमिगत बचाने की जद्दोजहद
सैन्य क्षेत्र में विभिन्न जगहों पर ग्राउंड वाटर आठ सौ से एक हजार फीट नीचे तक पहुंच गया है। इसलिए सैन्य व सीबीए अफसर ग्राउंड वाटर रिचार्ज की ओर ध्यान दे रहे हैं। इसके लिए जहां तोपखाना समेत दो जगहों पर डिग्गियों को साफ करवाया जा रहा है, ताकि बरसाती पानी को यहां स्टोर किया जा सके, ताकि इससे आसपास के इलाके का भूमिगत जलस्तर सुधरे। दूसरा, सैन्य अफसर स्कूलों में प्रतियोगिताओं व वार्डों में पार्षद सदस्यों की मदद से नुक्कड़ सभाओं का आयोजन कर लोगों को जलसंरक्षण का महत्व समझाने हेतु अभियान चलाए का भी खाका तैयार कर रहे हैं। साथ ही सैन्य क्षेत्र में विभिन्न सार्वजनिक स्थानों व सड़कों किनारे जल संरक्षण के जागरूकता संबंधी छोटे होर्डिंग्स भी लगाए जाएंगे।
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लाखों रुपये देकर भी नहीं मिला नहरी पानी
उल्लेखनीय है कि सन 1987-88 में कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला लगभग 37 लाख रुपये नहरी पानी के लिए एमईएस को जमा करवा चुका है, लेकिन उसके बावजूद आजतक सीबीए को न तो अपने रुपये वापस मिले और न ही नहरी पानी। सीबीए के पूर्व पार्षद उमेश बिट्टू व सिम्मी साहनी के अनुसार सीबीए अफसरों को चाहिए कि वे एमईएस पर दबाव बनाकर या तो अपनी आबादी के लिए नहरी पानी लें या फिर ब्याज समेत अपनी राशि वापस लें। क्योंकि इस वक्त सैन्य क्षेत्र में पेयजल संकट के हालात चल रहे हैं, लोगों को पर्याप्त और स्वच्छ पानी चाहिए। उधर, पूर्व पार्षद राजकुमार तोपखाना व ललित कुमार कहते हैं कि वे इस बारे में जल्द ही स्वस्थ्य मंत्री अनिल विज से मिलेंगे और उनसे सीबीए क्षेत्र को नहरी पानी दिलावने की मांग करेंगे।
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पार्षद बोले पानी किल्लत न रहे
वार्ड में पेयजल किल्लत है। आज भी लोगों को हैंडपंपों के खारे पानी का इस्तेमाल करना पड़ता है। लोग खारा पानी पीने को मजबूर हैं। लोग सैन्य प्रशासन से स्वच्छ पानी की दरकार रखते हैं।
-लक्ष्मी देवी, पार्षद वार्ड एक, सीबीए
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जलस्तर बहुत ज्यादा नीचे जा रहा है। इससे ट्यूबवेल सिस्टम को खतरा है। सीबीए क्षेत्र को भी नहरी पानी चाहिए, ताकि पेयजल किल्लत पूरी तरह से खत्म हो। इस बारे में मंत्री अनिल विज से बात की जाएगी।
-आशिमा, पार्षद वार्ड दो, सीबीए
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स्वच्छ पानी की उपलब्धता बहुत बड़ी चुनौती है। एक ट्यूबवेल वार्ड में लगवाया जा रहा है। वार्ड में एक ओवरहेड वाटर टैंक भी बनवाया जा रहा है। इसमें पानी को स्टोर करके रखा जाएगा। इस वक्त लोगों को स्वच्छ और पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाना बड़ी चुनौती है। हम स्मार्ट कैंटोनमेंट में इस तरह की दिक्तत बिल्कुल नहीं चाहते।
-अजय बवेजा, पार्षद वार्ड तीन, सीबीए
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क्षेत्र में काफी लोग हैंडपंप का खारा पानी पीने को मजबूर हैं। वार्ड नंबर तीन में एक ट्यूबवेल लगाया जा रहा है, शायद कुछ राहत मिल जाए। लेकिन सीबीए क्षेत्र को उसके हिस्से को नहरी पानी मिलना चाहिए, क्योंकि सीबीए ने इसके लिए सालों पहले लाखों रुपये जमा करवा रखे हैं।
- राजू बाली, पार्षद वार्ड चार, सीबीए
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पानी सप्लाई को लेकर सैन्य क्षेत्र में ही लोगों के लिए साथ भेदभाव किया जा रहा है। एमईएस अपने हिस्से की आबादी को तो ट्यूबवेल व नहरी पानी उपलब्ध करवाता है, लेकिन सीबीए की आबादी को नहरी पानी से वंचित रखा जाता है, जिसके लिए सीबीए पहले ही लाखों रुपये दे चुका है। यहां लोग हैंडपंपों के सहारे चल रहे हैं, ये बहुत गंभीर बात है।
- सुरेंद्र तिवारी, उपाध्यक्ष एवं पार्षद वार्ड पांच, सीबीए
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क्षेत्र में पेयजल किल्लत बड़ी समस्या है। स्मार्ट कैंटोनमेंट से पहले इस समस्या को पूरी तरह से दूर करना होगा। वरना जनता उनसे पूछेगी कि पेयजल संकट के साथ ये कौन का स्मार्ट कैंटोनमेंट बनाया जा रहा है।
-वीरेंद्र गांधी, पार्षद वार्ड छह, सीबीए
मेरे वार्ड में कई इलाके ऐसे हैं, जो बरसों से पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं, लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। इधर-उधर स्वच्छ पेयजल के लिए उन्हे भटकना पड़ता है। कई बार सीबीए सदन में इस समस्या को उठा चुका है, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिला।
-गरीब दास, पार्षद वार्ड सात, सीबीए
वार्डों में पानी की सप्लाई पूरी तरह से सुचारु होनी चाहिए। लोगों को समय पर पर्याप्त और स्वच्छ पानी चाहिए। अफसर इस पर माथापच्ची तो कर रहे हैं, उम्मीद है रिजल्ट सकारात्मक ही रहेंगे।
- नीलम रानी, पार्षद वार्ड आठ, सीबीए
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कैंटोनमेंट बोर्ड में पेयजल संकट को लेकर विचार विमर्श चल रहा है। दरअसल, भूमिगत जलस्तर का गिरना एक बड़ी चुनौती है। इसलिए भूमिगत जल को रिचार्ज करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। कुछ ट्यूबवेल भी सेक्शन हुए हैं, उन्हें भी लगाए जाएंगे, कुछ नए हैंडपंप व पुरानों की मरम्मत के लिए भी फंड पास किया गया है। पूरी उम्मीद है कि स्मार्ट कैंटोनमेंट पेयजल किल्लत से मुक्त बनेगा। लेकिन इसके लिए पार्षद और जनता को भी अपना सहयोग देते हुए जलसंरक्षण पर जोर देना होगा।
-वरुण कालिया, चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर, सीबीए
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सैन्य व सीबीए अफसर पेयजल संकट को एक चुनौती की तरह देख रहे हैं। पूरा तंत्र इस वक्त इसी माथापच्ची में हैं कि स्मार्ट कैंटोनमेंट की शुरुआत से पहले पेयजल संकट की इस चुनौती से कैसे निपटा जाए, वो भी ऐसी स्थिति में जब सैन्य क्षेत्र का जलस्तर लगातार नीचे गिर रहा है।
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आबादी को जितना पानी चाहिए, आधा भी नसीब नहीं
दरअसल, पूरा कैंटोनमेंट एरिया आठ वार्डों में बंटा हुआ है और यहां की आबाद भी साठ हजार के करीब है। यहां पेयजल सप्लाई की दो तरह की व्यवस्था है। पहली व्यवस्था के चलते मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसस (एमईएस) कुछ इलाके को पेयजल सप्लाई करती है, जबकि दूसरी व्यवस्था में सीबीए अपने संसाधनों के जरिये पेयजल सप्लाई करता है। लेकिन सीबीए का दावा है कि वे अपने क्षेत्र की आबादी को पर्याप्त पानी उपलब्ध करवा ही नहीं पा रहा है, क्योंकि उनकी आबादी आज भी नहरी पानी की पहुंच से दूर है।
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एमईएस ने नहरी पानी योजना के तहत बड़े-बड़े टैंक बना लिए है, जहां नहरी पानी को स्टोर व ट्रीटमेंट कर सैन्य क्षेत्र के कुछ हिस्से को ही सप्लाई किया जाता है। लेकिन कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला के अंर्तगत पडने वाली बड़ी आबादी इस नहरी पानी से वंचित है। सीबीएस अफसरों के अनुसार हालांकि उन्होंने एमईएस को इस योजना के तहत सालों पहले लाखों रुपये भी दे रखें है, ताकि नहरी पानी का लाभ सीबीए की आबादी को भी मिले, लेकिन आज तक सीबीए क्षेत्र के लिए नहरी पानी उपलब्ध करवाने की ये योजना फाइलों में ही दफन है।
यही वजह है कि सीबीए क्षेत्र की बड़ी आबादी आज भी पर्याप्त पेयजल को तरस रही है। जानकारी के अनुसार आबादी को रोजाना 25 लाख गैलन पानी की आवश्यकता है, लेकिन इस जरूरत का आधा पानी भी आबादी को नसीब नहीं हो पा रहा है। स्थिति यह है कि वार्डों के करीबन आठ ट्यूबवेलों में से भी अधिकतर जलस्तर नीचे जाने की वजह से ठप होने की कगार पर पहुंच चुके हैं।
हैरानी! आज भी हैंडपंपों के सहारे प्यास
सैन्य क्षेत्र में बड़ी हैरानी की बात यह है कि आज भी सीबीए के विभिन्न वार्डों में लोग हैंडपंपों के सहारे हैं। अफसर व जनप्रतिनिधि कहते हैं कि इन हैंडपंपों का पानी पीने के लिए नहीं दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन हकीकत यह है कि पेयजल किल्लत से जूझ रही अधिकतर आबादी मजबूरन इन हैंडपंपों का खारा पानी पीने को मजबूर है। क्योंकि कई बार ट्यूबवेल खराब, बिजली कट व अन्य दिक्कत की वजह से हैंडपंप का खारा पानी ही आबादी का सहारा बनता है।
इसी को देखते हुए सीबीए सदन की बैठक में सैन्य अफसरों, सीबीए अफसरों व बोर्ड के चयनित व मनोनीत पार्षद सदस्यों ने और हैंडपंप लगाने के लिए 340000 रुपये पास किए हैं। जबकि इस राशि से कुछेक हैंडपंपों की मरम्मत भी करनी है, ताकि इस विषम परिस्थितियों में पानी के लिए ये हैंडपंप लोगों का सहारा बने रहें।
अब भूमिगत बचाने की जद्दोजहद
सैन्य क्षेत्र में विभिन्न जगहों पर ग्राउंड वाटर आठ सौ से एक हजार फीट नीचे तक पहुंच गया है। इसलिए सैन्य व सीबीए अफसर ग्राउंड वाटर रिचार्ज की ओर ध्यान दे रहे हैं। इसके लिए जहां तोपखाना समेत दो जगहों पर डिग्गियों को साफ करवाया जा रहा है, ताकि बरसाती पानी को यहां स्टोर किया जा सके, ताकि इससे आसपास के इलाके का भूमिगत जलस्तर सुधरे। दूसरा, सैन्य अफसर स्कूलों में प्रतियोगिताओं व वार्डों में पार्षद सदस्यों की मदद से नुक्कड़ सभाओं का आयोजन कर लोगों को जलसंरक्षण का महत्व समझाने हेतु अभियान चलाए का भी खाका तैयार कर रहे हैं। साथ ही सैन्य क्षेत्र में विभिन्न सार्वजनिक स्थानों व सड़कों किनारे जल संरक्षण के जागरूकता संबंधी छोटे होर्डिंग्स भी लगाए जाएंगे।
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लाखों रुपये देकर भी नहीं मिला नहरी पानी
उल्लेखनीय है कि सन 1987-88 में कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला लगभग 37 लाख रुपये नहरी पानी के लिए एमईएस को जमा करवा चुका है, लेकिन उसके बावजूद आजतक सीबीए को न तो अपने रुपये वापस मिले और न ही नहरी पानी। सीबीए के पूर्व पार्षद उमेश बिट्टू व सिम्मी साहनी के अनुसार सीबीए अफसरों को चाहिए कि वे एमईएस पर दबाव बनाकर या तो अपनी आबादी के लिए नहरी पानी लें या फिर ब्याज समेत अपनी राशि वापस लें। क्योंकि इस वक्त सैन्य क्षेत्र में पेयजल संकट के हालात चल रहे हैं, लोगों को पर्याप्त और स्वच्छ पानी चाहिए। उधर, पूर्व पार्षद राजकुमार तोपखाना व ललित कुमार कहते हैं कि वे इस बारे में जल्द ही स्वस्थ्य मंत्री अनिल विज से मिलेंगे और उनसे सीबीए क्षेत्र को नहरी पानी दिलावने की मांग करेंगे।
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पार्षद बोले पानी किल्लत न रहे
वार्ड में पेयजल किल्लत है। आज भी लोगों को हैंडपंपों के खारे पानी का इस्तेमाल करना पड़ता है। लोग खारा पानी पीने को मजबूर हैं। लोग सैन्य प्रशासन से स्वच्छ पानी की दरकार रखते हैं।
-लक्ष्मी देवी, पार्षद वार्ड एक, सीबीए
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जलस्तर बहुत ज्यादा नीचे जा रहा है। इससे ट्यूबवेल सिस्टम को खतरा है। सीबीए क्षेत्र को भी नहरी पानी चाहिए, ताकि पेयजल किल्लत पूरी तरह से खत्म हो। इस बारे में मंत्री अनिल विज से बात की जाएगी।
-आशिमा, पार्षद वार्ड दो, सीबीए
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स्वच्छ पानी की उपलब्धता बहुत बड़ी चुनौती है। एक ट्यूबवेल वार्ड में लगवाया जा रहा है। वार्ड में एक ओवरहेड वाटर टैंक भी बनवाया जा रहा है। इसमें पानी को स्टोर करके रखा जाएगा। इस वक्त लोगों को स्वच्छ और पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाना बड़ी चुनौती है। हम स्मार्ट कैंटोनमेंट में इस तरह की दिक्तत बिल्कुल नहीं चाहते।
-अजय बवेजा, पार्षद वार्ड तीन, सीबीए
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क्षेत्र में काफी लोग हैंडपंप का खारा पानी पीने को मजबूर हैं। वार्ड नंबर तीन में एक ट्यूबवेल लगाया जा रहा है, शायद कुछ राहत मिल जाए। लेकिन सीबीए क्षेत्र को उसके हिस्से को नहरी पानी मिलना चाहिए, क्योंकि सीबीए ने इसके लिए सालों पहले लाखों रुपये जमा करवा रखे हैं।
- राजू बाली, पार्षद वार्ड चार, सीबीए
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पानी सप्लाई को लेकर सैन्य क्षेत्र में ही लोगों के लिए साथ भेदभाव किया जा रहा है। एमईएस अपने हिस्से की आबादी को तो ट्यूबवेल व नहरी पानी उपलब्ध करवाता है, लेकिन सीबीए की आबादी को नहरी पानी से वंचित रखा जाता है, जिसके लिए सीबीए पहले ही लाखों रुपये दे चुका है। यहां लोग हैंडपंपों के सहारे चल रहे हैं, ये बहुत गंभीर बात है।
- सुरेंद्र तिवारी, उपाध्यक्ष एवं पार्षद वार्ड पांच, सीबीए
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क्षेत्र में पेयजल किल्लत बड़ी समस्या है। स्मार्ट कैंटोनमेंट से पहले इस समस्या को पूरी तरह से दूर करना होगा। वरना जनता उनसे पूछेगी कि पेयजल संकट के साथ ये कौन का स्मार्ट कैंटोनमेंट बनाया जा रहा है।
-वीरेंद्र गांधी, पार्षद वार्ड छह, सीबीए
मेरे वार्ड में कई इलाके ऐसे हैं, जो बरसों से पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं, लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। इधर-उधर स्वच्छ पेयजल के लिए उन्हे भटकना पड़ता है। कई बार सीबीए सदन में इस समस्या को उठा चुका है, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिला।
-गरीब दास, पार्षद वार्ड सात, सीबीए
वार्डों में पानी की सप्लाई पूरी तरह से सुचारु होनी चाहिए। लोगों को समय पर पर्याप्त और स्वच्छ पानी चाहिए। अफसर इस पर माथापच्ची तो कर रहे हैं, उम्मीद है रिजल्ट सकारात्मक ही रहेंगे।
- नीलम रानी, पार्षद वार्ड आठ, सीबीए
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कैंटोनमेंट बोर्ड में पेयजल संकट को लेकर विचार विमर्श चल रहा है। दरअसल, भूमिगत जलस्तर का गिरना एक बड़ी चुनौती है। इसलिए भूमिगत जल को रिचार्ज करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। कुछ ट्यूबवेल भी सेक्शन हुए हैं, उन्हें भी लगाए जाएंगे, कुछ नए हैंडपंप व पुरानों की मरम्मत के लिए भी फंड पास किया गया है। पूरी उम्मीद है कि स्मार्ट कैंटोनमेंट पेयजल किल्लत से मुक्त बनेगा। लेकिन इसके लिए पार्षद और जनता को भी अपना सहयोग देते हुए जलसंरक्षण पर जोर देना होगा।
-वरुण कालिया, चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर, सीबीए