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Ambala News: गुप्त नवरात्र पर्व 100 अश्वमेघ यज्ञ के सामान फलदायक
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पंडित धर्मपाल शास्त्री
अंबाला सिटी। प्रतिवर्ष चार बार नवरात्रों का पर्व मां भक्तों की ओर से बड़ी ही श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। जिसमें दो बार गुप्त नवरात्रों का आगमन होता है और दो बार प्रत्यक्ष नवरात्र होते हैं। गुप्त नवरात्र माघ मास और आषाढ़ मास के अंतर्गत होते हैं, वहीं प्रत्यक्ष नवरात्रे चैत्र मास और शारदीय मास में आते हैं।
मां नवदुर्गा शास्त्रों के अनुसार गुप्त नवरात्रे में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से साधकों के सभी कष्टों का निवारण होता है। नवरात्रे के पहले दिन मां दुर्गा कैलाश पर्वत से धरती पर आती हैं, इस माघ मास के गुप्त नवरात्रे में माता रानी का आगमन घोड़े पर होगा। ज्योतिषियों की मानें तो गुप्त नवरात्रे 10 महाविद्याओं की पूजा-अर्चना गुप्त तरीके से की जाती है। इस बार शनिवार के दिन से माघ गुप्त नवरात्रे प्रारंभ किए जाएगें, इसी कारण से माता रानी का वाहन घोड़ा होगा, जबकि विसर्जन रविवार के दिन हो रहा है। जिसकारण भैंसे पर सवार होकर मां दुर्गा प्रस्थान करेंगी। इस बार गुप्त नवरात्रों का अहम महत्व माना जा रहा है। इन नवरात्रों को सभी भक्तों को श्रद्धापूर्वक मनाना चाहिए
अंबाला सिटी के शर्मा कॉलोनी के पंडित धर्मपाल शास्त्री ने बताया कि इस बार गुप्त नवरात्रे माघ शुक्ल प्रतिपदा तिथि से माघ गुप्त नवरात्रे का शुभारंभ हो रहा है। जोकि नवमी तिथि को समापन होगा। वैदिक पंचांग के अनुसार माघ गुप्त नवरात्रि 10 फरवरी दिन शनिवार से प्रारंभ होकर 18 को दिन रविवार को समापन होगा। माघ गुप्त नवरात्रे की घटस्थापना का मुहूर्त 10 को सुबह 8 बजकर 45 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 10 मिनट तक है, वहीं कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।
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अंबाला सिटी के मां महाकाली दुख भंजनी मंदिर के आचार्या पं. पंकज वशिष्ठ ने बताया कि माघ गुप्त नवरात्रि पूजा का मुख्य उद्देश्य साधकों और अघोरियों का तंत्र-मंत्र की सिद्धि पाना होता है, धार्मिक मान्यता के अनुसार इस पूजा को जितना गुप्त रखेगें, उतनी ही जल्दी साधक की मनोकामना संपूर्ण होगी। गुप्त नवरात्रों में मां दुर्गा जी के 9 स्वरूपों की पूजा की जाएगी। पहले दिन मां महाकाली, दूसरे दिन मां तारा, तीसरे दिन मां त्रिपुर सुंदरी, चौथे दिन मां भुवनेश्वरी, पांचवें दिन मां छिन्नमस्तिका, छठे दिन मां त्रिपुर भैरवी, सातवें दिन मां धूमावती, आठवें दिन मां बगलामुखी, नौवें दिन मां मातंगी और दसवें दिन मां कमला देवी जी की पूजा की जाएगी।
अंबाला सिटी के बलदेव नगर से पं. अश्वनी पराशर ने बताया कि गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की 10 महाविद्या प्रकट हुईं थी, माघ गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी शक्ति के 32 अलग-अलग नामों का जाप, दुर्गा सप्तशती, देवी महात्म्य, और श्रीमद्-देवी भागवत जैसे धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना सभी समस्याओं को समाप्त करता है। जीवन में सुखशांति प्राप्त करने में भी मदद करता है, धार्मिक शास्त्रों के अनुसार यह भी मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में श्रद्धापूर्वक की गई साधना जन्मकुंडली के समस्त दोषों को दूर करने वाली और धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष प्राप्त होना भी संभव है।
अंबाला छावनी महेश नगर से पं. अशोक शर्मा ने बताया कि नवरात्र के दिनों में प्रतिदिन सुबह विधिवत स्नान पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर माता जी की भव्य ढंग़ से सुंदर चौकी सजाकर माता के समक्ष कलश स्थापना की जाती है। कलश स्थापना पश्चात माता को चुनरी, सिंगार और अन्य पूजा सामग्री अर्पित कर मां के मंत्रों का जाप करते हुए दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए। अंत में मां की आरती करने के बाद उन्हें भोग लगाकर ही पूजा संपन्न करें। व्रत रखने वाले भक्तजन इस दिन फलाहार करते हुए व्रत विधिवत संपूर्ण करेगे।
अंबाला सिटी के मिलाप नगर के ज्योतिषी पं. रोहित कृष्ण शास्त्री ने बताया कि वर्ष में चार बार मां के नवरात्रे आते हैं। चैत्र मास, आश्विन मास, आषाढ़ मास व माद्य मास में मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र दुर्गा माता के नवविद्या होने के कारण 9 दिन में ही संपूर्ण करने का विधान है। आषाढ़ व माद्य मास में होने वाले नवरात्रोंं में गुप्त नवरात्रों की संज्ञा दी गई है। सामान्यत: भक्तजन गुप्त साधना के बल से राजभय, बंधनभय, शत्रु विनााश, राज्य विस्तार के लिए किया जाता है। गुप्त नवरात्र पर्व 100 अश्वमेद्य यज्ञ के सामान फलदायक होता है। मां दुर्गा को शक्ति का अवतार माना गया है। ऐसे में तंत्र-मंत्र एवं साधना से जुड़े भक्तजन इन गुप्त नवरात्रों में देवी मां की पूजा करते हैं, वहीं सामान्यता भक्तजन पहले दिन मां शैलपुत्री का व्रत धारण करेगें, इसी प्रकार दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कुष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि व आठवें दिन मां महागौरी का व्रत विधिवत करेगें।
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मां नवदुर्गा शास्त्रों के अनुसार गुप्त नवरात्रे में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से साधकों के सभी कष्टों का निवारण होता है। नवरात्रे के पहले दिन मां दुर्गा कैलाश पर्वत से धरती पर आती हैं, इस माघ मास के गुप्त नवरात्रे में माता रानी का आगमन घोड़े पर होगा। ज्योतिषियों की मानें तो गुप्त नवरात्रे 10 महाविद्याओं की पूजा-अर्चना गुप्त तरीके से की जाती है। इस बार शनिवार के दिन से माघ गुप्त नवरात्रे प्रारंभ किए जाएगें, इसी कारण से माता रानी का वाहन घोड़ा होगा, जबकि विसर्जन रविवार के दिन हो रहा है। जिसकारण भैंसे पर सवार होकर मां दुर्गा प्रस्थान करेंगी। इस बार गुप्त नवरात्रों का अहम महत्व माना जा रहा है। इन नवरात्रों को सभी भक्तों को श्रद्धापूर्वक मनाना चाहिए
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अंबाला सिटी के शर्मा कॉलोनी के पंडित धर्मपाल शास्त्री ने बताया कि इस बार गुप्त नवरात्रे माघ शुक्ल प्रतिपदा तिथि से माघ गुप्त नवरात्रे का शुभारंभ हो रहा है। जोकि नवमी तिथि को समापन होगा। वैदिक पंचांग के अनुसार माघ गुप्त नवरात्रि 10 फरवरी दिन शनिवार से प्रारंभ होकर 18 को दिन रविवार को समापन होगा। माघ गुप्त नवरात्रे की घटस्थापना का मुहूर्त 10 को सुबह 8 बजकर 45 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 10 मिनट तक है, वहीं कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।
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अंबाला सिटी के मां महाकाली दुख भंजनी मंदिर के आचार्या पं. पंकज वशिष्ठ ने बताया कि माघ गुप्त नवरात्रि पूजा का मुख्य उद्देश्य साधकों और अघोरियों का तंत्र-मंत्र की सिद्धि पाना होता है, धार्मिक मान्यता के अनुसार इस पूजा को जितना गुप्त रखेगें, उतनी ही जल्दी साधक की मनोकामना संपूर्ण होगी। गुप्त नवरात्रों में मां दुर्गा जी के 9 स्वरूपों की पूजा की जाएगी। पहले दिन मां महाकाली, दूसरे दिन मां तारा, तीसरे दिन मां त्रिपुर सुंदरी, चौथे दिन मां भुवनेश्वरी, पांचवें दिन मां छिन्नमस्तिका, छठे दिन मां त्रिपुर भैरवी, सातवें दिन मां धूमावती, आठवें दिन मां बगलामुखी, नौवें दिन मां मातंगी और दसवें दिन मां कमला देवी जी की पूजा की जाएगी।
अंबाला सिटी के बलदेव नगर से पं. अश्वनी पराशर ने बताया कि गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की 10 महाविद्या प्रकट हुईं थी, माघ गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी शक्ति के 32 अलग-अलग नामों का जाप, दुर्गा सप्तशती, देवी महात्म्य, और श्रीमद्-देवी भागवत जैसे धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना सभी समस्याओं को समाप्त करता है। जीवन में सुखशांति प्राप्त करने में भी मदद करता है, धार्मिक शास्त्रों के अनुसार यह भी मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में श्रद्धापूर्वक की गई साधना जन्मकुंडली के समस्त दोषों को दूर करने वाली और धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष प्राप्त होना भी संभव है।
अंबाला छावनी महेश नगर से पं. अशोक शर्मा ने बताया कि नवरात्र के दिनों में प्रतिदिन सुबह विधिवत स्नान पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर माता जी की भव्य ढंग़ से सुंदर चौकी सजाकर माता के समक्ष कलश स्थापना की जाती है। कलश स्थापना पश्चात माता को चुनरी, सिंगार और अन्य पूजा सामग्री अर्पित कर मां के मंत्रों का जाप करते हुए दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए। अंत में मां की आरती करने के बाद उन्हें भोग लगाकर ही पूजा संपन्न करें। व्रत रखने वाले भक्तजन इस दिन फलाहार करते हुए व्रत विधिवत संपूर्ण करेगे।
अंबाला सिटी के मिलाप नगर के ज्योतिषी पं. रोहित कृष्ण शास्त्री ने बताया कि वर्ष में चार बार मां के नवरात्रे आते हैं। चैत्र मास, आश्विन मास, आषाढ़ मास व माद्य मास में मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र दुर्गा माता के नवविद्या होने के कारण 9 दिन में ही संपूर्ण करने का विधान है। आषाढ़ व माद्य मास में होने वाले नवरात्रोंं में गुप्त नवरात्रों की संज्ञा दी गई है। सामान्यत: भक्तजन गुप्त साधना के बल से राजभय, बंधनभय, शत्रु विनााश, राज्य विस्तार के लिए किया जाता है। गुप्त नवरात्र पर्व 100 अश्वमेद्य यज्ञ के सामान फलदायक होता है। मां दुर्गा को शक्ति का अवतार माना गया है। ऐसे में तंत्र-मंत्र एवं साधना से जुड़े भक्तजन इन गुप्त नवरात्रों में देवी मां की पूजा करते हैं, वहीं सामान्यता भक्तजन पहले दिन मां शैलपुत्री का व्रत धारण करेगें, इसी प्रकार दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कुष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि व आठवें दिन मां महागौरी का व्रत विधिवत करेगें।

पंडित धर्मपाल शास्त्री

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