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Ambala News: बारिश से पहले कालका-शिमला रेलखंड के पुलों और सुरंगों की जांच
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कालका-शिमला रेल खंड पर निरीक्षण के दौरान मंडल रेल प्रबंधक से मंत्रणा करते सीआरएस। रेलवे
अंबाला। रेलवे के मुख्य संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) दिनेश चंद देसवाल ने विश्व धरोहर रेल खंड कालका-शिमला की सुरंगों और रेलवे ट्रैक का बारीकि से निरीक्षण किया। सीआरएस दो दिन तक इस खंड पर रहे और ट्रेन संचालन से लेकर यात्री सुविधाओं का अवलोकन किया।
आगामी मानसून को देखते हुए रेलवे ट्रैक की सुरक्षा के लिए भी उन्होंने अंबाला रेल मंडल के प्रबंधक विनोद भाटिया सहित संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने रेलवे ट्रैक के रखरखाव में जुड़े कर्मचारियाें से भी मंत्रणा की कि बारिश और धुंध के मौसम में वो किस प्रकार रेलवे ट्रैक पर पेट्रोलिंग करते हैं और अगर कोई विषम परिस्थिति आ जाए तो उससे कैसे निपटते हैं। रेलवे कर्मचारियों ने प्रत्येक गतिविधि की जानकारी विस्तृत ढंग से दी। उन्होंने बताया कि मौसम को देखते हुए जो भी जरूरी उपाय हैं वो पहले ही कर लिए जाते हैं।
20 रेलवे स्टेशनों पर 103 सुरंगें
कालका-शिमला रेल खंड पर 20 रेलवे स्टेशन हैं। इसके अलावा इस मार्ग पर कुल 103 सुरंगें और 912 मोड़ और 969 के करीब पुल हैं। कालका-शिमला रेलवे का निर्माण हर्बर्ट सेप्टिमस हरिंगटन के निर्देशन में 1898 और 1903 के बीच किया गया था। ब्रिटिश राज के दौरान भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला बनाया गया था। आठ जुलाई 2008 को यूनेस्को ने कालका-शिमला रेलवे को भारत के पर्वतीय रेलमार्गों की विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया था।
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गति बढ़ाने पर भी मंथन
मौजूदा समय में कालका-शिमला रेल खंड पर दौड़ने वाली टॉय ट्रेनों का संचालन 25 किमी प्रतिघंटा की गति से किया जा रहा है। सीआरएम के निरीक्षण के दौरान ट्रेन की गति बढ़ाकर भी देखी गई। इस दौरान लगभग 35 से 40 किमी तक ट्रेन को चलाकर देखा गया और यह परीक्षण सफल रहा। हालांकि अभी कुछ मोड़ पर रेलवे ट्रैक को सीधा करने की जरूरत है। इसकी भी रूपरेखा तैयार करने के लिए सीआरएस ने दिए हैं।
दो माह बंद रहा था ये मार्ग
पिछले वर्ष बारिश के कारण विश्व धरोहर रेल खंड का मुख्य हिस्सा बह गया था। इससे रेलवे ट्रैक और पुल को काफी नुकसान हुआ था। इस हिस्से को दुरुस्त करने में लगभग दो माह का समय लग गया था। वहीं, रेलवे को खराब हिस्से को दुरुस्त करने के लिए 20 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े थे। इस दौरान एक मुख्य पुल का भी निर्माण किया गया जोकि अपनी जगह से खिसक गया था।
वर्जन
कालका-शिमला रेल खंड का सीआरएस ने निरीक्षण किया है। इसमें सुरंगों, पुलों और रेलवे ट्रैक की गहनता से जांच की गई।
विनोद भाटिया, डीआरएम अंबाला।
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आगामी मानसून को देखते हुए रेलवे ट्रैक की सुरक्षा के लिए भी उन्होंने अंबाला रेल मंडल के प्रबंधक विनोद भाटिया सहित संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने रेलवे ट्रैक के रखरखाव में जुड़े कर्मचारियाें से भी मंत्रणा की कि बारिश और धुंध के मौसम में वो किस प्रकार रेलवे ट्रैक पर पेट्रोलिंग करते हैं और अगर कोई विषम परिस्थिति आ जाए तो उससे कैसे निपटते हैं। रेलवे कर्मचारियों ने प्रत्येक गतिविधि की जानकारी विस्तृत ढंग से दी। उन्होंने बताया कि मौसम को देखते हुए जो भी जरूरी उपाय हैं वो पहले ही कर लिए जाते हैं।
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20 रेलवे स्टेशनों पर 103 सुरंगें
कालका-शिमला रेल खंड पर 20 रेलवे स्टेशन हैं। इसके अलावा इस मार्ग पर कुल 103 सुरंगें और 912 मोड़ और 969 के करीब पुल हैं। कालका-शिमला रेलवे का निर्माण हर्बर्ट सेप्टिमस हरिंगटन के निर्देशन में 1898 और 1903 के बीच किया गया था। ब्रिटिश राज के दौरान भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला बनाया गया था। आठ जुलाई 2008 को यूनेस्को ने कालका-शिमला रेलवे को भारत के पर्वतीय रेलमार्गों की विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया था।
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गति बढ़ाने पर भी मंथन
मौजूदा समय में कालका-शिमला रेल खंड पर दौड़ने वाली टॉय ट्रेनों का संचालन 25 किमी प्रतिघंटा की गति से किया जा रहा है। सीआरएम के निरीक्षण के दौरान ट्रेन की गति बढ़ाकर भी देखी गई। इस दौरान लगभग 35 से 40 किमी तक ट्रेन को चलाकर देखा गया और यह परीक्षण सफल रहा। हालांकि अभी कुछ मोड़ पर रेलवे ट्रैक को सीधा करने की जरूरत है। इसकी भी रूपरेखा तैयार करने के लिए सीआरएस ने दिए हैं।
दो माह बंद रहा था ये मार्ग
पिछले वर्ष बारिश के कारण विश्व धरोहर रेल खंड का मुख्य हिस्सा बह गया था। इससे रेलवे ट्रैक और पुल को काफी नुकसान हुआ था। इस हिस्से को दुरुस्त करने में लगभग दो माह का समय लग गया था। वहीं, रेलवे को खराब हिस्से को दुरुस्त करने के लिए 20 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े थे। इस दौरान एक मुख्य पुल का भी निर्माण किया गया जोकि अपनी जगह से खिसक गया था।
वर्जन
कालका-शिमला रेल खंड का सीआरएस ने निरीक्षण किया है। इसमें सुरंगों, पुलों और रेलवे ट्रैक की गहनता से जांच की गई।
विनोद भाटिया, डीआरएम अंबाला।