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Ambala News: गोरखा राइफल ने लखनऊ में डायमंड जुबली के लिए मंगाईं थी प्लेटें, गलती से पहुंची फीनिक्स क्लब
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अंबाला। फीनिक्स क्लब में पिछले दिनों सेना की रेजीमेंट की प्लेटें मिली थी। इस मामले में पड़ताल करने पर सामने आया कि यह प्लेटें सेना की गोरखा राइफल्स के लिए बनाई गई थी। दरअसल, फरवरी माह में लखनऊ में गोरखा राइफल ने अपनी डायमंड जुबली पर कार्यक्रम आयोजित किया था। जिसमें ऑफिसर मैस में प्रयोग के लिए अपने लोगो वाली प्लेटों का आर्डर दिया था।
दिसंबर में 400 प्लेटें अंबाला के डीलर ने भेज दी थी। इन प्लेटों को जयपुर से बनवाया गया था और यह काफी महंगी थी। जब आर्डर गोरखा राइफल के पास पहुंचा तो उन्हें प्लेटें काफी पसंद आईं। उन्होंने दोबारा से प्लेटों का ऑर्डर दे दिया। कंपनी से यह ऑर्डर अंबाला सप्लायर के पास आ गया। इस दौरान फीनिक्स क्लब ने भी प्लेटों का ऑर्डर इसी सप्लायर काे दिया था। कारिंदे ने प्लेटों का बॉक्स फीनिक्स क्लब में सप्लाई कर दिया। हाल ही में अंबाला में सेना ने भी इस मामले को संज्ञान में लिया, मगर अंबाला से जुड़ा उन्हें इसमें कुछ नहीं मिला।
एक जैसी थी पैकिंग
सप्लायर इंद्रपाल सिंह ने बताया कि वह वर्षों से सेना के लिए सामान की सप्लाई का कार्य करता है। बीते दिनों उनकी मां की तबीयत खराब थी, वह उन्हें लेकर अस्पताल में व्यस्त थे। इसी दौरान दोनों ही प्लेटों की पैकेजिंग एक सी थी तो उनके कारिंदे ने गलती से गोरखा रेजीमेंट को जाने वाला प्लेटों का बॉक्स फीनिक्स क्लब को भेज दिया।
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फीनिक्स क्लब प्रबंधन द्वारा प्लेटें चलाना गलत
फीनिक्स क्लब प्रबंधन को इन्हें तत्काल वापस कराना चाहिए था, मगर यह वापस नहीं कराई और इनका प्रयोग भी कर लिया। मामले पर जब विवाद खड़ा हुआ तब जाकर उन्होंने प्लेटों का चलन बंद किया।
लोगो लगी प्लेटों के लिए क्या है प्रोटोकॉल
दरअसल अधिकारियों या वीआईपी लोगों के लिए सेना में लोगो लगी प्लेटों का प्रयोग किया जाता है। यह अक्सर ऑफिसर्स मैस द्वारा ऑर्डर देकर बनवाई जाती हैं। ऐसे लोगो वाली प्लेटों का बाहर प्रयोग करना प्रतिबंध की श्रेणी में आता है। अब इस मामले पर फीनिक्स क्लब प्रबंधन की ही जवाबदेही बनती है।
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दिसंबर में 400 प्लेटें अंबाला के डीलर ने भेज दी थी। इन प्लेटों को जयपुर से बनवाया गया था और यह काफी महंगी थी। जब आर्डर गोरखा राइफल के पास पहुंचा तो उन्हें प्लेटें काफी पसंद आईं। उन्होंने दोबारा से प्लेटों का ऑर्डर दे दिया। कंपनी से यह ऑर्डर अंबाला सप्लायर के पास आ गया। इस दौरान फीनिक्स क्लब ने भी प्लेटों का ऑर्डर इसी सप्लायर काे दिया था। कारिंदे ने प्लेटों का बॉक्स फीनिक्स क्लब में सप्लाई कर दिया। हाल ही में अंबाला में सेना ने भी इस मामले को संज्ञान में लिया, मगर अंबाला से जुड़ा उन्हें इसमें कुछ नहीं मिला।
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एक जैसी थी पैकिंग
सप्लायर इंद्रपाल सिंह ने बताया कि वह वर्षों से सेना के लिए सामान की सप्लाई का कार्य करता है। बीते दिनों उनकी मां की तबीयत खराब थी, वह उन्हें लेकर अस्पताल में व्यस्त थे। इसी दौरान दोनों ही प्लेटों की पैकेजिंग एक सी थी तो उनके कारिंदे ने गलती से गोरखा रेजीमेंट को जाने वाला प्लेटों का बॉक्स फीनिक्स क्लब को भेज दिया।
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फीनिक्स क्लब प्रबंधन द्वारा प्लेटें चलाना गलत
फीनिक्स क्लब प्रबंधन को इन्हें तत्काल वापस कराना चाहिए था, मगर यह वापस नहीं कराई और इनका प्रयोग भी कर लिया। मामले पर जब विवाद खड़ा हुआ तब जाकर उन्होंने प्लेटों का चलन बंद किया।
लोगो लगी प्लेटों के लिए क्या है प्रोटोकॉल
दरअसल अधिकारियों या वीआईपी लोगों के लिए सेना में लोगो लगी प्लेटों का प्रयोग किया जाता है। यह अक्सर ऑफिसर्स मैस द्वारा ऑर्डर देकर बनवाई जाती हैं। ऐसे लोगो वाली प्लेटों का बाहर प्रयोग करना प्रतिबंध की श्रेणी में आता है। अब इस मामले पर फीनिक्स क्लब प्रबंधन की ही जवाबदेही बनती है।