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Ambala News: कलश यात्रा से किसानों में जगाएंगे अलख
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अंबाला सिटी। किसान आंदोलन को नई दिशा देने के लिए शंभू बॉर्डर पर बैठे आंदोलनकारी किसान नेताओं ने अलग ही फार्मूला अपनाया है। अब वह मृतक किसान शुभकरण की अस्थियों को लेकर गांव-गांव पहुंचेंगे और हरियाणा के किसानों में अलख जगाएंगे।
किसान आंदोलन के 30वें दिन किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने महत्वपूर्ण फैसले लिए। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर, जगजीत सिंह डल्लेवाल और अमरजीत सिंह ने कहा कि किसानों पर सरकार का क्रूर और दमन स्वभाव को उजागर करने के लिए 15 मार्च को दोनों मंचों के नेता शहीद शुभकरण के पैतृक गांव बल्लो जिला बठिंडा से देशव्यापी शहीदी कलश यात्रा शुरू करेंगे। इसमें 16 मार्च से हरियाणा के विभिन्न गांवों से होते हुए 22 मार्च को हिसार के माजरा प्याऊ गांव और 31 मार्च को अंबाला के मोहड़ी अनाज मंडी में विशाल शहीदी समारोह होगा। शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
खास बात यह है कि किसान आंदोलन कर रहे संगठन (किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक) और संयुक्त किसान मोर्चा और भाकियू चढ़ूनी गुट की लाख कोशिशों के बाद दोनों संगठन साथ नहीं आ सके। अब वीरवार को एसकेएम और चढ़ूनी गुट दिल्ली में प्रदर्शन करने निकलेगा। भाकियू चढ़ूनी गुट के नेता मलकीत सिंह ने बताया कि हम दोनों संगठनों को एक नहीं कर सके, कई बैठक की। अब संयुक्त किसान मोर्चा के साथ ही हम अपना अलग आंदोलन करेंगे। दिल्ली में आगामी रणनीति बनाई जाएगी। इसमें किसान अपनी गाड़ियों, बस और ट्रेन से दिल्ली जाएंगे। एक दिन का यह कार्यक्रम होगा।
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किसान नेता बोले- शुभकरण की गलती क्या थी
किसान नेताओं ने कहा कि गांव-गांव पहुंचकर किसानों को कहा जाएगा कि चुनाव में उनके यहां भाजपा नेता या सरकार से जुड़े लोग आएं तो उनसे जरूर पूछें कि शुभकरण की क्या गलती थी जो उसे जान गंवानी पड़ी। इसी प्रकार किसान आंदोलन में दिल्ली में और उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीर में जान गंवाने वाले किसानों पर सवाल पूछो। नेताओं ने देश के किसानों और मजदूरों से भाजपा और एनडीए गठबंधन के मंत्रियों के खिलाफ शहीद किसानों की पट्टिकाएं दिखाकर विरोध करने की अपील की।
आंदोलन की मांगें और मृतकों की लगाएं तस्वीरें
किसान नेताओं ने कहा आंदोलन की मांगें और शहीद किसानों की तस्वीरें गांव-गांव में लगाई जाएं, भाजपा और गठबंधन के हर नेता और नेत्री से जन-तांत्रिक तरीके से सवाल पूछे जाएं और अगर सवालों का जवाब नहीं दिए तो संवैधानिक तरीके से काले झंडे दिखाए जाएं। उन्होंने कहा कि किसान और कमेरा समाज किसानों के हत्यारों को कभी माफ नहीं करेगा
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किसान आंदोलन के 30वें दिन किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने महत्वपूर्ण फैसले लिए। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर, जगजीत सिंह डल्लेवाल और अमरजीत सिंह ने कहा कि किसानों पर सरकार का क्रूर और दमन स्वभाव को उजागर करने के लिए 15 मार्च को दोनों मंचों के नेता शहीद शुभकरण के पैतृक गांव बल्लो जिला बठिंडा से देशव्यापी शहीदी कलश यात्रा शुरू करेंगे। इसमें 16 मार्च से हरियाणा के विभिन्न गांवों से होते हुए 22 मार्च को हिसार के माजरा प्याऊ गांव और 31 मार्च को अंबाला के मोहड़ी अनाज मंडी में विशाल शहीदी समारोह होगा। शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
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खास बात यह है कि किसान आंदोलन कर रहे संगठन (किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक) और संयुक्त किसान मोर्चा और भाकियू चढ़ूनी गुट की लाख कोशिशों के बाद दोनों संगठन साथ नहीं आ सके। अब वीरवार को एसकेएम और चढ़ूनी गुट दिल्ली में प्रदर्शन करने निकलेगा। भाकियू चढ़ूनी गुट के नेता मलकीत सिंह ने बताया कि हम दोनों संगठनों को एक नहीं कर सके, कई बैठक की। अब संयुक्त किसान मोर्चा के साथ ही हम अपना अलग आंदोलन करेंगे। दिल्ली में आगामी रणनीति बनाई जाएगी। इसमें किसान अपनी गाड़ियों, बस और ट्रेन से दिल्ली जाएंगे। एक दिन का यह कार्यक्रम होगा।
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किसान नेता बोले- शुभकरण की गलती क्या थी
किसान नेताओं ने कहा कि गांव-गांव पहुंचकर किसानों को कहा जाएगा कि चुनाव में उनके यहां भाजपा नेता या सरकार से जुड़े लोग आएं तो उनसे जरूर पूछें कि शुभकरण की क्या गलती थी जो उसे जान गंवानी पड़ी। इसी प्रकार किसान आंदोलन में दिल्ली में और उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीर में जान गंवाने वाले किसानों पर सवाल पूछो। नेताओं ने देश के किसानों और मजदूरों से भाजपा और एनडीए गठबंधन के मंत्रियों के खिलाफ शहीद किसानों की पट्टिकाएं दिखाकर विरोध करने की अपील की।
आंदोलन की मांगें और मृतकों की लगाएं तस्वीरें
किसान नेताओं ने कहा आंदोलन की मांगें और शहीद किसानों की तस्वीरें गांव-गांव में लगाई जाएं, भाजपा और गठबंधन के हर नेता और नेत्री से जन-तांत्रिक तरीके से सवाल पूछे जाएं और अगर सवालों का जवाब नहीं दिए तो संवैधानिक तरीके से काले झंडे दिखाए जाएं। उन्होंने कहा कि किसान और कमेरा समाज किसानों के हत्यारों को कभी माफ नहीं करेगा