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Ambala News: ड्यूटी पर लोको पायलट और गार्ड नहीं ले सकेंगे एल्कोहल
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अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन की क्रू लॉबी में लगे सिस्टम पर बॉयोमेट्रिक हाजिरी लगाता गार्ड। संवाद
अंबाला। ट्रेनों के संचालन से जुड़े लोको पायलट और गार्ड ड्यूटी पर एल्कोहल का सेवन नहीं करेंगे। उन्हें पहले लोको पायलट नियंत्रण प्रबंधन प्रणाली की कड़ी जांच से गुजरना होगा। इस प्रणाली के तहत एक ही मशीन में बॉयोमीट्रिक हाजिरी से लेकर ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण शामिल किया है।
इसके माध्यम से ही रेलवे कर्मचारी के नशे में होने का प्रमाण मिलेगा और ऐसा होने पर उसे ट्रेन संचालन से रोका जा सकेगा। इस प्रणाली को अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन की लोको लॉबी में स्थापित किया गया है। इसके अलावा अब विशेष टीमें बीच रास्ते के स्टेशनों पर भी इंजन में चढ़कर लोको पायलट की ब्रेथ एनलाइजरी मशीन से परीक्षण कर रही हैं।
पहले और बाद में होता है परीक्षण
लोको पायलट के लिए सांस विश्लेषण परीक्षण प्रणाली, जिसे ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट भी कहा जाता है। यह एक ऐसा परीक्षण है जो यह निर्धारित करता है कि लोको पायलट ने शराब का सेवन किया है या नहीं। लोको पायलटों को ट्रेन चलाने से पहले और बाद में ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण से गुजरना होता है। इस परीक्षण का उद्देश्य शराब के नशे में ट्रेन को चलाने से रोकना है। यह यात्रियों और लोको पायलट दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इस परीक्षण के अलावा लोको पायलट व गार्ड को अन्य मेडिकल परीक्षण से भी गुजरना पड़ता है। इसमें आंखों की जांच और रक्त का परीक्षण शामिल है।
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सकारात्मक मिलने पर चार्जशीट
अगर कोई लोको पायलट ऑन ड्यूटी शराब का सेवन करता है और ब्रेथ एनलाइजर परीक्षण में अल्कोहल पाया जाता है तो मूत्र और खून की जांच कराई जाती है। अगर यह रिपोर्ट तय मानकों के अनुसार नहीं आती है तो लोको पायलट को चार्जशीट किया जाता है।
उम्र के तीन पड़ाव में जांच
लोको पायलट की नौकरी शुरू करने से लेकर 45 वर्ष की उम्र तक प्रत्येक चार साल में पूरे शरीर का परीक्षण कराना अनिवार्य है। इसमें कलर ब्लाइंडनेस से लेकर कई ऐसी जांचें होती हैं जो ट्रेन चलाने से संबंधित होती हैं। वहीं 45 से लेकर 55 वर्ष तक प्रत्येक दो वर्ष में और 55 से 60 तक प्रत्येक वर्ष यह जांच करानी अनिवार्य होती है।
करीब 800 कर्मचारी कार्यरत
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर मौजूदा समय में लगभग 600 के करीब लोको व सह लोको पायलट कार्यरत हैं जोकि अपने निर्धारित समय में ट्रेनों का संचालन कर रहे हैं। वहीं, गार्ड की संख्या भी 150 के करीब है जोकि ट्रेन के सुरक्षित संचालन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सभी कर्मचारी रोजाना लोको लॉबी में रिपोर्ट करने के बाद ही अपनी ड्यूटी पर जाते हैं।
पहले ऐसे होती थी जांच
ट्रेन संचालन से पहले लोको पायलट और गार्ड हाजिरी लगाकर अपने काम में जुट जाते थे। अगर कभी कोई हादसा होता था या लोको पायलट लाल सिग्नल को पार करते थे तो उन्हें ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण से गुजरना पड़ता था जोकि हाथ द्वारा संचालित मशीन से किया जाता था।
वर्जन
ट्रेन संचालन से जुड़े कर्मचारियों के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। ड्यूटी पर जाने से पहले और ड्यूटी खत्म करने के बाद उन्हें लॉबी में मशीन पर परीक्षण के निर्देश दिए हैं। यह पूरी प्रक्रिया ट्रेनों के सुरक्षित संचालन की ओर से अपनाई जा रही है और इसके काफी सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं।
विनोद भाटिया, डीआरएम, अंबाला।
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इसके माध्यम से ही रेलवे कर्मचारी के नशे में होने का प्रमाण मिलेगा और ऐसा होने पर उसे ट्रेन संचालन से रोका जा सकेगा। इस प्रणाली को अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन की लोको लॉबी में स्थापित किया गया है। इसके अलावा अब विशेष टीमें बीच रास्ते के स्टेशनों पर भी इंजन में चढ़कर लोको पायलट की ब्रेथ एनलाइजरी मशीन से परीक्षण कर रही हैं।
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पहले और बाद में होता है परीक्षण
लोको पायलट के लिए सांस विश्लेषण परीक्षण प्रणाली, जिसे ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट भी कहा जाता है। यह एक ऐसा परीक्षण है जो यह निर्धारित करता है कि लोको पायलट ने शराब का सेवन किया है या नहीं। लोको पायलटों को ट्रेन चलाने से पहले और बाद में ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण से गुजरना होता है। इस परीक्षण का उद्देश्य शराब के नशे में ट्रेन को चलाने से रोकना है। यह यात्रियों और लोको पायलट दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इस परीक्षण के अलावा लोको पायलट व गार्ड को अन्य मेडिकल परीक्षण से भी गुजरना पड़ता है। इसमें आंखों की जांच और रक्त का परीक्षण शामिल है।
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सकारात्मक मिलने पर चार्जशीट
अगर कोई लोको पायलट ऑन ड्यूटी शराब का सेवन करता है और ब्रेथ एनलाइजर परीक्षण में अल्कोहल पाया जाता है तो मूत्र और खून की जांच कराई जाती है। अगर यह रिपोर्ट तय मानकों के अनुसार नहीं आती है तो लोको पायलट को चार्जशीट किया जाता है।
उम्र के तीन पड़ाव में जांच
लोको पायलट की नौकरी शुरू करने से लेकर 45 वर्ष की उम्र तक प्रत्येक चार साल में पूरे शरीर का परीक्षण कराना अनिवार्य है। इसमें कलर ब्लाइंडनेस से लेकर कई ऐसी जांचें होती हैं जो ट्रेन चलाने से संबंधित होती हैं। वहीं 45 से लेकर 55 वर्ष तक प्रत्येक दो वर्ष में और 55 से 60 तक प्रत्येक वर्ष यह जांच करानी अनिवार्य होती है।
करीब 800 कर्मचारी कार्यरत
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर मौजूदा समय में लगभग 600 के करीब लोको व सह लोको पायलट कार्यरत हैं जोकि अपने निर्धारित समय में ट्रेनों का संचालन कर रहे हैं। वहीं, गार्ड की संख्या भी 150 के करीब है जोकि ट्रेन के सुरक्षित संचालन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सभी कर्मचारी रोजाना लोको लॉबी में रिपोर्ट करने के बाद ही अपनी ड्यूटी पर जाते हैं।
पहले ऐसे होती थी जांच
ट्रेन संचालन से पहले लोको पायलट और गार्ड हाजिरी लगाकर अपने काम में जुट जाते थे। अगर कभी कोई हादसा होता था या लोको पायलट लाल सिग्नल को पार करते थे तो उन्हें ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण से गुजरना पड़ता था जोकि हाथ द्वारा संचालित मशीन से किया जाता था।
वर्जन
ट्रेन संचालन से जुड़े कर्मचारियों के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। ड्यूटी पर जाने से पहले और ड्यूटी खत्म करने के बाद उन्हें लॉबी में मशीन पर परीक्षण के निर्देश दिए हैं। यह पूरी प्रक्रिया ट्रेनों के सुरक्षित संचालन की ओर से अपनाई जा रही है और इसके काफी सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं।
विनोद भाटिया, डीआरएम, अंबाला।