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Ambala News: कर्मचारियों पर लाखों खर्च फिर भी पूरा नहीं हुआ लक्ष्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 Jun 2025 03:33 AM IST
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Lakhs were spent on employees but the target was not achieved
अंबाला सिटी। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में अंबाला ने साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। इसमें 84 लाख रुपये कर्मचारियों पर खर्च किए गए हैं फिर भी लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। इस पर अब सवाल उठने लगे हैं कि मनरेगा में जब उस गति से पर्याप्त मजदूराें के साथ काम नहीं हो पा रहा है तो कर्मचारियों को रखकर सरकार के लाखों रुपये क्यों व्यर्थ किए जा रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार दिशा समिति की बैठक में मनरेगा योजना की समीक्षा बैठक के दौरान समिति के अध्यक्ष सांसद वरुण मुलाना व राज्य सभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने योजना में खर्चे के बारे में पूछा। इस पर सीईओ जिला परिषद ने बताया कि करीब साढ़े चार करोड़ रुपये वहन किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। इसके बाद सीईओ ने बताया इस धनराशि में 84 लाख रुपये कर्मचारियों के वेतन से जुड़े हैं। सांसद ने टिप्पणी की कि जब काम ही ठीक से नहीं हो पा रहा है तो कर्मचारियों पर इतना वहन करने की क्या आवश्यकता है। उन्होंने इस पर प्रगति लाने के निर्देश दिए गए।
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एक हजार मनरेगा मजदूर कर रहे काम : योजना पर सवाल उठाए गए कि जिला में एक हजार लोगों को मनरेगा के तहत मजदूरी दी जा रही है। जबकि विभाग को अधिक से अधिक लोगों को जोड़कर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए। एक हजार लोगों के साथ साढ़े चार करोड़ का खर्च किया गया है। जिसमें कंटीजेंसी की प्रगति अधिक अच्छी नहीं है।
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मनरेगा योजना में वित्तीय वर्ष 2024-25 साढ़े चार करोड़ रुपये का कुल खर्चा सामने आया। जिसमें मजदूरी, निर्माण सामग्री की लागत और प्रशासनिक खर्चे शामिल रहे। इसमें 72 प्रतिशत बजट पर मजदूरी पर खर्च किया गया है। जबकि वर्ष 2025-26 में 99 प्रतिशत से अधिक बजट खर्च किया गया है।
हालांकि खर्चे करने में रिपोर्ट प्रगति ठीक स्थिति दर्शा रही है। वहीं कुल जॉबकार्ड धारकों में से 62 प्रतिशत महिलाओं को काम दिया गया है। दरअसल मनरेगा योजना में इस वित्तीय वर्ष में मजदूरी 374 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये कर दी गई है। योजना में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक परिवार को,जो अकुशल व्यक्ति मजदूरी करने का इच्छुक हो उसे एक वर्ष में 100 दिन रोजगार देने का प्रावधान है।
सूचना पट कार्य शुरू होते समय लगाने के निर्देश : अक्सर गांवों में गोहर, तालाबों की खोदाई व नवीनीकरण आदि विकास कार्यों को मनरेगा के तहत कराया जाता है। इसको लेकर सूचना पट लगाने के निर्देश दिए गए थे।

अधिकारियों ने कार्य समाप्त होने के बाद विकास कार्यों के सूचना पट लगाने की बात कही।
इस पर सांसद ने मनरेगा के अधिकारियों को कार्य शुरू होने से पहले सूचना पट लगाने के निर्देश दिए हैं ताकि ग्रामीणों को पता चले कि उनके गांव में मनरेगा से कार्य हो रहा है तो वह भी उस कार्य में जुड़ना चाहें तो जुड़ सकें। संवाद
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