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Ambala News: रावण पर भी महंगाई की मार, एक हजार रुपये फीट में बन रहे पुतले
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अंबाला कैंट के ग्रेस पैलेस में आगरा निवासी वीरू पुतले तैयार करते हुए: संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। असत्य पर सत्य की विजय के पर्व दशहरा को लेकर शहर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार रावण, मेघनाद व कुंभकरण के पुतलों पर महंगाई की मार पड़ गई है। यही कारण है कि जो पुतले 800 रुपये फीट तक में तैयार होते थे, उनकी कीमत एक हजार से 1200 रुपये फीट तक पहुंच गई है। मौसम की अलर्ट को देखते हुए 20 दिन पहले ही उत्तरप्रदेश के कारीगरों द्वारा अंबाला कैंट में पुतले बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।
अंबाला कैंट के ग्रेस पैलेस में आगरा के मुस्लिम परिवार बादशाह कुरैशी व उनकी टीम द्वारा तोपखाना में होने वाले दहन के लिए रावण 45, मेघनाद 35 और कुंभकरण के 30 फीट के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। इन पुतलों का काम अंतिम चरण में है। मुस्लिम कारीगर यह पुतले तैयार कर इस पर्व पर हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल भी कायम कर रहे हैं। बादशाह कुरैशी ने बताया कि पिछले लगभग 150 सालों से उनके परिवार के लोग इस परंपरा को निभा रहे हैं।
कुरैशी ने बताया कि पुतला तैयार करने के लिए बांस, कागज, लकड़ी, सूत, रस्सी, गोंद, रंग, मिट्टी का प्रयोग किया जाता है। 10 से 100 फीट के पुतलों के सभी अंग अलग-अलग बनाए जाते हैं। नाप तोल का ख्याल रखा जाता है। सभी अंगों को सतर्कता से जोड़ा जाता है। पुतले के दोनों ओर का वजन बराबर रखना होता है ताकि इसे खड़ा करते समय संतुलन बना रहे। एक पुतला बनाने में दो-तीन दिन का समय लगता है। इस तरह से तीनों पुतलों में एक सप्ताह का समय लगता है।
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सिटी के हर्बल पार्क में 60 फीट तो नाच घर में 55 फीट का होगा रावण
बादशाह कुरैशी ने बताया कि अंबाला सिटी के हुड्डा मैदान के लिए 60 फीट के रावण, 55 फीट के मेघनाद, 50 फीट के कुंभकरण तैयार कर दिए गए हैं। इसी तरह से रेलवे कॉलोनी के नाच घर के लिए 55, 45, 40 फीट के पुतले बनाए गए हैं। तोपखाना में होने वाले दहन के लिए 45, 40, 35 फीट के पुतले तैयार किए गए हैं। गांधी मैदान के पुतले भी वह तैयार किया करते थे लेकिन वो इस बार तैयार नहीं किए जा रहे हैं।
कुशल कारीगर हुए कम, नई पीढ़ी उदासीन
आगरा निवासी वकील कुरैशी का कहना है पुतला बनाने में प्रयोग होने वाली सामग्री के दाम पहले की अपेक्षा काफी बढ़ गए हैं। इसलिए पुतला बनाना महंगा हो गया है। सुतली के दाम 75 से बढ़कर 120 तक पहुंच गए, 24 फीट का बांस 160 की जगह 240 रुपये व कच्चा धागा 200 से 300 रुपये किलो तक पहुंच गया है। सभी के दाम बढ़ गए है। नई पीढ़ी इस काम के लिए उदासीन है। कुशल कारीगर भले ही कम हो गए हैं मगर भाईचारे में कोई कमी नहीं है।
30 साल तैयार कर रहे पुतले
कारीगर वीरू ने बताया कि वह पिछले 30 साल से पुतले तैयार कर रहे हैं। पांच साल पहले की अपेक्षा पुतलों की सामग्री में काफी उछाल आया है। बादशाह कुरैशी के साथ ही अंबाला, चंडीगढ़, हिमाचल आदि में पुतले तैयार करने आते हैं। अंबाला के लगभग सभी पुतले तैयार कर दिए गए है।
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अंबाला। असत्य पर सत्य की विजय के पर्व दशहरा को लेकर शहर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार रावण, मेघनाद व कुंभकरण के पुतलों पर महंगाई की मार पड़ गई है। यही कारण है कि जो पुतले 800 रुपये फीट तक में तैयार होते थे, उनकी कीमत एक हजार से 1200 रुपये फीट तक पहुंच गई है। मौसम की अलर्ट को देखते हुए 20 दिन पहले ही उत्तरप्रदेश के कारीगरों द्वारा अंबाला कैंट में पुतले बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।
अंबाला कैंट के ग्रेस पैलेस में आगरा के मुस्लिम परिवार बादशाह कुरैशी व उनकी टीम द्वारा तोपखाना में होने वाले दहन के लिए रावण 45, मेघनाद 35 और कुंभकरण के 30 फीट के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। इन पुतलों का काम अंतिम चरण में है। मुस्लिम कारीगर यह पुतले तैयार कर इस पर्व पर हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल भी कायम कर रहे हैं। बादशाह कुरैशी ने बताया कि पिछले लगभग 150 सालों से उनके परिवार के लोग इस परंपरा को निभा रहे हैं।
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कुरैशी ने बताया कि पुतला तैयार करने के लिए बांस, कागज, लकड़ी, सूत, रस्सी, गोंद, रंग, मिट्टी का प्रयोग किया जाता है। 10 से 100 फीट के पुतलों के सभी अंग अलग-अलग बनाए जाते हैं। नाप तोल का ख्याल रखा जाता है। सभी अंगों को सतर्कता से जोड़ा जाता है। पुतले के दोनों ओर का वजन बराबर रखना होता है ताकि इसे खड़ा करते समय संतुलन बना रहे। एक पुतला बनाने में दो-तीन दिन का समय लगता है। इस तरह से तीनों पुतलों में एक सप्ताह का समय लगता है।
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सिटी के हर्बल पार्क में 60 फीट तो नाच घर में 55 फीट का होगा रावण
बादशाह कुरैशी ने बताया कि अंबाला सिटी के हुड्डा मैदान के लिए 60 फीट के रावण, 55 फीट के मेघनाद, 50 फीट के कुंभकरण तैयार कर दिए गए हैं। इसी तरह से रेलवे कॉलोनी के नाच घर के लिए 55, 45, 40 फीट के पुतले बनाए गए हैं। तोपखाना में होने वाले दहन के लिए 45, 40, 35 फीट के पुतले तैयार किए गए हैं। गांधी मैदान के पुतले भी वह तैयार किया करते थे लेकिन वो इस बार तैयार नहीं किए जा रहे हैं।
कुशल कारीगर हुए कम, नई पीढ़ी उदासीन
आगरा निवासी वकील कुरैशी का कहना है पुतला बनाने में प्रयोग होने वाली सामग्री के दाम पहले की अपेक्षा काफी बढ़ गए हैं। इसलिए पुतला बनाना महंगा हो गया है। सुतली के दाम 75 से बढ़कर 120 तक पहुंच गए, 24 फीट का बांस 160 की जगह 240 रुपये व कच्चा धागा 200 से 300 रुपये किलो तक पहुंच गया है। सभी के दाम बढ़ गए है। नई पीढ़ी इस काम के लिए उदासीन है। कुशल कारीगर भले ही कम हो गए हैं मगर भाईचारे में कोई कमी नहीं है।
30 साल तैयार कर रहे पुतले
कारीगर वीरू ने बताया कि वह पिछले 30 साल से पुतले तैयार कर रहे हैं। पांच साल पहले की अपेक्षा पुतलों की सामग्री में काफी उछाल आया है। बादशाह कुरैशी के साथ ही अंबाला, चंडीगढ़, हिमाचल आदि में पुतले तैयार करने आते हैं। अंबाला के लगभग सभी पुतले तैयार कर दिए गए है।

अंबाला कैंट के ग्रेस पैलेस में आगरा निवासी वीरू पुतले तैयार करते हुए: संवाद

अंबाला कैंट के ग्रेस पैलेस में आगरा निवासी वीरू पुतले तैयार करते हुए: संवाद

अंबाला कैंट के ग्रेस पैलेस में आगरा निवासी वीरू पुतले तैयार करते हुए: संवाद