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आनंद मन की एकाग्रता में है : प्रेम
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अंबाला। छावनी के बोह में राधा माधव मंडली की ओर से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन हुआ। कथा के छठे दिन कथा व्यास प्रेम सागर पथिक ने श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन उठाकर इंद्रदेव का घमंड चूर-2 कर दिया। कथा वाचक ने बताया कि परमात्मा के प्रति प्रेम को जगाने के लिए प्रभु के उपकारों को बार-2 स्मरण करो। ऐसा करने पर मन में प्रभु-प्रेम जगेगा।
भगवान को केवल भक्ति और प्रेम बांध सकते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की लीलाएं मनन करने योग्य हैं। वह स्वयं माखन कम खाते हैं और अन्यों को ज्यादा खिलाते हैं। माखन चोरी की लीला तो चित्त चोरी की लीला है। प्रेम भाई ने कहा कि भगवान रस रूप है, इसी रस रूप ईश्वर के साथ तादात्म्य ही रास है।
परमात्मा से जीव का मिलन ही रास है। जहां बाल कृष्ण ने गेंद खेलने के खेल की ओर से कालिया नाग का उद्धार किया। वहीं, महारास की ओर से कामदेव के अभिमान का नाश किया।
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चीर हरण की लीला तो उन्होंने भगवान और जीव के बीच पड़े माया को हटाने के लिए की क्योंकि जब तक माया का परदा नहीं हटाओगे तब तक मायापति के दर्शन नहीं होंगे। जब प्रभु की कंस को मारने की इच्छा हुई, तब उन्होंने मथुरा जाकर उसका अंत करके भक्तों को बंधन मुक्त किया। इस दौरान मुख्य यजमान मनोज कुमार व नीलम शर्मा मौजूद रहे।
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भगवान को केवल भक्ति और प्रेम बांध सकते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की लीलाएं मनन करने योग्य हैं। वह स्वयं माखन कम खाते हैं और अन्यों को ज्यादा खिलाते हैं। माखन चोरी की लीला तो चित्त चोरी की लीला है। प्रेम भाई ने कहा कि भगवान रस रूप है, इसी रस रूप ईश्वर के साथ तादात्म्य ही रास है।
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परमात्मा से जीव का मिलन ही रास है। जहां बाल कृष्ण ने गेंद खेलने के खेल की ओर से कालिया नाग का उद्धार किया। वहीं, महारास की ओर से कामदेव के अभिमान का नाश किया।
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चीर हरण की लीला तो उन्होंने भगवान और जीव के बीच पड़े माया को हटाने के लिए की क्योंकि जब तक माया का परदा नहीं हटाओगे तब तक मायापति के दर्शन नहीं होंगे। जब प्रभु की कंस को मारने की इच्छा हुई, तब उन्होंने मथुरा जाकर उसका अंत करके भक्तों को बंधन मुक्त किया। इस दौरान मुख्य यजमान मनोज कुमार व नीलम शर्मा मौजूद रहे।