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रात में बदला सेंटर तो लगानी पड़ गई दौड़
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अंबाला। खेलो हरियाणा टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही अंबाला पहुंचे मेवात, पलवल, करनाल व चरखीदादरी के 110 खिलाड़ियों के लिए उस समय परेशानी बढ़ गई, जब शुक्रवार रात को अचानक उनके ठहराव के केंद्र में ही बदलाव कर दिया गया।
सभी खिलाड़ी अपने-अपने कोच के साथ वारहीरोज स्टेडियम पहुंचे, जहां से उन्हें पता चला कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रामबाग रोड के चार कमरों में उनके ठहरने की व्यवस्था की गई थी। पैदल है सभी रामबाग स्कूल पहुंचे तो उन्हें पता चला कि ठहराव केंद्र में बदलाव कर दिया गया है। अब उन्हें राजकीय स्कूल बकरा मार्केट में जाना है। इस बीच दोबारा से खिलाड़ियों को कोच संग बकरा मार्केट स्कूल की दौड़ लगानी पड़ी। रामबाग स्कूल में तो पूरी व्यवस्था थी लेकिन जैसे ही खिलाड़ियों को बकरा मार्केट स्कूल में ठहराया तो वहां अव्यवस्थाओं का आलम मिला। रातभर खिलाड़ी अपनी-अपनी व्यवस्था बनाने में ही जुटे रहे।
मच्छरों से जूझते रहे रातभर
बकरा मार्केट स्कूल में आकर पहुंचे तो जिन कमरों में उन्हें ठहराया गया था वहां पर मच्छरों ने सोने नहीं दिया। मच्छरों की फौज के कारण रातभर करवटें बदलते रहे।
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आशु, करनाल
बेंच लेकर गद्दे तक खुद बिछाए
स्टेडियम से रामबाग स्कूल पहुंचे और वहां से बकरा मार्केट स्कूल। स्कूल पहुंचने पर देखा कि व्यवस्था नहीं थी। बेंच को बाहर निकालने के बाद खुद गद्दे निकाले।
परमवीर, करनाल
आंखों में भरी रही नींद
रातभर ठीक ढंग से सोया भी नहीं गया। यहीं कारण है कि आंखें भारी-भारी हो रही है। खेलों से पहले ही यह व्यवस्था करनी चाहिए थी।
मोहित, करनाल
खिलाड़ियों के ठहराव का पूरा प्रबंध किया गया था। चार कमरों में गद्दों के अलावा सैनिटाइज, फोगिंग करवाई गई थी। स्टाफ की भी ड्यूटी लगा दी गई थी। आखिरी मौके पर पता चला कि केंद्र में बदलाव हुआ है तो खिलाड़ियों को बकरा मार्केट स्कूल भेज दिया गया था।
रमेश बतरा, प्रिंसिपल
खिलाड़ियों की बेहतर सहुलियत को देखते हुए केंद्र में बदलाव कर दिया गया था। बकरा मार्केट स्कूल में खिलाड़ियों के ठहराव की पूरी व्यवस्था करवाई गई थी।
एन सत्यन, जिला खेल अधिकारी
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सभी खिलाड़ी अपने-अपने कोच के साथ वारहीरोज स्टेडियम पहुंचे, जहां से उन्हें पता चला कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रामबाग रोड के चार कमरों में उनके ठहरने की व्यवस्था की गई थी। पैदल है सभी रामबाग स्कूल पहुंचे तो उन्हें पता चला कि ठहराव केंद्र में बदलाव कर दिया गया है। अब उन्हें राजकीय स्कूल बकरा मार्केट में जाना है। इस बीच दोबारा से खिलाड़ियों को कोच संग बकरा मार्केट स्कूल की दौड़ लगानी पड़ी। रामबाग स्कूल में तो पूरी व्यवस्था थी लेकिन जैसे ही खिलाड़ियों को बकरा मार्केट स्कूल में ठहराया तो वहां अव्यवस्थाओं का आलम मिला। रातभर खिलाड़ी अपनी-अपनी व्यवस्था बनाने में ही जुटे रहे।
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मच्छरों से जूझते रहे रातभर
बकरा मार्केट स्कूल में आकर पहुंचे तो जिन कमरों में उन्हें ठहराया गया था वहां पर मच्छरों ने सोने नहीं दिया। मच्छरों की फौज के कारण रातभर करवटें बदलते रहे।
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आशु, करनाल
बेंच लेकर गद्दे तक खुद बिछाए
स्टेडियम से रामबाग स्कूल पहुंचे और वहां से बकरा मार्केट स्कूल। स्कूल पहुंचने पर देखा कि व्यवस्था नहीं थी। बेंच को बाहर निकालने के बाद खुद गद्दे निकाले।
परमवीर, करनाल
आंखों में भरी रही नींद
रातभर ठीक ढंग से सोया भी नहीं गया। यहीं कारण है कि आंखें भारी-भारी हो रही है। खेलों से पहले ही यह व्यवस्था करनी चाहिए थी।
मोहित, करनाल
खिलाड़ियों के ठहराव का पूरा प्रबंध किया गया था। चार कमरों में गद्दों के अलावा सैनिटाइज, फोगिंग करवाई गई थी। स्टाफ की भी ड्यूटी लगा दी गई थी। आखिरी मौके पर पता चला कि केंद्र में बदलाव हुआ है तो खिलाड़ियों को बकरा मार्केट स्कूल भेज दिया गया था।
रमेश बतरा, प्रिंसिपल
खिलाड़ियों की बेहतर सहुलियत को देखते हुए केंद्र में बदलाव कर दिया गया था। बकरा मार्केट स्कूल में खिलाड़ियों के ठहराव की पूरी व्यवस्था करवाई गई थी।
एन सत्यन, जिला खेल अधिकारी