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पार्वती के दृढ़ प्रेम का वृत्तांत सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुए भगवान शिव : पंडित भगवती प्रसाद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Mar 2022 12:25 AM IST
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Lord Shiva was very pleased to hear the story of Parvati's strong love: Pandit Bhagwati Prasad
अंबाला सिटी। सेक्टर सात स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में चल रहा सामूहिक संगीतमय 108 रामायण पाठ रविवार को तीसरे दिन में प्रवेश हुआ। मंदिर के पुरोहित पंडित भगवती प्रसाद ने श्रीरामचरित मानस पाठ का शुभारंभ किया। पंडित भगवती प्रसाद ने कथा का व्याख्यान करते हुए कहा कि मां सती ने एक दिन कैलाशवासी शिव के दर्शन किए और वह उनके प्रेम में पड़ गई। इसके बाद सती ने प्रजापति दक्ष की इच्छा के विरुद्ध भगवान शिव से विवाह कर लिया।
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उन्होंने कहा कि मैनावती और हिमवान को कोई कन्या नहीं थी। उन्होंने आदिशक्ति की अराधना की। आदिशक्ति माता सती ने उन्हें उनके यहां कन्या के रूप में जन्म लेने का वरदान दिया। दोनों ने उस कन्या का नाम पार्वती रखा। जिसका अथ है पर्वतों की रानी। इसी को गिरिजा, शैलपुत्री और पहाड़ों वाली रानी कहा जाता है। सती के आत्मदाह के उपरांत विश्व शक्तिहीन हो गया।
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शिव को शक्तिहीन और पत्नी हीन देखकर तारक आदि दैत्य प्रसन्न थे। देवता देवी की शरण में गए। देवी ने हिमालय अर्थात हिमवान की एकांत साधना से प्रसन्न होकर देवताओं से कहा कि हिमवान के घर में मेरी शक्ति गौरी के रूप में जन्म लेगी। मां पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए देव ऋषि के कहने पर वन में तपस्या करने चली गईं। भगवान शंकर ने पार्वती के प्रेम की परीक्षा लेने के लिए सप्त ऋषियों को पार्वती के पास भेजा। सप्त ऋषियों ने पार्वती के पास जाकर उन्हें हर तरह से यह समझाने का प्रयास किया कि शिव औघड़, अमंगल वेषभूषा धारी और जटाधारी हैं। तुम राजा की पुत्री हो, तुम्हारे लिए वह योग्य वर नहीं हैं। उनके साथ विवाह करके तुम्हें कभी सुख की प्राप्ति नहीं होगी। तुम उनका ध्यान छोड़ दो।
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अनेक यत्न करने के बाद भी पार्वती दृढ़ रहीं। उनकी दृढ़ता को देखकर सप्तऋषि अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने पार्वती को सफल मनोरथ होने का आशीर्वाद दिया। वह भगवान शिवजी के पास वापस आ गए। सप्त ऋषियों से पार्वती के अपने प्रति दृढ़ प्रेम का वृत्तांत सुनकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए। सप्त ऋषियों ने शिवजी और पार्वती के विवाह का लग्न मुहूर्त आदि निश्चित कर दिया। इसी प्रसंग के साथ कथा को विराम दिया गया। इस मौके पर पंडित भगवती प्रसाद ने कहा कि कथा प्रतिदिन जारी रहेगी और करीब एक महीने बाद राम नवमी के अवसर पर विधिपूर्वक समाप्त की जाएगी। इससे पहले सेक्टर सात निवासी मक्कड़ परिवार की ओर से भगवान श्रीराम की विशेष आरती करवाई गई और प्रसाद की सेवा भी की गई।
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