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छावनी नागरिक अस्पताल में पहली बार 8 साल के बच्चे ने दी कैंसर को मात

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Jun 2021 01:36 AM IST
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For the first time in the Cantonment Civil Hospital, an 8-year-old child defeated cancer
अंबाला। पेट व गर्दन की कई गांठ यानी हाजकिन लीम्फोमा कैंसर से परेशान 8 वर्षीय आर्यन को छावनी नागरिक अस्पताल में नया जीवनदान मिला। बाल कैंसर रोग विशेषज्ञ की निगरानी में उपचाराधीन तीसरी स्टेज के मरीज ने पहली बार नागरिक अस्पताल में कैंसर को मात दी। शरीर में दो जगह गांठ होने के कारण बच्चा ढाई साल से परेशान था लेकिन प्राइवेट अस्पतालों में कभी कोई बीमारी बताकर उपचार शुरू कर दिया जाता था तो कभी कोई। आखिर में छह माह पहले यानी दिसंबर 2020 में कुरुक्षेत्र के पिपली से मजदूरी करने वाला पिता बच्चे को लेकर छावनी नागरिक अस्पताल की कैंसर ओपीडी में पहुंचा। जहां डॉक्टरों ने टेस्ट व बायोप्सी की तो हाजकिन लीम्फोमा कैंसर सामने आया। गंभीरता से जांच करने पर पता चला कि बच्चा अनदेखी का शिकार होने के कारण स्टेज थ्री तक पहुंच चुका था। अस्पताल के पीएमओ डॉ. राकेश सहल ने गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का आभार जताया कि उनके प्रयासों से अस्पताल में कैंसर का उपचार शुरू हो सका।
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12 साइकिल्स कीमो थेरैपी ने खोल दी सभी गांठें
बाल कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. विनीत आनंद ने बताया कि हाजकिन लीम्फोमा कैंसर के लक्षण सामने आने पर कीमो थेरैपी साथ ही शुरू कर दी। सीधा तीसरी स्टेज में मरीज को कैंसर का पता चलने पर रिकवर करना थोड़ा सा मुश्किल होता है लेकिन छह माह में 12 साइकिल्स कीमो थेरैपी से कैंसर को मात दी गई। आर्यन की सभी गांठ खुल गई है। पूरा उपचार मरीज का बिल्कुल निशुल्क किया गया। उधर, परिजनों ने भी बच्चे के ठीक होने पर डॉक्टर विनीत व पीएमओ डॉ. राकेश सहल का दिल से आभार जताया। उनके प्रयास से ही बेटा कैंसर से ठीक होकर घर लौटेगा।
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हड्डी, ब्लड व किडनी के कैंसर तीन बच्चे उपचाराधीन
बच्चों की कैंसर ओपीडी में कुल चार कैंसर से ग्रस्त बच्चे उपचाराधीन थी लेकिन आर्यन के ठीक होने के बाद अब तीन मरीज रह गए है। इनमें हड्डी, ब्लड व किडनी के कैंसर मरीज शामिल हैं। बता दें कि अधिकतर प्राइवेट अस्पतालों में भी बाल कैंसर का उपचार नहीं होता है। पहले नागरिक अस्पताल से सीधा पीजीआई रेफर किया जाता था।
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बाल कैंसर के लक्षण
- बार-बार बुखार आना
- खून की कमी होना
- शरीर पर नीले निशान पड़ना
- शरीर में जगह-जगह गांठ होना
- जोड़ों में सुजन होना
- वजन कम होना
- लीवर व स्प्लीन का बढ़ना
बच्चों में होने वाला कैंसर बड़ों के कैंसर से काफी अलग होता है। बच्चों के शरीर में गांठ होती है तो उसकी तुरंत विशेषज्ञ से जांच करवाएं। 80 फीसदी मरीज कैंसर से ग्रस्त होने के बाद उसे मात दे सकते हैं। जरूरत है तो केवल समय रहते उपचार शुरू करवाने की।
-डॉ. विनीत आनंद, बाल रोग कैंसर विशेषज्ञ
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