फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   Lack of facilities in government de-addiction center

Ambala News: सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में सुविधाओं का टोटा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 01 Dec 2024 02:22 AM IST
विज्ञापन
Lack of facilities in government de-addiction center
अंबाला सिटी। अंबाला जिला में 15 निजी नशा मुक्ति केंद्र हैं। जबकि जिले में एक ही सरकारी नशा मुक्ति केंद्र है। सरकारी नशा मुक्ति केंद्र की बात करें तो यहां सुविधाओं का टोटा है। केंद्र के पास मरीज भर्ती करने के लिए बेड तक नहीं है। हैरानी की बात है कि सामान्य मरीजों के साथ कई बार उपचार किया जाता है, इस कारण से कई बार केंद्र का स्टॉफ मरीजों को घर जाने की सलाह दे देता है।
विज्ञापन

इसके साथ ही मरीज को संभालने के लिए पर्याप्त कर्मचारी भी नहीं है। स्टॉफ की बात करें तो दो मनोरोग चिकित्सक और दो अन्य कर्मचारी हैं। इससे पहले तो केंद्र के मरीजों की काउंसलिंग के लिए काउंसलर तक नहीं था। जिसकी हाल ही में तैनाती हुई। जबकि निजी नशा मुक्ति केंद्र बड़ी संख्या में संचालित तो हैं मगर यहां लगातार अनियमितताएं मिलती रहती हैं।
विज्ञापन

बजट का कर रहे इंतजार

एम्स की तरफ से जिला नागरिक अस्पताल में सरकारी नशा मुक्ति केंद्र बनाने के लिए 60 लाख रुपए का बजट की मंजूरी दी गई थी। अभी तक विभाग को वह बजट नहीं मिल पाया है। इसलिए मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। प्राइवेट केंद्रों में हजारों रुपए फीस की वसूली की जाती है। एक निजी नशा मुक्ति केंद्र में 15 हजार रुपए से लेकर 20 हजार रुपए तक का खर्च आता है। जबकि नशा करने वाले मरीज अक्सर ही गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों से होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पूरे नहीं करते नियम, मिल चुके नोटिस

जिला अंबाला के सभी केंद्रों को अनियमितता बरतने के कारण दो- दो बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इन निजी केंद्रों में मरीजों को महंगे दामों पर दवाइयां दी जाती है। इतना ही नहीं कई बार मरीज दवा लेने के बाद भी नशा नहीं छोड़ पाते हैं। ऐसे में मरीजों को कई दिनों के भर्ती किया जाता है। भर्ती करने के बाद भी अभिभावकों से मोटी रकम वसूली जाती है।
अब 15 ही केंद्र रह गए शेष

अंबाला में 16 निजी केंद्र होते थे अब वे घटकर 15 ही रह गए हैं। हाल ही में निदेशालय की ओर से केंद्र का लाइसेंस रद्द किया गया है। केंद्रों को चलाने के लिए एक मनोरोग चिकित्सक, एक नियमित चिकित्सक, मरीजों के अनुपात में कर्मचारी व सुरक्षा कर्मी और आग से बचने के लिए जरूरी उपकरण सहित अन्य व्यवस्थाएं दुरूस्त होनी जरूरी है, लेकिन कई बार नोटिस देने के बाद भी नशा मुक्ति केंद्र इन व्यवस्थाओं को दुरूस्त नहीं करवाते।



इन केंद्रों के लिए एक जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया जाता है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के सदस्य, जिला सोशल वेलफेयर और एडीसी कार्यालय से एक अधिकारी शामिल होते हैं। एडीसी इसमें कमेटी का अधिकारी नियुक्त किया जाता है।


वर्जन



हाल ही में मेरे पास मेंटल हेल्थ की जांच टीम का चार्ज आया है। जिला स्तरीय कमेटी की ओर से लगातार केंद्रों पर जांच की जाती है। इन दिनों लाइसेंस नवीनीकरण के कार्य जारी है। बीते दो दिन पहले ही खतौली और नन्यौला के नशा मुक्ति केंद्रों की नवीनीकरण की जांच की गई थी। इसके अलावा अन्य केंद्रों की भी जांच की जाएगी। जो मानक पूरे नहीं करेगा उन केंद्रों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
-डॉ. विपिन भंडारी, जिला नोडल अधिकारी, मानसिक स्वास्थ्य
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed