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ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप हैं गुरु : हेमसुता भारती
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नारायणगढ़। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान हुसैनी रोड स्थित आश्रम में रविवार को सत्संग में साध्वी हेमसुता भारती ने बताया कि हमारे शास्त्रों में परा और अपरा विद्या, दो प्रकार की विद्याओं का वर्णन किया है।
इसमें अपरा विद्या को शास्त्रों में अविद्या और परा विद्या ब्रह्मज्ञान को ही विद्या कहा है। ब्रह्मज्ञान ही मानव को उसके कर्म बंधनों से मुक्तकर श्रेष्ठ पथ पर अग्रसर करता है। ब्रह्मज्ञान ही आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाने वाला प्रकाश है। उन्होंने सतगुरु की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि गुुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश का साकार स्वरूप होते हैं। जीवन के श्रेष्ठ रास्ते पर प्रकाश देने वाले गुरु का स्थान संसार के समस्त संबंधों से श्रेष्ठ हैं।
उन्होंने बताया कि मौत से डर नहीं, समाधान चाहिए और वह समाधान है ब्रह्मज्ञान आधारित ध्यान-साधना। ध्यान आंखें बंद कर बैठने का नाम नहीं हैं, बल्कि तब शुरु होता हैं। जब साधक का तृतीय नेत्र ब्रह्मज्ञान द्वारा जागृत होता हैं। इस से मनुष्य अपनी इंद्रियों पर काबू पा लेता हैं और उसे ईश्वर की प्राप्ति संभव हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि पुण्य से मनुष्य को आनंद एवं समृद्धि मिलती हैं। पाप से मनुष्य के जीवन में कष्ट ही नहीं आते बल्कि उसका पूरा जीवन नारकीय बन जाता हैं।
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इसमें अपरा विद्या को शास्त्रों में अविद्या और परा विद्या ब्रह्मज्ञान को ही विद्या कहा है। ब्रह्मज्ञान ही मानव को उसके कर्म बंधनों से मुक्तकर श्रेष्ठ पथ पर अग्रसर करता है। ब्रह्मज्ञान ही आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाने वाला प्रकाश है। उन्होंने सतगुरु की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि गुुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश का साकार स्वरूप होते हैं। जीवन के श्रेष्ठ रास्ते पर प्रकाश देने वाले गुरु का स्थान संसार के समस्त संबंधों से श्रेष्ठ हैं।
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उन्होंने बताया कि मौत से डर नहीं, समाधान चाहिए और वह समाधान है ब्रह्मज्ञान आधारित ध्यान-साधना। ध्यान आंखें बंद कर बैठने का नाम नहीं हैं, बल्कि तब शुरु होता हैं। जब साधक का तृतीय नेत्र ब्रह्मज्ञान द्वारा जागृत होता हैं। इस से मनुष्य अपनी इंद्रियों पर काबू पा लेता हैं और उसे ईश्वर की प्राप्ति संभव हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि पुण्य से मनुष्य को आनंद एवं समृद्धि मिलती हैं। पाप से मनुष्य के जीवन में कष्ट ही नहीं आते बल्कि उसका पूरा जीवन नारकीय बन जाता हैं।
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