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Ambala News: यहां गांव के लोग ही बनाते हैं लंगर
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अंबाला सिटी। संत नागा बाबा मेले का आयोजन प्रत्येक वर्ष गुरुद्वारा सिंह सभा धूलकोट प्रबंधन कमेटी के सहयोग से ही करवाया जाता है। गुरुद्वारा के प्रमुख ग्रंथी गुरदयाल सिंह ने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में पूरा गांव अपने सेवा में जुट जाता है।
गांव के लोगों से ही मेले के लिए चंदा जमा किया जाता है। इसके अलावा शहर में कहीं से भी चंदा नहीं लिया जाता। अगर कोई श्रद्धालु चंदा देता है तो वह गुरुद्वारा में ही लिया जाता है। इतना ही नहीं लंगर बनाने के सब्जियां, आटा, दाल और चावल भी ग्रामीणों के सहयोग से ही इकट्ठा किया जाता है। मेले में प्रत्येक वर्ष 50 से 60 हजार लोग आते हैं। जिनके लिए पूरा दिन लंगर की व्यवस्था गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की ओर से ही रहती है।
गांव के लोग ही बनाते हैं लंगर
मेले में वितरित होने वाले लंगर को गांव के ही लोग आपस में मिलकर बना लेते हैं। महिलाएं सब्जी काटने और रोटी बनाने का काम संभालती हैं तो वहीं पुरुष अन्य सब्जी तैयार करने और लंगर के वितरण का कार्य देखते हैं। लगभग 50 से अधिक महिलाएं दो दिनों तक मेले में बनने वाले लंगर को तैयार करती हैं।
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गांव के लोगों से ही मेले के लिए चंदा जमा किया जाता है। इसके अलावा शहर में कहीं से भी चंदा नहीं लिया जाता। अगर कोई श्रद्धालु चंदा देता है तो वह गुरुद्वारा में ही लिया जाता है। इतना ही नहीं लंगर बनाने के सब्जियां, आटा, दाल और चावल भी ग्रामीणों के सहयोग से ही इकट्ठा किया जाता है। मेले में प्रत्येक वर्ष 50 से 60 हजार लोग आते हैं। जिनके लिए पूरा दिन लंगर की व्यवस्था गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की ओर से ही रहती है।
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गांव के लोग ही बनाते हैं लंगर
मेले में वितरित होने वाले लंगर को गांव के ही लोग आपस में मिलकर बना लेते हैं। महिलाएं सब्जी काटने और रोटी बनाने का काम संभालती हैं तो वहीं पुरुष अन्य सब्जी तैयार करने और लंगर के वितरण का कार्य देखते हैं। लगभग 50 से अधिक महिलाएं दो दिनों तक मेले में बनने वाले लंगर को तैयार करती हैं।
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