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जबरन डिलीवरी मामला : पीएमओ ने की जांच पूरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Apr 2024 04:31 AM IST
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Forced delivery case: PMO completes investigation
अंबाला। वीडियो कॉल के जरिए डिलिवरी करवाने और गर्भ में बच्चे की मौत और बच्चेदानी फटने के लगे गंभीर आरोपों के पहले चरण की जांच छावनी नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने पूरी कर ली है। पीएमओ डॉ. लोकवीर द्वारा गठित तीन सीनियर डॉक्टर पूजा पेंटल, डॉ. मुकेश और डॉ. विनय ने पीड़ित पक्ष और संबंधित डॉक्टर और संबंधित नर्सिंग ऑफिसर के बयान दर्ज कर लिया है। यह जांच पीएमओ से सीएमओ कार्यालय पहुंच गई है।
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आगे इस मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग का नेग्लीजेंसी बोर्ड करेगा। उनकी जांच के बाद ही पता चलेगा कि अस्पताल स्टाफ पर लगे आरोप सही हैं या नहीं। डॉक्टरों के दिए बयानों में जहां पीड़ित पक्ष आरोप लगा रहा है तो वहीं डॉक्टर और नर्सिंग ऑफिसर सभी आरोपों को निराधार बता रहा है। उनका कहना है कि वीडियो कॉल हुई थी लेकिन वो केवल गर्भ में पल रहे बच्चे की प्रोग्रेस को देखने के लिए थी न कि डिलिवरी करवाने के लिए।
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यह था पूरा मामला
बता दें कि छावनी के बंधु नगर निवासी सुरेश ने आरोप लगाया था कि वह 25 मार्च को अपनी पत्नी को लेकर छावनी नागरिक अस्पताल के प्रसूति विभाग में आया था। प्रसव पीड़ा उठने पर उसे भीतर ले गए थे। कुछ ही देर बाद पत्नी की तबीयत बिगड़ गई और वह बाहर आई। पत्नी का आरोप था कि वीडियो कॉल के जरिए स्टाफ जबरन डिलिवरी करवाने का दबाव डाल रहा था। बाद में वह निजी अस्पताल ले गए, जहां पर गर्भ में लड़का मृत पाया गया और बच्चेदानी भी फट गई थी। दो बेटियों के बाद लड़का हुआ था और पत्नी अब मां नहीं बन सकती। इसको लेकर पीड़ित ने सरकार, स्वास्थ्य विभाग और पडाव थाना पुलिस को शिकायत सौंपी थी।
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