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Ambala News: पीजीटी परीक्षा कराने वाली एजेंसी की कमी बनी कारण
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अंबला। केंद्रीय विद्यालय संगठन की पीजीटी में परीक्षा कराने वाली प्राइवेट एजेंसी एफटेक पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसका कारण यह है कि जब भी ऐसी ऑनलाइन परीक्षा कराई जाती है तो इंटरनेट ब्राउजर पर दूसरी साइट नहीं चलती। अगर किसी अभ्यर्थी दूसरी साइट चलाने की कोशिश करे तो वह पकड़ी जाती है। मगर अंबाला में ली जा रही परीक्षा में ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं थी। पूछताछ में पुलिस ने जब सॉल्वर गिरोह के सदस्यों से पूछा तो उन्होंने बताया कि वह आराम से इंटरनेट चला रहे थे। आसानी से एमी रिमोट डेस्कटॉप सॉफ्टवेयर की मदद से स्क्रीन साझा की जा रही थी। इसके साथ ही ब्राउजर भी दूसरा इस्तेमाल किया जा रहा था। ऐसे में परीक्षा कराने वाली एजेंसी की निगाह क्यों नहीं गई या इस पर ध्यान ही नहीं दिया।
इसके साथ ही परीक्षा नकलरहित हो इसका सुपरविजन किस प्रकार हो रहा था कि इतनी बड़ी कमी निगाह में नहीं आई। जबकि अक्सर परीक्षा कराने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी होती है कि पूरी तरह से परीक्षा सुरक्षित कराए। मगर यहां तो खुलेआम परीक्षा में ऑनलाइन सेंध लगाई जा रही थी। अब इस मामले में एजेंसी का क्या भूमिका है। इस पर भी पुलिस जांच के बाद निष्कर्ष निकलने पर ही स्थिति साफ हो सकेगी।
सीबीएसई ने निजी एजेंसी को दिया था काम
सीबीएसई ने इस परीक्षा को कराने के लिए निजी एजेंसी एफटेक को ठेका दिया था। पुलिस अधिकारी अब इस एंगल से भी जांच कर रहे हैं कि कहीं एजेंसी में ही तो गिरोह के सदस्यों ने सेंध नहीं लगाई। अक्सर ऐसी ऑनलाइन परीक्षाओं में सुरक्षा को काफी मजबूत रखा जाता है। मगर इस परीक्षा में इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया।
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लेन का नहीं लिया सहारा
अंबाला के एसपी जशनदीप सिंह रंधावा रोहतक में भी ऐसे गैंग को पकड़ चुके हैं। उस समय पता लगा कि सॉल्वर गैंग के सदस्य इस प्रकार की ऑनलाइन परीक्षा कराते हैं तो उन्हें लेन (लोकल एरिया नेटवर्क) का इस्तेमाल करना पड़ता है। मगर अंबाला में पकड़े गैंग को लेन का इस्तेमाल की जरूरत ही नहीं थी, क्योंकि वह आसानी से इंटरनेट का प्रयोग कर पा रहे हैं। आसानी से दूसरे ब्राउजर पर इंटरनेट चला पा रहे हैं और वह भी बिना किसी की निगाह में आए।
पानीपत से नहीं है कनेक्शन
इस मामले को पुलिस के सूत्रों की मानें तो पानीपत में पकड़े गए गिरोह और अंबाला में पकड़े गए गिरोह का अभी तक सीधा कनेक्शन नहीं मिला। दोनों गिरोह अपने-अपने स्तर पर सक्रिय होकर कार्य कर रहे थे। ऐसे गिरोह और भी हो सकते हैं। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन्होंने अब तक कितनी परीक्षाएं यहां से कराई हैं।
सार्थिक आईटीआई करा सकती थी सत्यापन
बताया जाता है कि इस मामले में सार्थिक आईटीआई प्रबंधन ने जिस दिन गिरोह पकड़ा, उसी दिन एसपी अंबाला को मेल कर अपनी ओर से किराये पर दी कंप्यूटर लैब के सत्यापन कराने की बात कही है। जबकि इस समय तक पानीपत में कंप्यूटर लैब पकड़ी जा चुकी थी। प्रदेश में मामला गर्म था। नियमानुसार अगर कोई स्थान किराये पर दिया जाता है तो उसका पुलिस सत्यापन कराना जरूरी होता है। वहीं, लंबे समय से सक्रिय गिरोह के सदस्य यहां परीक्षा कराते थे तो किसी को शक नहीं हुआ। ऐसे में पुलिस संदेह को लेकर हर एंगल से सभी पक्षों की जांच कर रही है।
वर्जन-- -- -- -- -- -
इस मामले में पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। अभी तक पता लगा है कि दिल्ली से मास्टर माइंड, हरदीप के साथ मिलकर पेपर करा रहा था। इस मामले में इंटरनेट आसानी से सॉल्वर प्रयोग कर रहे थे तो यह भी देखा जा रहा है कि एजेंसी ने किस प्रकार का सुपरविजन किया।
-जशनदीप सिंह रंधावा, एसपी, अंबाला
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इसके साथ ही परीक्षा नकलरहित हो इसका सुपरविजन किस प्रकार हो रहा था कि इतनी बड़ी कमी निगाह में नहीं आई। जबकि अक्सर परीक्षा कराने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी होती है कि पूरी तरह से परीक्षा सुरक्षित कराए। मगर यहां तो खुलेआम परीक्षा में ऑनलाइन सेंध लगाई जा रही थी। अब इस मामले में एजेंसी का क्या भूमिका है। इस पर भी पुलिस जांच के बाद निष्कर्ष निकलने पर ही स्थिति साफ हो सकेगी।
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सीबीएसई ने निजी एजेंसी को दिया था काम
सीबीएसई ने इस परीक्षा को कराने के लिए निजी एजेंसी एफटेक को ठेका दिया था। पुलिस अधिकारी अब इस एंगल से भी जांच कर रहे हैं कि कहीं एजेंसी में ही तो गिरोह के सदस्यों ने सेंध नहीं लगाई। अक्सर ऐसी ऑनलाइन परीक्षाओं में सुरक्षा को काफी मजबूत रखा जाता है। मगर इस परीक्षा में इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया।
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लेन का नहीं लिया सहारा
अंबाला के एसपी जशनदीप सिंह रंधावा रोहतक में भी ऐसे गैंग को पकड़ चुके हैं। उस समय पता लगा कि सॉल्वर गैंग के सदस्य इस प्रकार की ऑनलाइन परीक्षा कराते हैं तो उन्हें लेन (लोकल एरिया नेटवर्क) का इस्तेमाल करना पड़ता है। मगर अंबाला में पकड़े गैंग को लेन का इस्तेमाल की जरूरत ही नहीं थी, क्योंकि वह आसानी से इंटरनेट का प्रयोग कर पा रहे हैं। आसानी से दूसरे ब्राउजर पर इंटरनेट चला पा रहे हैं और वह भी बिना किसी की निगाह में आए।
पानीपत से नहीं है कनेक्शन
इस मामले को पुलिस के सूत्रों की मानें तो पानीपत में पकड़े गए गिरोह और अंबाला में पकड़े गए गिरोह का अभी तक सीधा कनेक्शन नहीं मिला। दोनों गिरोह अपने-अपने स्तर पर सक्रिय होकर कार्य कर रहे थे। ऐसे गिरोह और भी हो सकते हैं। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन्होंने अब तक कितनी परीक्षाएं यहां से कराई हैं।
सार्थिक आईटीआई करा सकती थी सत्यापन
बताया जाता है कि इस मामले में सार्थिक आईटीआई प्रबंधन ने जिस दिन गिरोह पकड़ा, उसी दिन एसपी अंबाला को मेल कर अपनी ओर से किराये पर दी कंप्यूटर लैब के सत्यापन कराने की बात कही है। जबकि इस समय तक पानीपत में कंप्यूटर लैब पकड़ी जा चुकी थी। प्रदेश में मामला गर्म था। नियमानुसार अगर कोई स्थान किराये पर दिया जाता है तो उसका पुलिस सत्यापन कराना जरूरी होता है। वहीं, लंबे समय से सक्रिय गिरोह के सदस्य यहां परीक्षा कराते थे तो किसी को शक नहीं हुआ। ऐसे में पुलिस संदेह को लेकर हर एंगल से सभी पक्षों की जांच कर रही है।
वर्जन
इस मामले में पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। अभी तक पता लगा है कि दिल्ली से मास्टर माइंड, हरदीप के साथ मिलकर पेपर करा रहा था। इस मामले में इंटरनेट आसानी से सॉल्वर प्रयोग कर रहे थे तो यह भी देखा जा रहा है कि एजेंसी ने किस प्रकार का सुपरविजन किया।
-जशनदीप सिंह रंधावा, एसपी, अंबाला