{"_id":"6a46e01e476d47a9f80c1ac5","slug":"groundwater-levels-have-decreased-due-to-indiscriminate-exploitation-and-environmental-changes-ambala-news-c-36-1-amb1002-165676-2026-07-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: अंधाधुंध दोहन व पर्यावरण में बदलाव से घटा भूजल स्तर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: अंधाधुंध दोहन व पर्यावरण में बदलाव से घटा भूजल स्तर
Fri, 03 Jul 2026 03:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 03 Jul 2026 03:33 AM IST
विज्ञापन
अंबाला। मासूम निरवैर के बोरवेल में गिरने के इस दर्दनाक हादसे ने क्षेत्र में लगातार गिरते भूजल स्तर को भी उजागर किया है। धन्यौड़ा के ग्रामीणों ने इस बदलाव पर गहरी चिंता व्यक्त की।
ग्रामीण ताया कप्तान सिंह, हैप्पी ने बताया कि आज से करीब 20 साल पहले तक गांव और आसपास के खेतों में महज 210 फीट की गहराई पर ही पर्याप्त पानी मिल जाता था।
पिछले दो दशकों में अंधाधुंध दोहन और पर्यावरण में आए बदलाव के कारण भूजल स्तर लगातार घटता चला गया। ग्रामीणों ने बताया कि आज के समय में पानी के लिए किसानों को 500 से लेकर 550 फीट की गहराई तक बोरवेल करवाने पड़ रहे हैं। इसी घटते जलस्तर की वजह से जमीन के नीचे पानी के कई नए रिसाव क्षेत्र बन गए हैं, जो आज 220 फीट की गहराई पर फंसे मासूम निरवैर को बाहर निकालने में सबसे बड़ी तकनीकी बाधा साबित हो रहे हैं।
विज्ञापन
बाढ़ का दंश झेलता है गांव
धन्यौड़ा गांव में कुछ जमीन टांगरी नदी के पास लगती है। जब भी टांगरी नदी में पहाड़ों से बारिश का पानी आता है और टांगरी ओवरफ्लो होने से नदी का पानी खेताें में आ जाता है। इसके साथ गाद भी आती है।
विज्ञापन
ग्रामीण ताया कप्तान सिंह, हैप्पी ने बताया कि आज से करीब 20 साल पहले तक गांव और आसपास के खेतों में महज 210 फीट की गहराई पर ही पर्याप्त पानी मिल जाता था।
विज्ञापन
पिछले दो दशकों में अंधाधुंध दोहन और पर्यावरण में आए बदलाव के कारण भूजल स्तर लगातार घटता चला गया। ग्रामीणों ने बताया कि आज के समय में पानी के लिए किसानों को 500 से लेकर 550 फीट की गहराई तक बोरवेल करवाने पड़ रहे हैं। इसी घटते जलस्तर की वजह से जमीन के नीचे पानी के कई नए रिसाव क्षेत्र बन गए हैं, जो आज 220 फीट की गहराई पर फंसे मासूम निरवैर को बाहर निकालने में सबसे बड़ी तकनीकी बाधा साबित हो रहे हैं।
विज्ञापन
बाढ़ का दंश झेलता है गांव
धन्यौड़ा गांव में कुछ जमीन टांगरी नदी के पास लगती है। जब भी टांगरी नदी में पहाड़ों से बारिश का पानी आता है और टांगरी ओवरफ्लो होने से नदी का पानी खेताें में आ जाता है। इसके साथ गाद भी आती है।